उत्तर और पश्चिम भारत में लू का प्रकोप, मानसून की रफ्तार थमी
22 राज्यों तक पहुंचने के बाद मानसून की गति धीमी: असम, मेघालय और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का अलर्ट, 6 राज्यों में गर्मी का सितम
हालांकि मानसून की तेज प्रगति में अस्थायी बाधा आई है, लेकिन पूर्वोत्तर भारत के लिए भारी बारिश की चेतावनी बनी हुई है, जबकि देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का दौर जारी है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून, जो 24 जून तक 22 राज्यों में तेजी से आगे बढ़ा था, अचानक अपनी गति खो चुका है। जिन मौसमी प्रणालियों ने उत्तरी और पश्चिमी मैदानी इलाकों में जल्द दस्तक देने का वादा किया था, वे अब धीमी पड़ गई हैं। इससे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अब मानसून के शेष क्षेत्रों को 5 जुलाई तक कवर करने की उम्मीद है।
गर्मी के जाने और मानसून के आने के बीच के इस अंतराल ने मौसम के नक्शे को अस्थिर बना दिया है। गुजरात जैसे राज्यों में, जहां निवासी weather Ahmedabad (अहमदाबाद मौसम) के पूर्वानुमान पर कड़ी नजर रख रहे हैं, पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। यह कोई अकेली घटना नहीं है; दिल्ली से आगरा और भिवानी से दतिया तक, तापमान 40 डिग्री की सीमा को पार कर गया है, जो यह याद दिलाता है कि मानसून का आगमन शायद ही कभी एक समान होता है।
दो चरम स्थितियों की कहानी
इस अनिश्चित मौसम की मानवीय कीमत लगातार बढ़ रही है। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में एक उफनते पुल को पार करते समय एक ट्रैक्टर चालक बह गया, जो अभी भी लापता है। वहीं, छत्तीसगढ़ में मानसून के हिंसक आगमन ने त्रासदी पैदा कर दी है; बेमेतरा में दीवार गिरने से दो बच्चियों की मौत हो गई, और सुकमा में आकाशीय बिजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और चार लोग घायल हो गए।
जहां मध्य और उत्तरी क्षेत्र गर्मी और छिटपुट प्री-मानसून बौछारों से जूझ रहे हैं, वहीं पूर्वोत्तर भारत एक original (असाधारण) और तीव्र मौसमी पैटर्न की चपेट में है। Assam (असम), Meghalaya (मेघालय), West Bengal (पश्चिम बंगाल) और सिक्किम के लिए भारी से बहुत भारी rain (बारिश) का अलर्ट जारी है। इन प्रणालियों की तीव्रता जून के अंत तक बने रहने की उम्मीद है, और जुलाई की शुरुआत में ओडिशा, झारखंड और आंध्र प्रदेश के लिए भी चेतावनी जारी की गई है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: ठहराव के पीछे का पैटर्न
मानसून की प्रगति में यह ठहराव नीति निर्माताओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण समय है। जब मानसून एक जगह रुक जाता है, तो यह उन क्षेत्रों में अक्सर 'हीट-ट्रैप' (गर्मी का जाल) पैदा करता है जहां मानसून अभी नहीं पहुंचा है, जैसा कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के नागपुर-अमरावती बेल्ट में जारी लू के अलर्ट में देखा जा रहा है। जानलेवा लू और अचानक विनाशकारी बारिश के बीच का यह उतार-चढ़ाव अब नया सामान्य बनता जा रहा है। कृषि अर्थव्यवस्था के लिए, national (राष्ट्रीय) चक्र में ये देरी बुवाई के समय को बाधित कर सकती है, जबकि शहरी केंद्रों के लिए, स्थिर शुरुआत के अभाव में अचानक होने वाली भारी बारिश अक्सर पुराने जल निकासी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त कर देती है।
आगे की राह
मौसम संबंधी आंकड़े बताते हैं कि अगले 48 घंटे निर्णायक होंगे। बिहार में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है, और गोवा, तेलंगाना तथा कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों को ऑरेंज अलर्ट पर रखा गया है। जैसे-जैसे मानसून फिर से अपनी पकड़ बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है, Gujarati (गुजराती) समाचार चक्र का यह विरोधाभास—प्री-मानसून बौछारों से मिली राहत और भीषण गर्मी के बने रहने की खबरें—देश भर में वर्तमान जलवायु की जटिलता को दर्शाता है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।