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पीएम मोदी का बंगाल दौरा: किसान कल्याण और नई कृषि योजनाओं पर रहेगा जोर

दो दिवसीय बंगाल दौरे पर प्रधानमंत्री: तारकेश्वर में 'पश्चिम बंगाल दिवस' समारोह से लेकर रेड रोड पर योग उत्सव तक, जानें पूरा शेड्यूल

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 20 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
पीएम मोदी का बंगाल दौरा: किसान कल्याण और नई कृषि योजनाओं पर जोर
पीएम मोदी का बंगाल दौरा: किसान कल्याण और नई कृषि योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं। 'पश्चिम बंगाल दिवस' के मौके पर वे डिजिटल कृषि और किसानों के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) पर विशेष जोर देंगे।

जून के इस महीने में पश्चिम बंगाल का राजनीतिक और आर्थिक पारा चढ़ने वाला है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर राज्य पहुंच रहे हैं। इस दौरे का मुख्य आकर्षण 20 जून को तारकेश्वर में आयोजित होने वाला राज्य-स्तरीय 'पश्चिम बंगाल दिवस' कार्यक्रम है। इस स्थान का चयन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव है। कार्यक्रम की थीम—"पश्चिम बंगाल: विरासत, सद्भाव और विकास"—सरकार के उस बड़े विकासात्मक एजेंडे को दर्शाती है, जिसे वे आगे बढ़ाना चाहते हैं।

नकद हस्तांतरण और कृषि योजनाओं का आगाज

किसान समुदाय के लिए यह दौरा आर्थिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। तारकेश्वर के मंच से नरेंद्र मोदी पीएम-किसान योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके आंकड़े काफी बड़े हैं: देश भर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में कुल 18,880 करोड़ रुपये सीधे भेजे जाएंगे। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल को इसका बड़ा लाभ मिलेगा, जहाँ 45 लाख से अधिक लाभार्थियों को लगभग 900 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके साथ ही, 2019 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक राज्य में कुल वितरण 15,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा।

तत्काल नकद हस्तांतरण के अलावा, यह कार्यक्रम नई कृषि नीतियों के व्यवस्थित क्रियान्वयन का भी गवाह बनेगा। इसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का विस्तार एक प्रमुख हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य 2026-27 के वित्तीय वर्ष तक बंगाल के लगभग 50 लाख किसानों और 14 लाख हेक्टेयर भूमि को इस बीमा सुरक्षा कवच के दायरे में लाना है, जिसका अनुमानित मूल्य 28,140 करोड़ रुपये है।

डिजिटल बदलाव और प्राकृतिक खेती

इस दौरे में तकनीक का एकीकरण मुख्य केंद्र बना हुआ है। सरकार 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) लॉन्च कर रही है, जो एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसे उर्वरक वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद जैसी सेवाओं को एक डिजिटल छत के नीचे लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। डेटा-संचालित मॉडल की ओर यह बदलाव ग्रामीण लाभार्थियों के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाएगा।

इस डिजिटल पहल के साथ-साथ पारंपरिक तरीकों पर भी जोर दिया जा रहा है। रासायनिक मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए 'राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन' शुरू किया जा रहा है। 2026-27 की योजना के तहत पश्चिम बंगाल में 17,300 हेक्टेयर भूमि पर 346 प्राकृतिक खेती क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें बायो-इनपुट संसाधन केंद्रों और स्थानीय 'कृषि सखियों' का समर्थन प्राप्त होगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह दौरा इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार राज्य में अपनी योजनाओं को किस तरह से रणनीतिक रूप से लागू कर रही है। 'पश्चिम बंगाल दिवस' के समारोहों को बड़े पैमाने पर कल्याणकारी घोषणाओं से जोड़कर, केंद्र सरकार ग्रामीण आर्थिक एकीकरण पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। यहाँ स्पष्ट पैटर्न दिख रहा है: केवल नकद सहायता से आगे बढ़कर किसानों के लिए एक डिजिटल और संरचनात्मक ढांचा तैयार करना। राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए, इन पहलों की सफलता काफी हद तक एग्रीस्टैक प्लेटफॉर्म के जमीनी क्रियान्वयन और बीमा योजनाओं को अपनाने पर निर्भर करेगी। जैसे-जैसे ये केंद्रीय परियोजनाएं गति पकड़ेंगी, आने वाले महीनों में मुख्य ध्यान इस बात पर होगा कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियां नीतिगत घोषणाओं और किसानों तक उनकी पहुंच के बीच के अंतर को कितनी प्रभावी ढंग से पाट पाती हैं।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।