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ऑपरेशन इंटीग्रिटी: NEET-UG री-टेस्ट को सुरक्षित बनाने के लिए वायुसेना तैनात

नीट री-एग्जाम के लिए मिशन मोड में वायुसेना, चार दिन में भरी 200 उड़ानें

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 18 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
ऑपरेशन इंटीग्रिटी: NEET-UG री-टेस्ट को सुरक्षित बनाने के लिए वायुसेना तैनात
ऑपरेशन इंटीग्रिटी: NEET-UG री-टेस्ट को सुरक्षित बनाने के लिए वायुसेना तैनात

भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में छात्रों का भरोसा बहाल करने की कोशिश में, सरकार ने प्रश्न पत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय वायुसेना की मदद ली है।

NEET-UG की दोबारा परीक्षा का इंतजार कर रहे 22 लाख छात्रों के लिए 21 जून की तारीख उनके भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। 5 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक विवाद और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। इस बार प्रश्न पत्रों के वितरण की पूरी प्रक्रिया को सैन्य सटीकता के साथ अंजाम दिया जा रहा है।

एयर-ब्रिज रणनीति

13 जून से ही वायुसेना मिशन मोड में काम कर रही है। पारंपरिक सड़क परिवहन से जुड़े जोखिमों को खत्म करने के लिए, अधिकारियों ने Mi-17 हेलीकॉप्टर और भारी मालवाहक विमानों को तैनात किया है ताकि सीलबंद परीक्षा सामग्री को देश भर में सुरक्षित पहुंचाया जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वायुसेना ने महज चार दिनों में 200 से अधिक उड़ानें भरी हैं और 18 निर्दिष्ट क्षेत्रों के लिए एक लॉजिस्टिक 'एयर-ब्रिज' तैयार किया है।

यह केवल गति के बारे में नहीं है, बल्कि पूर्ण नियंत्रण के बारे में है। सैन्य संसाधनों का उपयोग करके, अधिकारी आपूर्ति श्रृंखला की उन खामियों को दूर कर रहे हैं जिनके कारण पिछली बार सुरक्षा में चूक हुई थी। एक बार जब प्रश्न पत्र हवाई मार्ग से इन मुख्य केंद्रों तक पहुंच जाते हैं, तो उन्हें कड़ी सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत स्थानीय केंद्रों तक भेजा जाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

किसी सिविल परीक्षा के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती एक अभूतपूर्व कदम है, जो भारत की परीक्षा प्रणाली के सामने आए संकट की गंभीरता को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि सरकार अब परीक्षा सुरक्षा को केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का विषय मान रही है।

हालांकि Mi-17 जैसे विमानों का उपयोग एक अस्थायी 'लीक-प्रूफ' सुरक्षा कवच प्रदान करता है, लेकिन बड़ी तस्वीर कहीं अधिक जटिल है। वायुसेना पर निर्भरता मौजूदा लॉजिस्टिक चेन में भरोसे की कमी को उजागर करती है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह हाई-सिक्योरिटी मिशन NEET-UG प्रक्रिया की विश्वसनीयता को स्थायी रूप से बहाल कर पाएगा, या यह केवल एक गहरी संस्थागत समस्या का तात्कालिक समाधान बनकर रह जाएगा। जैसे-जैसे 21 जून की तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह सैन्य स्तर का प्रयास लाखों उम्मीदवारों के लिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष अनुभव में बदल पाएगा।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।