नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ मतभेदों को किया खारिज, ईरान और हिजबुल्लाह पर साझा लक्ष्यों पर दिया जोर
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इजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ हालिया तनाव को केवल रणनीतिक मतभेद बताया है। उन्होंने कहा कि तीखी बहस की खबरों के बावजूद दोनों देशों के बीच गठबंधन बेहद मजबूत है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है। उन्होंने हालिया तनाव को एक करीबी साझेदारी का सामान्य हिस्सा बताया। CNBC को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि भले ही लेबनान में बढ़ते संघर्ष को लेकर दोनों के बीच रणनीतिक असहमति रही हो, लेकिन उनके बुनियादी रणनीतिक लक्ष्य एक समान हैं। नेतन्याहू ने कहा कि भले ही दिन में दोनों नेताओं के बीच बहस हो जाए, लेकिन शाम तक वे किसी न किसी सहमति पर पहुंच ही जाते हैं।
ये सार्वजनिक टिप्पणियां उन खबरों के बाद आई हैं जिनमें कहा गया था कि सोमवार को फोन पर बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने काफी नाराजगी जताई थी। 'Axios' की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियान की आलोचना की थी और अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया था। बाद में राष्ट्रपति ने 'न्यूयॉर्क पोस्ट' से पुष्टि की कि वह सैन्य तनाव से परेशान थे, क्योंकि इससे ईरान से जुड़े व्यापक राजनयिक प्रयास जटिल हो रहे हैं।
क्षेत्रीय खतरों पर एक राय
निजी बातचीत में अस्थिरता की खबरों के बावजूद, दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपने पेशेवर संबंधों की मजबूती को दोहराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी टिप्पणी में जोर दिया कि वह नेतन्याहू को पसंद करते हैं और उन्हें एक सक्षम सहयोगी मानते हैं, भले ही लेबनान की स्थिति को संभालने के तरीके पर उनकी स्पष्ट नाराजगी रही हो। वहीं, इजरायली प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकने के मुख्य उद्देश्य पर दोनों नेता पूरी तरह एकमत हैं।
हिजबुल्लाह का कारक
CNBC इंटरव्यू के दौरान, नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह को बेअसर करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने समूह को ईरान का एक 'प्रॉक्सी' बताया, जो लेबनान के नागरिकों को खतरे में डालता है और देश का इस्तेमाल इजरायल पर हमले करने के लिए करता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, क्षेत्र में कोई भी स्थायी शांति समझौता हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण और इजरायल की सीमाओं की सुरक्षा पर ही निर्भर करेगा।
अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दबाव बढ़ने के बावजूद, इजरायली नेतृत्व अपनी सैन्य कार्रवाई को सुरक्षा के लिए अनिवार्य बता रहा है। इन विवादों को 'रणनीतिक' बताकर, नेतन्याहू वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच एक एकजुट मोर्चा पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि हालिया आंतरिक मतभेदों के बजाय साझा दुश्मनों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
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