Opendoor ने भारत में अपना कामकाज बंद किया: CEO का दावा, ध्यान अमेरिकी ग्राहकों पर होना चाहिए
Opendoor ने अपने पूरे भारतीय वर्कफोर्स को निकाला; CEO बोले- 'ग्राहक अमेरिका में हैं'

रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म ने अपने पूरे भारतीय वर्कफोर्स की छंटनी कर दी है। यह कंपनी की रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि नेतृत्व अब अपनी भौगोलिक प्राथमिकताओं को फिर से तय कर रहा है।
Opendoor के भारतीय दफ्तरों में सन्नाटा पसर गया है। एक ऐसे फैसले ने स्थानीय टेक और बिजनेस जगत को हैरान कर दिया है, जिसमें रियल एस्टेट दिग्गज ने अपने पूरे भारतीय वर्कफोर्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह उन कंपनियों के लिए एक बड़ा यू-टर्न है, जिन्होंने पहले अपने टेक-हैवी प्लेटफॉर्म को सपोर्ट करने के लिए भारत के विशाल इंजीनियरिंग और ऑपरेशनल टैलेंट का इस्तेमाल किया था।
जब इस अचानक लिए गए फैसले के बारे में पूछा गया, तो कंपनी के नेतृत्व ने दो टूक जवाब दिया। CEO का कहना है कि "ग्राहक अमेरिका में हैं," जो उस ग्लोबल ऑपरेशनल मॉडल से पीछे हटने का संकेत है जिसे महामारी के दौरान कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनाया था। इस फैसले की चपेट में आए कर्मचारियों के लिए यह खबर बिना किसी चेतावनी के आई, जिससे सैकड़ों पेशेवर अचानक नौकरी के बाजार में संघर्ष करने को मजबूर हो गए हैं।
रणनीति में बदलाव
यह घटनाक्रम अमेरिकी टेक सेक्टर के भीतर एक व्यापक और अक्सर दर्दनाक बदलाव का हिस्सा है। जो कंपनियां कभी भारत को बैक-एंड ऑपरेशंस के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र मानती थीं, वे अब शेयरधारकों को खुश करने और केवल मुख्य राजस्व-सृजन वाले बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए खर्चों में कटौती कर रही हैं। अपने उपभोक्ता आधार की भौगोलिक स्थिति को छंटनी का मुख्य कारण बताकर, Opendoor यह संकेत दे रहा है कि उसका भविष्य का विकास पूरी तरह से केंद्रीकृत होगा।
Opendoor का अपने पूरे भारतीय वर्कफोर्स को निकालने का फैसला मिड-टू-लार्ज-कैप अमेरिकी टेक फर्मों के बीच बढ़ते रुझान को दर्शाता है। ये कंपनियां विकेंद्रीकृत अंतरराष्ट्रीय टीमों से दूर होकर 'बैक-टू-बेसिक' दृष्टिकोण अपना रही हैं, जिसमें ऑफशोर सेंटर्स की लागत-दक्षता के बजाय अंतिम उपयोगकर्ता (end-user) की निकटता को प्राथमिकता दी जा रही है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
इन ऑपरेशंस का बंद होना ग्लोबल सर्विस मॉडल की अस्थिरता की एक गंभीर याद दिलाता है। हालांकि भारत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है, लेकिन यह घटना साबित करती है कि जब कोई मूल कंपनी अपनी बुनियादी व्यावसायिक रणनीति को बदलती है, तो कोई भी विभाग सुरक्षित नहीं रहता। स्थानीय नौकरी बाजार के लिए, यह विविधीकरण की आवश्यकता को पुख्ता करता है, क्योंकि विदेशी टेक फर्मों द्वारा भारतीय केंद्रों में 'आसान' विस्तार का दौर अब धीमा पड़ रहा है।
यह सिर्फ कुछ सौ नौकरियों का मामला नहीं है; यह पूरे उद्योग के लिए एक संकेत है। जैसे-जैसे कंपनियां अपने बैलेंस शीट को कस रही हैं, 'इंडिया-प्लस' रणनीति की जगह घरेलू लाभप्रदता पर एकल ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। क्या यह कदम Opendoor को अपनी दीर्घकालिक बाजार स्थिति को स्थिर करने में मदद करेगा या केवल संस्थागत अनुभव के नुकसान का कारण बनेगा, यह देखना बाकी है। फिलहाल, यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के फैसलों पर निर्भर रहने की अनिश्चितता का एक कठोर सबक है।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।