मानसून का कहर: केरल में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, मौसम विभाग ने दी चेतावनी
चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव का क्षेत्र; केरल में गरज-चमक के साथ बारिश और 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पूरे केरल में खराब मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया है। चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव के क्षेत्र के कारण 5 जुलाई तक भारी बारिश और 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है।
केरल के मौसम में अचानक बड़ा बदलाव आया है और IMD ने गंभीर मौसम की चेतावनी जारी की है। आज से 5 जुलाई तक केरल और माहे में लगातार व्यापक बारिश होने की संभावना है। बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण और कर्नाटक से गुजरात तट के बीच सक्रिय ट्रफ (trough) के कारण मौसम में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।
जटिल होता मौसम का मिजाज
मौसम वैज्ञानिक इस original article (मूल डेटा) पर नजर बनाए हुए हैं, जिसके अनुसार 3 जुलाई तक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह स्थिति दक्षिणी प्रायद्वीप में नमी को बढ़ाएगी। हालांकि राज्य में मानसून सक्रिय है, लेकिन इस कम दबाव के तंत्र के मजबूत होने से अगले कुछ दिनों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। विशेष रूप से 1 जुलाई को कहीं-कहीं अत्यधिक बारिश की संभावना है, जिसके बाद अगले चार दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।
अलर्ट मैप: जिलेवार स्थिति
IMD ने तटीय जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है। आज कन्नूर और कासरगोड में ऑरेंज अलर्ट है, जिसका अर्थ है कि 24 घंटे के भीतर 115.6 मिमी से 204.4 मिमी तक बारिश हो सकती है। अलाप्पुझा, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड में येलो अलर्ट जारी किया गया है। जैसे-जैसे सप्ताह आगे बढ़ेगा, इडुक्की, पठानमथिट्टा और कोट्टायम सहित अन्य जिले भी येलो अलर्ट की सूची में शामिल हो जाएंगे।
यह महत्वपूर्ण क्यों है?
यह घटना केरल के मानसून पैटर्न में बढ़ती अस्थिरता को दर्शाती है। जब पश्चिमी तट पर वायुमंडलीय ट्रफ तेजी से बदलते हैं, तो अचानक भारी बारिश होती है जिससे बुनियादी ढांचे और तटीय समुदायों को नुकसान हो सकता है। बाढ़ के खतरे के अलावा, 40-50 किमी/घंटा (संभावित 60 किमी/घंटा) की रफ्तार से चलने वाली हवाएं अस्थायी संरचनाओं और बिजली लाइनों के लिए गंभीर खतरा हैं। मछली पकड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो तटीय आजीविका पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाता है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल
IMD के primary source (प्राथमिक स्रोत) डेटा ने बिजली गिरने और तेज हवाओं के खतरे के प्रति आगाह किया है। राज्य प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि लगातार बारिश से जमीन धंसने का खतरा बढ़ जाता है। मछुआरों को अगली सूचना तक समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।