ओल्ड ट्रैफर्ड में वापसी: श्री चरणी की रिकॉर्ड गेंदबाजी से भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदें बरकरार
LIVE: बांग्लादेश के खिलाफ भारत ने मैच पर फिर से कसा शिकंजा
ओल्ड ट्रैफर्ड में भारतीय गेंदबाजों ने शानदार वापसी करते हुए बांग्लादेश को 136 रनों पर रोक दिया। ग्रुप ए के इस हाई-वोल्टेज मुकाबले का परिणाम भारत के महिला टी20 वर्ल्ड कप अभियान की दिशा तय कर सकता है।
ओल्ड ट्रैफर्ड का माहौल किसी नॉकआउट मैच जैसी भारी तनाव से भरा था। भारत और बांग्लादेश दोनों के चार-चार अंक होने के कारण, यह ग्रुप ए मुकाबला सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए एक तरह का 'प्ले-ऑफ' बन गया था। शुरुआती छह ओवरों में भारतीय टीम लड़खड़ाती दिखी, चार कैच छोड़े और जुवेरिया फिरदौस को आसानी से बाउंड्री लगाने का मौका दिया। यह एक घबराहट भरी शुरुआत थी, जिससे टूर्नामेंट में भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका लग सकता था।
हालांकि, बेहतरीन फील्डिंग और अनुशासित गेंदबाजी ने पासा पलट दिया। नंदिनी शर्मा ने फिरदौस का शानदार 'कॉट एंड बोल्ड' विकेट लेकर भारत की वापसी कराई और टीम की खराब फील्डिंग के सिलसिले को तोड़ा। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने बांग्लादेश पर दबाव बनाए रखा और आधी पारी तक उन्हें केवल 63 रनों पर रोक दिया।
चरणी का ऐतिहासिक मील का पत्थर
मैच की असली स्टार निस्संदेह श्री चरणी रहीं। आखिरी ओवर में दो विकेट चटकाकर उन्होंने बांग्लादेश को 136/8 के स्कोर पर रोक दिया। इस दौरान, चरणी ने टूर्नामेंट में अपना 12वां विकेट लिया और इस संस्करण में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज बन गईं। उन्होंने एक ही महिला टी20 वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने का भारतीय रिकॉर्ड भी तोड़ दिया, जो पहले पूनम यादव (10 विकेट) के नाम था।
बांग्लादेश ने अपनी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव की कोशिश की, यहां तक कि शर्मिन अख्तर को रिटायर आउट करके रितु मोनी को तेजी से रन बनाने के लिए भेजा। लेकिन, यह दांव भारतीय गेंदबाजों को परेशान नहीं कर सका। पिच, जो शुरुआत में बल्लेबाजों के लिए मददगार थी, भारतीय स्पिन आक्रमण के आगे मुश्किल होती चली गई।
यह मैच क्यों महत्वपूर्ण है
यह मुकाबला महिला क्रिकेट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का उदाहरण है, जहां अब नेट रन रेट (NRR) का हिसाब-किताब बल्ले और गेंद जितना ही जरूरी हो गया है। इंग्लैंड पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुका है, इसलिए भारत के लिए गलती की गुंजाइश बहुत कम है। यहां जीत केवल दो अंकों की नहीं है, बल्कि उस मनोवैज्ञानिक बढ़त की है, जहां एक छोटी सी चूक भी टीम को टूर्नामेंट से बाहर कर सकती है। खराब शुरुआत के बाद टीम का मैच पर नियंत्रण वापस पाना उनकी परिपक्वता को दर्शाता है, लेकिन टीम प्रबंधन जानता है कि मजबूत टीमों के खिलाफ ऐसी गलतियां महंगी पड़ सकती हैं।
जैसे-जैसे टूर्नामेंट अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, अब सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या भारतीय बल्लेबाजी भी गेंदबाजी की तरह असरदार साबित होगी। 137 रनों का लक्ष्य छोटा जरूर है, लेकिन वर्ल्ड कप के दबाव में ओल्ड ट्रैफर्ड की दूधिया रोशनी में लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं होगा। सेमीफाइनल की दौड़ अभी भी रोमांचक बनी हुई है और भारत के लिए रास्ता साफ है: टिके रहो, आगे बढ़ो और अपनी फील्डिंग को और बेहतर बनाओ।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।