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व्यापक विरोध के बाद NCERT 'डांसिंग गर्ल' की मूल तस्वीर बहाल करेगा

विरोध के बाद NCERT 'डांसिंग गर्ल' की मूल तस्वीर को फिर से शामिल करेगा

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 17 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
व्यापक विरोध के बाद NCERT 'डांसिंग गर्ल' की मूल तस्वीर बहाल करेगा
व्यापक विरोध के बाद NCERT 'डांसिंग गर्ल' की मूल तस्वीर बहाल करेगा

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने डिजिटल बदलावों को लेकर हुई तीखी आलोचना के बाद कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में मोहनजोदड़ो की इस ऐतिहासिक मूर्ति के मूल स्वरूप को वापस लाने का फैसला किया है।

4,500 साल पुरानी कांस्य प्रतिमा, जिसे 'डांसिंग गर्ल' के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से सिंधु घाटी सभ्यता की भव्यता का प्रतीक रही है। भारतीय छात्रों की पीढ़ियों के लिए, मोहनजोदड़ो की इस नग्न मूर्ति की छवि इतिहास की किताबों का एक मुख्य हिस्सा रही है। हालांकि, इस साल कक्षा 9 की नई पाठ्यपुस्तक में मूर्ति के धड़ पर डिजिटल रूप से कपड़े जोड़ने के एक छोटे से बदलाव ने भारी विरोध को जन्म दिया, जिसके चलते अंततः NCERT को मूल तस्वीर बहाल करने की घोषणा करनी पड़ी।

प्रामाणिकता का सवाल

विवाद तब शुरू हुआ जब शिक्षकों और इतिहासकारों ने देखा कि NCERT ने स्कूली बच्चों के लिए 'आयु-उपयुक्तता' का हवाला देते हुए इस प्रतिष्ठित कलाकृति में डिजिटल रूप से कपड़े जोड़ दिए हैं। इस फैसले का शैक्षणिक समुदाय और जनता ने कड़ा विरोध किया और इसे ऐतिहासिक तथ्यों पर 'दकियानूसी सोच' थोपने का प्रयास बताया। आलोचकों का तर्क था कि पुरातात्विक साक्ष्यों में बदलाव करना, चाहे मंशा कुछ भी हो, ऐतिहासिक जांच की अखंडता से समझौता करता है और प्राचीन कलात्मक अभिव्यक्ति की वास्तविकता को धुंधला करता है।

सोशल मीडिया और शैक्षणिक मंचों पर यह विरोध तेजी से फैल गया। विशेषज्ञों ने बताया कि 1926 में खोजी गई यह मूल कांस्य प्रतिमा सिंधु घाटी के लोगों की धातु विज्ञान और सौंदर्य बोध का प्रमाण है। छवि को 'साफ-सुथरा' बनाने के नाम पर परिषद पर इतिहास के एक प्राथमिक स्रोत को आधुनिक संवेदनाओं के अनुरूप बदलने का आरोप लगा, जिसके बाद संस्थान के उच्च स्तर पर इस पर पुनर्विचार किया गया।

नीति और व्यावहारिक वास्तविकताएं

हालांकि मूल तस्वीर को वापस लाने का निर्णय ले लिया गया है, लेकिन इसे लागू करना एक चुनौती है। रिपोर्टों के अनुसार, वितरण संबंधी बाधाओं के कारण NCERT वर्तमान बैच की पाठ्यपुस्तकों को तुरंत दोबारा नहीं छापेगा। इसके बजाय, अगले शैक्षणिक वर्ष से पाठ्यक्रम में डांसिंग गर्ल की मूल और बिना किसी बदलाव वाली तस्वीर को फिर से शामिल किया जाएगा। यह समय-सीमा पाठ्यपुस्तक वितरण प्रक्रियाओं की चल रही समीक्षा के अनुरूप है, जिस पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बारीकी से नजर रख रहे हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: पाठ्यक्रम की राजनीति

यह घटना आज भारत में शैक्षिक सामग्री को लेकर मौजूद संवेदनशीलता को दर्शाती है। जब छात्रों की ऐतिहासिक चेतना को आकार देने वाली एक राष्ट्रीय संस्था प्रतिष्ठित दृश्यों में मामूली बदलाव भी करती है, तो प्रतिक्रिया मिलना स्वाभाविक है। यह एक निरंतर चलने वाले संघर्ष को उजागर करता है: एक आधुनिक और विकसित होता समाज पारंपरिक मूल्यों और इतिहास के निष्पक्ष, अक्सर कठोर स्वरूप के बीच संतुलन कैसे बनाए?

परिषद के लिए, यह घटना एक चेतावनी है कि डिजिटल युग में ऐतिहासिक सटीकता पर लगातार जनता की नजर रहती है। 'आयु-उपयुक्त' सामग्री की मांग अक्सर एक संतुलन बनाने का प्रयास होती है, लेकिन जब बात वैश्विक धरोहर की हो, तो आम सहमति बदलाव के बजाय संरक्षण की ओर झुकती है। मूल तस्वीर को बहाल करने का निर्णय लेकर संस्थान ने एक व्यावहारिक कदम उठाया है, यह स्वीकार करते हुए कि जब किसी सभ्यता के इतिहास की बात आती है, तो जनता उसे उसके मूल रूप में देखना पसंद करती है, न कि किसी संपादित संस्करण में।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।