'कृपया मदद भेजें': अमेरिकी मिसाइल हमले के बाद टैंकर पर सवार भारतीय चालक दल की आपबीती
'कृपया मदद भेजें': अमेरिकी मिसाइल हमले के बाद जहाज से आई मदद की गुहार
ओमान के पास अमेरिकी मिसाइल हमले में एक प्रतिबंधित टैंकर के क्षतिग्रस्त होने के बाद ओमान के अधिकारियों ने सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया।
सोमवार को ओमान की खाड़ी की शांति को चीरती हुई रेडियो पर एक बेहद डरावनी और हताश पुकार सुनाई दी। एक क्रू मेंबर ने संचार माध्यम पर चिल्लाते हुए कहा, "सर, यह मोटर टैंकर मिरावेक्स है... हमारे जहाज में आग लग गई है और यह डूब रहा है।" फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) द्वारा बाद में साझा किए गए इस संदेश में जहाज के संपर्क टूटने से पहले के खौफनाक पलों को कैद किया गया था। जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकों के लिए, जो एक सामान्य यात्रा थी, वह तब जीवन-मरण के संकट में बदल गई जब एक अमेरिकी F-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट ने जहाज के इंजन और स्टीयरिंग वाले हिस्से पर सटीक निशाना साधा।
आग से लागू की गई नाकेबंदी
यह हमला कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सैन्य कार्रवाई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) ने पुष्टि की है कि मिरावेक्स को ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नेतृत्व वाली नाकेबंदी का उल्लंघन करने के कारण निशाना बनाया गया। क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है, और अमेरिका ने प्रभावी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। Centcom के अधिकारियों ने बताया कि कड़े प्रवर्तन उपायों के तहत मिरावेक्स सातवां ऐसा जहाज है जिसे निष्क्रिय किया गया है। उनका दावा है कि चालक दल ने निर्देशों का पालन करने के बार-बार दिए गए आदेशों को नजरअंदाज किया था।
यह टैंकर, जो उस समय तेल नहीं ले जा रहा था, हमले के बाद एक आसान लक्ष्य बन गया। भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे तक, जहाज में भीषण आग लग गई, जिससे चालक दल फंस गया। हालांकि भारत के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के ओपेश कुमार शर्मा ने आग लगने की पुष्टि की, लेकिन सरकार ने अपनी सार्वजनिक टिप्पणी में संयम बनाए रखा है और मुख्य रूप से अपने नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया है।
वक्त के खिलाफ दौड़
24 भारतीय चालक दल के सदस्यों के परिवारों के लिए, शुरुआती संकट कॉल और ओमान की सेना द्वारा किए गए बचाव कार्य के बीच के घंटे बेहद कष्टदायक थे। हालांकि सभी नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन इस घटना ने नाविक समुदाय पर गहरा प्रभाव छोड़ा है। FSUI और ऑल इंडिया सीफेयरर्स यूनियन ने महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम किया, जिन्हें जहाज के पानी में डूबने के दौरान लगातार SOS संदेश मिल रहे थे। बीबीसी द्वारा सत्यापित तस्वीरों में हमले के तुरंत बाद पास में ही एक अमेरिकी सैन एंटोनियो-क्लास युद्धपोत दिखाई दे रहा है, जो इस घटना में शामिल ताकत के भारी अंतर को दर्शाता है।
यह क्यों मायने रखता है
यह घटना वैश्विक भू-राजनीति और भारतीय मर्चेंट नेवी के बीच के खतरनाक जुड़ाव को रेखांकित करती है। जैसे-जैसे बड़ी शक्तियां ईरान पर दबाव बढ़ा रही हैं, अक्सर भारतीय कार्यबल—जो वैश्विक शिपिंग की रीढ़ है—खुद को इस संघर्ष के बीच फंसा हुआ पाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल एक व्यापार मार्ग नहीं रहा; यह युद्ध का एक उच्च-जोखिम वाला अखाड़ा बन गया है। नई दिल्ली के लिए, यह एक नाजुक राजनयिक चुनौती पेश करता है: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के आक्रामक प्रवर्तन के बीच तटस्थता बनाए रखना और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। पैटर्न स्पष्ट है: जब तक नाकेबंदी जारी रहेगी, इन जलक्षेत्रों में भारतीय नागरिकों के लिए खतरा बढ़ता ही जाएगा।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।