केरल में पेंशन पर रोक: 'स्त्री सुरक्षा' योजना बंद करने पर LDF ने सरकार को घेरा
केरल विधानसभा: 'स्त्री सुरक्षा' योजना के तहत लाभ का भुगतान न होने पर विपक्ष ने किया विरोध प्रदर्शन
केरल विधानसभा में उस समय तीखी बहस देखने को मिली जब विपक्षी दल LDF ने 'स्त्री सुरक्षा' योजना के तहत बेरोजगार महिलाओं और ट्रांसवुमन को मिलने वाली पेंशन राशि का भुगतान तुरंत बहाल करने की मांग की।
इस सोमवार केरल विधानसभा के गलियारों में तनाव का माहौल था, क्योंकि विपक्षी दल LDF ने अपनी परंपरा से हटकर कदम उठाया। स्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद सामान्यतः वॉकआउट करने के बजाय, विपक्ष ने सदन में ही डटे रहने का फैसला किया। यह कदम 'स्त्री सुरक्षा' योजना पर रोक लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ उनके कड़े विरोध को दर्शाता है। बेरोजगार महिलाओं और ट्रांसवुमन को मासिक पेंशन देने के लिए बनाई गई यह योजना, अब प्रशासनिक जांच और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों के बीच फंस गई है।
स्पीकर तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और सरकार के इस रुख का समर्थन किया कि सत्यापन प्रक्रिया अनिवार्य है। हालांकि, उन हजारों लाभार्थियों के लिए, जो अधर में लटके हुए हैं, यह प्रशासनिक देरी जीवन-यापन का गंभीर संकट बन गई है।
जांच का गतिरोध
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इस नीति के क्रियान्वयन और समय पर सवाल उठाते हुए भुगतान रोकने का बचाव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली LDF सरकार ने 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले जल्दबाजी में यह योजना लागू की और जरूरी जमीनी स्तर की जांच को दरकिनार कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, "लाभार्थी सूची को लेकर कई शिकायतें मिली हैं," और बताया कि स्थानीय पार्टी इकाइयों ने कथित तौर पर चयन प्रक्रिया को अपने हाथ में ले लिया था, जिससे औपचारिक समितियां बाहर हो गईं। सरकार के अनुसार, बजट में 1,770 करोड़ रुपये आवंटित होने के बावजूद, वे तब तक भुगतान जारी नहीं कर सकते जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि सूची राजनीतिक रूप से प्रभावित नहीं है।
विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने पलटवार करते हुए सरकार के रुख को महिलाओं और ट्रांसवुमन के प्रति अनुचित करार दिया। उन्होंने राजनीतिक पक्षपात के दावों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि चयन प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी थी। विजयन ने कहा, "सबसे अधिक आवेदन मलप्पुरम जिले से मिले, उसके बाद पलक्कड़ का नंबर है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रणाली को K-SMART, आधार और राशन कार्ड डेटाबेस के साथ एकीकृत किया गया था ताकि केवल पात्र AAY और BPL कार्डधारक ही इसका लाभ उठा सकें।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: नीतिगत निरंतरता का संकट
यह टकराव भारतीय राज्य-स्तरीय शासन में एक बार-बार आने वाली कमजोरी को उजागर करता है: 'विरासत परियोजनाओं' की दुविधा। जब कोई नया प्रशासन कार्यभार संभालता है, तो पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के अंतिम महीनों में लागू की गई सामाजिक कल्याण योजनाओं को अक्सर संदेह या विरोध की दृष्टि से देखा जाता है। मूल समस्या यह है कि चुनावी चक्र और सामाजिक सुरक्षा की निरंतरता के बीच कोई स्पष्ट विभाजन नहीं है। भुगतान रोककर, वर्तमान सरकार समाज के कमजोर वर्गों को नाराज करने का जोखिम उठा रही है, जबकि विपक्ष स्पष्ट रूप से सदन का उपयोग खुद को वंचितों के रक्षक के रूप में पेश करने के लिए कर रहा है।
चाहे 'स्त्री सुरक्षा' योजना जल्दबाजी में लागू की गई हो या नहीं, इस प्रशासनिक रोक से पैदा हुआ खालीपन यह बताता है कि जब तक लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक नहीं हो जाता और इसे स्वतंत्र, स्थायी निकायों द्वारा नहीं संभाला जाता, तब तक ऐसी कल्याणकारी योजनाएं सत्ता परिवर्तन की बलि चढ़ती रहेंगी। फिलहाल, हजारों लोग अपनी मासिक पेंशन के लिए विधायी गतिरोध में फंसे हुए हैं और सरकार द्वारा 'जांच' के चरण से आगे बढ़कर वास्तविक वितरण शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।