मानसून वॉच: गोरखपुर में भीषण गर्मी और उमस के बीच मानसून की रिकॉर्ड देरी
गोरखपुर में मानसून की देरी का बीते 12 साल का बना नया रिकॉर्ड, दो दिन के अंदर मिल सकती है राहत
मोतिहारी के पास मानसून के अटक जाने से गोरखपुर एक दशक से भी अधिक समय की सबसे लंबी देरी का सामना कर रहा है, जिससे स्थानीय लोग भीषण उमस और गर्मी से बेहाल हैं।
पूर्वांचल में मानसून का आगमन इस साल धैर्य की परीक्षा ले रहा है। जून के आखिरी दिन बीत रहे हैं और बहुप्रतीक्षित बारिश अभी भी नदारद है, जिससे शहर एक ऐसे रिकॉर्ड की ओर बढ़ रहा है जिसे कोई नहीं चाहता। मौसम वैज्ञानिक अब गोरखपुर में मानसून के सबसे देर से आने के 12 साल पुराने रिकॉर्ड को ट्रैक कर रहे हैं। ऐसी स्थिति 2014 के सूखे के बाद पहली बार देखी गई है, जब बारिश आखिरकार 30 जून को हुई थी।
उमस का जाल
हालांकि कई मीडिया आउटलेट्स और रिपोर्टिंग एजेंसियां अक्सर राष्ट्रीय मौसम पैटर्न पर ध्यान केंद्रित करती हैं, लेकिन गोरखपुर की जमीनी हकीकत भीषण 'हीट इंडेक्स' से परिभाषित हो रही है। पिछले 48 घंटों में शहर में हल्की और छिटपुट बारिश ने उम्मीद तो जगाई, लेकिन इससे कोई खास राहत नहीं मिली। पारा भले ही 37.8 डिग्री सेल्सियस हो, लेकिन हवा में मौजूद अत्यधिक नमी के कारण 'रियल-फील' तापमान 42 डिग्री के करीब महसूस हो रहा है।
रात में भी कोई राहत नहीं मिल रही है। 26.4 डिग्री का न्यूनतम तापमान उच्च आर्द्रता के कारण महसूस नहीं हो पा रहा है, जिससे रातें 30 डिग्री जैसी दमघोंटू लग रही हैं। चिलचिलाती धूप और घुटन भरी रातों के इस मेल के कारण ही निवासी पिछले वर्षों की तुलना में इस देरी को अधिक महसूस कर रहे हैं।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह देरी केवल शहरी जीवन के लिए असुविधा नहीं है; यह उस वायुमंडलीय तंत्र में व्यवधान का संकेत है जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को चलाता है। आसपास के इलाकों में कृषि काफी हद तक मानसून के समय पर आने पर निर्भर करती है, और जून में लंबे समय तक सूखा रहने से मिट्टी की नमी और बुवाई के समय पर असर पड़ सकता है। हालांकि मूल लेख और प्राथमिक स्रोत के आंकड़े बताते हैं कि स्थितियां धीरे-धीरे अनुकूल हो रही हैं, लेकिन मोतिहारी के पास वर्तमान ठहराव हमारी मौसम प्रणालियों की नाजुकता को दर्शाता है। जब मानसून को अनुकूल हवाओं का समर्थन नहीं मिलता, तो 'हीट इंडेक्स ट्रैप' यह दिखाता है कि पूर्वी यूपी के शहरी केंद्र अनियमित जलवायु परिवर्तन के प्रति कितने संवेदनशील हैं।
उम्मीद की किरण
गंभीर आंकड़ों के बावजूद, स्थिति बदल रही है। मौसम विशेषज्ञों का सुझाव है कि वायुमंडलीय दबाव बदल रहा है और हम 29 या 30 जून तक मौसम के पैटर्न में बदलाव की उम्मीद कर सकते हैं। यदि वर्तमान स्थिति बनी रहती है, तो 1 या 2 जुलाई तक पूरे संभाग में अच्छी बारिश शुरू होने की संभावना है। हालांकि वर्तमान मुख्य बातें एक रिकॉर्ड-तोड़ इंतजार की तस्वीर पेश करती हैं, लेकिन मौसम विभाग का अनुमान है कि महीने की शुरुआत बारिश के साथ होगी, जिससे उम्मीद है कि हफ्तों से क्षेत्र को जकड़े हुए उमस का चक्र टूट जाएगा।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।