मुंबई फिर डूबी: बारिश ने जनजीवन, ट्रेन और प्रशासन की रफ्तार थामी
मुंबई रेन अलर्ट लाइव: पुणे में लैंडस्लाइड से मकान गिरा; कई जगह स्कूल-कॉलेज बंद, IMD ने जारी किया अलर्ट
मानसून की लगातार बारिश ने देश की आर्थिक राजधानी को बेहाल कर दिया है। शहर भूस्खलन, रेल सेवाओं में व्यवधान और प्रशासनिक ठपपन से जूझ रहा है।
मिट्टी की सोंधी खुशबू की जगह अब शहर में एक गहरी चिंता ने ले ली है। सोमवार सुबह तक, मुंबई और आसपास के जिलों के लिए IMD का रेड अलर्ट सच साबित हुआ। मूसलाधार बारिश ने सड़कों को नहरों में बदल दिया है, जिसके चलते विधानसभा की कार्यवाही भी स्थगित करनी पड़ी। सदन में राजनीति के बजाय आपदा प्रबंधन की चर्चा हावी रही, क्योंकि प्रशासन जमीन पर मचे कोहराम को संभालने में जुटा है।
उपनगरों में स्थिति बेहद गंभीर है। पालघर में, जहां महज 24 घंटों में 300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है, वहां शहर की लाइफलाइन यानी लोकल ट्रेन सेवा हांफ रही है। वसई, नाला सोपारा और विरार के बीच यात्रियों को भारी देरी का सामना करना पड़ रहा है, और कई लंबी दूरी की ट्रेनों को बीच में ही रद्द कर दिया गया है क्योंकि पटरियां जलमग्न हैं। हजारों ऑफिस जाने वालों के लिए सफर एक अनिश्चित परीक्षा बन गया है, जो मुंबई के मानसून इंफ्रास्ट्रक्चर की नाजुक हकीकत को बयां करता है।
संकट में घिरा शहर
त्रासदी केवल जाम तक सीमित नहीं है। भूस्खलन की खबरें, जिसमें एक चॉल ढहने से छह लोगों की जान चली गई, इन मौसमी घटनाओं की मानवीय कीमत की याद दिलाती हैं। NDRF समेत बचाव दल मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण मार्ग भी भूस्खलन से प्रभावित हुए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा न करने और झरनों जैसे खतरनाक पर्यटन स्थलों से दूर रहने की अपील की है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह सिर्फ मानसून के एक खराब दिन की बात नहीं है; यह एक ऐसा सिस्टमैटिक स्ट्रेस टेस्ट है जिसमें मुंबई बार-बार विफल होती दिख रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि बुनियादी ढांचे की लगातार निगरानी की जा रही है और मौजूदा संकट लापरवाही नहीं बल्कि चरम मौसम का परिणाम है, लेकिन राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विपक्ष द्वारा इन हादसों की उच्च स्तरीय जांच की मांग जनता के बढ़ते गुस्से को दर्शाती है। बड़ी तस्वीर यह है कि शहर के तेजी से शहरीकरण और जल निकासी व आवास सुरक्षा तंत्र की मजबूती के बीच खाई चौड़ी होती जा रही है। जब तक दीर्घकालिक शहरी नियोजन इन जलवायु-जनित घटनाओं की तीव्रता के अनुरूप नहीं होगा, तब तक राज्य का 'अलर्ट मोड' निवारक के बजाय केवल प्रतिक्रियात्मक बना रहेगा।
जैसे-जैसे बारिश जारी है, प्रशासन की ओर से जनता से सहयोग की अपील की जा रही है, लेकिन आम मुंबईकर का ध्यान फिलहाल तात्कालिक जोखिमों से बचने पर है। कई प्रभावित इलाकों में स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, जिससे शहर में एक अनियोजित 'अवकाश' जैसी स्थिति बन गई है। यह मजबूरन लिया गया विराम दिखाता है कि बादलों के कहर के सामने महानगर कितना असुरक्षित है।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।