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खुली बगावत: कल्याण बनर्जी ने बागी TMC सांसदों पर BJP से हाथ मिलाने का लगाया आरोप

बागी TMC सांसद BJP के साथ हैं, कल्याण बनर्जी का दावा

द्वारा राजनीति डेस्कप्रकाशित 9 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
खुली बगावत: कल्याण बनर्जी ने बागी TMC सांसदों पर BJP से हाथ मिलाने का लगाया आरोप
खुली बगावत: कल्याण बनर्जी ने बागी TMC सांसदों पर BJP से हाथ मिलाने का लगाया आरोप

तृणमूल कांग्रेस में मची बगावत के बीच, 20 सांसदों के एक अलग गुट बनाने की तैयारी की खबरें हैं, जो लोकसभा में सत्ता के समीकरण बदलने का संकेत दे रही हैं।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की दरारें अब गहरी खाई में बदल चुकी हैं। मंगलवार, 9 जून 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) कल्याण बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक धमाका किया। सांसद कीर्ति आजाद के साथ मौजूद वरिष्ठ नेता ने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी ही पार्टी के एक बागी गुट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का आरोप लगाया। बनर्जी ने कहा, "आज उनका नेता नरेंद्र मोदी है। वे BJP बन चुके हैं," और उन्होंने बागियों से TMC का नाम इस्तेमाल करना बंद करने को कहा।

यह तनाव सोमवार को केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल के लिए BJP के पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई एक गुप्त बैठक के बाद बढ़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, तृणमूल के करीब 20 सांसद अब एक अलग गुट बना रहे हैं, जिसका उद्देश्य BJP-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार को समर्थन देना है। यह बगावत बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में जोर पकड़ती दिख रही है, जिन पर कल्याण बनर्जी ने खुले तौर पर पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के लिए राज्य और केंद्रीय सुरक्षा का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।

बदलाव के दौर में पार्टी

आंतरिक विद्रोह का यह समय TMC नेतृत्व के लिए बेहद नाजुक है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी फिलहाल इस संकट को संभालने के लिए दिल्ली में हैं, और पार्टी कई मोर्चों पर जूझ रही है। जहां बागी सांसद पार्टी के मौजूदा नेतृत्व में विश्वास की कमी का हवाला दे रहे हैं, वहीं वफादार खेमा इसे तृणमूल की संसदीय ताकत को कमजोर करने के लिए BJP का एक सोची-समझी साजिश बता रहा है।

तनाव अब सिर्फ जुबानी जंग से आगे बढ़ गया है। पश्चिम बंगाल में मंगलवार सुबह तृणमूल नेता सब्यसाची दत्ता की जबरन वसूली और आपराधिक धमकी के आरोप में गिरफ्तारी ने आग में घी डालने का काम किया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक हिसाब चुकता करने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, कल्याण बनर्जी ने दल-बदलुओं की पार्टी के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि हालिया चुनाव परिणामों के बाद ये नेता प्रभावित पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों के साथ खड़े क्यों नहीं हुए।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह सिर्फ दल-बदल का मामला नहीं है; यह तृणमूल कांग्रेस की शक्ति संरचना में एक बुनियादी बदलाव का संकेत है। यदि पार्टी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद अलग गुट बनाने में सफल हो जाते हैं, तो यह TMC के राष्ट्रीय प्रभाव को पंगु बना देगा और नेतृत्व को रक्षात्मक मुद्रा में आने के लिए मजबूर कर देगा।

बड़ी तस्वीर पश्चिम बंगाल में विपक्ष को फिर से संगठित करने की एक सोची-समझी कोशिश की ओर इशारा करती है। हालांकि राज्य BJP ने सार्वजनिक रूप से दल-बदलुओं को अपनाने में हिचकिचाहट दिखाई है—और अपनी पार्टी के 'तृणमूलकरण' को रोकने का संकल्प लिया है—लेकिन विपक्ष के बंटवारे का रणनीतिक लाभ इतना बड़ा है कि उसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। TMC के लिए तत्काल चुनौती न केवल बागियों को वापस लाना है, बल्कि पार्टी अनुशासन को पूरी तरह बिखरने से रोकना भी है, जिससे बाकी कार्यकर्ता NDA की ओर न खिंच जाएं। जैसे-जैसे गतिरोध बढ़ रहा है, लोकसभा में पार्टी का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है।

द्वारा राजनीति डेस्क
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