ओलंपिक पार्क विरोध प्रदर्शन का 18वां दिन: सियोल पुलिस ने अवैध गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाया
ओलंपिक पार्क में 18 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन के बीच पुलिस ने अवैध कृत्यों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
मतगणना को लेकर चल रहे गतिरोध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही अधिकारी प्रदर्शनकारियों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। कथित कदाचार के 36 मामलों की आधिकारिक जांच की जा रही है।
ओलंपिक पार्क के गेट अब एक संवेदनशील केंद्र बन गए हैं। 3 जून को मतपत्रों की कमी को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब 18 दिनों के कब्जे में बदल चुका है, जो सार्वजनिक सभा और प्रशासनिक व्यवस्था की सीमाओं की परीक्षा ले रहा है। जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शन की गति धीमी हो रही है—शुरुआती सप्ताहांत में देखी गई 38,000 की भीड़ अब काफी कम हो गई है—कोरियाई राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी अपनी रणनीति को निष्क्रिय निगरानी से सक्रिय प्रवर्तन की ओर बदल रही है।
पुलिस की कार्रवाई
कार्यवाहक कमिश्नर जनरल यू जे-सोंग ने इस सोमवार को सियोडेमुन-गु में एक ब्रीफिंग के दौरान प्रशासन का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने यह पुष्टि करते हुए कि पुलिस सभा करने के अधिकार की रक्षा करना जारी रखेगी, "अवैध कृत्यों" के खिलाफ सख्त चेतावनी दी। वर्तमान में, 36 अलग-अलग मामलों की जांच की जा रही है, जिनमें काम में बाधा डालने से लेकर महिला हैंडबॉल खिलाड़ियों की अनधिकृत तलाशी जैसी परेशान करने वाली घटनाएं शामिल हैं।
पुलिस के लिए प्राथमिकता कोरियाई खेल और ओलंपिक समिति की कार्यक्षमता को बहाल करना है। अधिकारियों ने 16 जून को समिति के कार्यालयों की घेराबंदी से जुड़े नौ लोगों की पहचान की है, जहां प्रदर्शनकारियों ने कर्मचारियों को प्रवेश करने से शारीरिक रूप से रोक दिया था। इनमें से दो लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है। गौरतलब है कि ऑनलाइन मंचों पर "ऑल डी'आर्क" नाम से मशहूर महिला—जो प्रवेश रोकने के लिए दरवाजे के हैंडल से चिपकी हुई अपनी वायरल तस्वीर के लिए जानी जाती है—उसे अभी तक पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया है।
समिति की पहुंच सुनिश्चित करना
पुलिस ने संकेत दिया है कि वे अब संस्थागत कामकाज में बाधा को बर्दाश्त नहीं करेंगे। एक प्रवक्ता ने कहा कि समिति का अपने परिसर में प्रवेश करने का अधिकार एक मौलिक हक है। यदि समिति अपना कामकाज फिर से शुरू करने का प्रयास करती है, तो पुलिस शारीरिक सहायता प्रदान करने और प्रदर्शनकारियों को रास्ता खाली करने के लिए सक्रिय रूप से मनाने को तैयार है। इन प्रयासों के दौरान किसी भी तरह के विरोध पर त्वरित और औपचारिक जांच शुरू की जाएगी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह गतिरोध जमीनी स्तर के राजनीतिक आंदोलन और सार्वजनिक संस्थानों की बुनियादी कार्यक्षमता के बीच बढ़ते घर्षण को उजागर करता है। जब विरोध प्रदर्शन असहमति व्यक्त करने से आगे बढ़कर किसी समिति के काम को शारीरिक रूप से बाधित करने लगते हैं, तो वे एक ऐसी सीमा पार कर जाते हैं जो कानून के शासन को कमजोर करती है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि व्यापक प्रतिक्रिया को भड़काए बिना व्यवस्था बनाए रखी जाए। यदि राज्य कमजोर दिखता है, तो इससे और अधिक घेराबंदी को बढ़ावा मिलने का जोखिम है; और यदि बहुत सख्त रुख अपनाता है, तो उन लोकतांत्रिक अधिकारों को ही अवैध ठहराने का जोखिम है जिनकी वह रक्षा करने का दावा करता है। जैसे-जैसे प्रदर्शनकारियों की संख्या कम हो रही है, इस आंदोलन के मूल को एक पहचान संकट का सामना करना पड़ रहा है: इसे यह तय करना होगा कि क्या यह विरोध प्रदर्शन बना रहेगा या आपराधिक मामलों की एक श्रृंखला में बदल जाएगा।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।