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ऑपरेशन लोटस फेल हो चुका है: कीर्ति आजाद ने NDA को समर्थन देने वाले 20 TMC सांसदों के दावों को नकारा

'ऑपरेशन लोटस फेल हो चुका है': TMC नेता कीर्ति आजाद ने 20 सांसदों के NDA में जाने के दावों को खारिज किया

द्वारा बिज़नेस डेस्कप्रकाशित 9 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
ऑपरेशन लोटस फेल हो चुका है: कीर्ति आजाद ने 20 TMC सांसदों के दावों को नकारा
ऑपरेशन लोटस फेल हो चुका है: कीर्ति आजाद ने 20 TMC सांसदों के दावों को नकारा

वरिष्ठ TMC नेता कीर्ति आजाद ने एक वायरल सूची को पूरी तरह से बकवास बताया है, जिसमें दावा किया गया था कि पार्टी के कई सांसद सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने इस नैरेटिव को पार्टी में फूट डालने की एक मनगढ़ंत कोशिश करार दिया है।

कोलकाता और नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस सप्ताह एक वायरल ग्राफिक ने हलचल मचा दी, जिसमें कथित तौर पर 20 TMC सांसदों के नाम थे जो नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल होने के लिए तैयार बताए गए थे। सोशल मीडिया पर तेजी से फैली इस सूची में सुदीप बंद्योपाध्याय, सौगत रॉय और काकली घोष दस्तीदार जैसे पार्टी के बड़े नेताओं के नाम शामिल थे। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तुरंत इस अटकलों पर विराम लगाते हुए इसे 'ऑपरेशन लोटस' की एक हताश और विफल कोशिश करार दिया है।

सीधा खंडन

TMC के प्रमुख नेता कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस सूची को "फर्जी और मनगढ़ंत" बताया। उन्होंने दावा किया कि इस दस्तावेज को फैलाने के पीछे BJP का हाथ है, जो ममता बनर्जी की पार्टी के भीतर कृत्रिम संकट पैदा करने के लिए दबाव की रणनीति अपना रही है। आजाद ने स्पष्ट रूप से कहा कि सूची में शामिल कई लोगों ने पहले ही किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने या NDA को समर्थन देने की बात से साफ इनकार कर दिया है।

आजाद ने घोषणा की, "ऑपरेशन लोटस फेल हो चुका है। अमित शाह विफल रहे हैं।" उन्होंने इस नैरेटिव को पार्टी को अस्थिर करने का एक बनावटी प्रयास बताया। यह सूची काफी विस्तृत थी, जिसमें वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ जून मालिया और रचना बनर्जी जैसी अभिनेत्री से नेता बनीं हस्तियों, और यूसुफ पठान व दीपक अधिकारी (देव) जैसे क्रिकेटर से सांसद बने नेताओं के नाम भी थे। इन आरोपों की गंभीरता के बावजूद, सूची में शामिल किसी भी व्यक्ति की ओर से दल बदलने की पुष्टि करने वाला कोई औपचारिक बयान नहीं आया है।

यह महत्वपूर्ण क्यों है

यह घटना उस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हुई है जो वास्तव में चल रही है। वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय के पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफे ने ऐसी अफवाहों को हवा देने का काम किया है। भारतीय राजनीति में "दलबदल" का नैरेटिव एक पुराना हथकंडा है; नामों की सूची फैलाकर राजनीतिक विरोधी किसी भी पार्टी को अपने बचाव में उलझा सकते हैं, ताकि वे विधायी या चुनावी एजेंडे पर ध्यान न दे सकें।

TMC के लिए तत्काल चुनौती एकता बनाए रखना है, क्योंकि वह आंतरिक असंतोष और केंद्र सरकार के दबाव का सामना कर रही है। एक डिजिटल ग्राफिक कितनी आसानी से राजनीतिक विमर्श को बाधित कर सकता है, यह मौजूदा अस्थिर माहौल को दर्शाता है। क्या यह मनोवैज्ञानिक युद्ध का एक अकेला प्रयास है या वास्तविक राजनीतिक बदलाव की शुरुआत, यह देखना बाकी है, लेकिन फिलहाल नेतृत्व इस "फर्जी" सूची को आक्रामक तरीके से खारिज कर अपनी पार्टी को एकजुट रखने में जुटा है।

बड़ी तस्वीर

यहां पैटर्न स्पष्ट है: जब भी असंतोष की कोई सुगबुगाहट होती है या कोई बड़ा इस्तीफा होता है, तो अफवाहों का बाजार गर्म हो जाता है। BJP का "ऑपरेशन लोटस" शब्द भारतीय राजनीतिक शब्दावली का एक स्थायी हिस्सा बन गया है, जिसका उपयोग पार्टी के सत्ता विस्तार के आक्रामक प्रयासों को बताने के लिए किया जाता है। हालांकि TMC ने इन विशिष्ट दावों को सफलतापूर्वक खारिज कर दिया है, लेकिन ऐसी खबरों की आवृत्ति यह दर्शाती है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी की निष्ठा को लेकर लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

द्वारा बिज़नेस डेस्क
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