नई दिल्ली की डिजिटल कार्रवाई: इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री को लेकर केंद्र ने मेटा को जारी किया सख्त नोटिस
इंस्टाग्राम विज्ञापनों में बाल यौन शोषण सामग्री पाए जाने पर सरकार ने मेटा को भेजा सख्त नोटिस: सूत्र

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने प्लेटफॉर्म पर अवैध सशुल्क विज्ञापनों की रिपोर्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया दिग्गज के खिलाफ कदम उठाया है।
भारत में डिजिटल सुरक्षा घेरे की इस सप्ताह एक नई और गंभीर परीक्षा हुई है। कई सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा को एक सख्त नोटिस जारी किया है। यह कदम उन चिंताजनक रिपोर्टों के बाद उठाया गया है जिनमें कहा गया था कि प्लेटफॉर्म पर सशुल्क विज्ञापनों का उपयोग बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) को बढ़ावा देने और प्रसारित करने के लिए किया जा रहा था। यह कदम उन टेक प्लेटफॉर्म्स के प्रति केंद्र के सख्त नियामक रुख को दर्शाता है जो अपने स्वयं के मुद्रीकरण (monetization) तंत्र को नियंत्रित करने में विफल रहते हैं।
एक ऐसे प्लेटफॉर्म के लिए जो अपने परिष्कृत एआई-संचालित विज्ञापन लक्ष्यीकरण पर गर्व करता है, ऐसी घृणित सामग्री की उपस्थिति केवल एक तकनीकी खामी नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा की एक गंभीर विफलता है। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ये विज्ञापन केवल संयोग नहीं थे, बल्कि इन्हें प्लेटफॉर्म के विज्ञापन-खरीद बुनियादी ढांचे द्वारा सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया गया था। सरकार का नोटिस इस सामग्री को तुरंत हटाने की मांग करता है और इस बात का विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगता है कि ऐसी सामग्री सुरक्षा फिल्टर को चकमा देकर उपयोगकर्ताओं तक कैसे पहुंची।
नियामक टकराव का एक पैटर्न
नई दिल्ली और सिलिकॉन वैली के बीच यह टकराव कोई नई बात नहीं है। मेटा अक्सर डेटा गोपनीयता चिंताओं से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों के प्रवर्तन तक, सरकारी जांच के दायरे में आता रहा है। हालांकि, मौजूदा नोटिस की प्रकृति अलग है; यह सीधे तौर पर डिजिटल बाल संरक्षण कानूनों के मूल पर प्रहार करता है, जो देश के सबसे सख्त कानूनों में से एक हैं।
यह नोटिस जारी करने का सरकार का निर्णय टेक दिग्गजों पर नकेल कसने के व्यापक वैश्विक पैटर्न का हिस्सा है। हालांकि मेटा ने पहले भी दुर्व्यवहार से निपटने के लिए सुरक्षा उपकरणों और एआई में अपने निवेश का हवाला दिया है, लेकिन सरकार का यह हस्तक्षेप उन वादों के प्रति धैर्य खत्म होने का संकेत देता है जो जमीनी स्तर पर परिणाम देने में विफल रहे हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यहाँ बड़ी तस्वीर "मध्यस्थों" (intermediaries) की जवाबदेही की है। वर्षों से, ये टेक दिग्गज केवल सामग्री के माध्यम (conduit) होने की आड़ में काम करते रहे हैं। वह दौर अब प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। जब कोई प्लेटफॉर्म सामग्री को बढ़ावा देने के लिए पैसे लेता है—और इस तरह अवैध सामग्री को प्रायोजित पोस्ट में बदल देता है—तो वह अनभिज्ञता का दावा करने का अधिकार खो देता है।
यदि इंस्टाग्राम जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म अपने राजस्व-सृजन वाले विज्ञापन मॉडल को बच्चों की बुनियादी सुरक्षा के साथ संतुलित नहीं कर सकते हैं, तो उन्हें केवल नोटिस से कहीं अधिक का सामना करना पड़ सकता है। हम इस बात पर संभावित बदलाव देख रहे हैं कि इन कंपनियों को उनके भुगतान वाले चैनलों के माध्यम से प्रसारित होने वाली सामग्री के लिए कैसे जिम्मेदार ठहराया जाए। भारत सरकार स्पष्ट रूप से संकेत दे रही है कि वह अब बाल शोषण सामग्री के प्रसार के लिए "एल्गोरिदम त्रुटि" को वैध बहाने के रूप में स्वीकार नहीं करेगी। मेटा के लिए, आगे का रास्ता केवल बेहतर फिल्टर की मांग नहीं करता, बल्कि अपने विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र का ऑडिट करने के तरीके में एक मौलिक बदलाव की मांग करता है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।