बेगम रुकैया यूनिवर्सिटी में आधी रात को विरोध प्रदर्शन: छात्रों ने जवाबदेही की मांग की
बेरोबी (Berobi) में हॉस्टल की बदहाली से नाराज छात्राओं का प्रदर्शन, प्रोवोस्ट को हटाने की मांग
शहीद फेलानी हॉल की छात्राओं ने रविवार देर रात सड़कों पर उतरकर प्रशासनिक उदासीनता और जर्जर बुनियादी ढांचे के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
सोमवार रात 12:30 बजे बेगम रुकैया यूनिवर्सिटी (बेरोबी) के गलियारे नारों से गूंज उठे, जब शहीद फेलानी हॉल की छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जो वाइस-चांसलर के आवास तक पहुंच गया। इस विरोध की मुख्य वजह हॉल की प्रोवोस्ट, प्रोफेसर डॉ. सिफत रुमाना के प्रति गहरा आक्रोश है, जिन पर छात्राएं लगातार अनुपस्थित रहने और उनकी दैनिक समस्याओं के प्रति उदासीन होने का आरोप लगा रही हैं।
इस महिला छात्रावास में रहने वाली छात्राओं के लिए समस्याएं गंभीर और निरंतर बनी हुई हैं। डाइनिंग हॉल, जो एक महत्वपूर्ण सेवा है, अक्सर बंद रहता है। जब छात्राएं इसके लिए—या बिजली और पानी की भारी किल्लत के समाधान के लिए—अधिकारियों से संपर्क करती हैं, तो उन्हें केवल प्रशासनिक लापरवाही का सामना करना पड़ता है। मूल रिपोर्ट के अनुसार, छात्राओं को अक्सर प्रशासनिक कार्यालय और डाइनिंग अधिकारियों के बीच चक्कर लगवाए जाते हैं, और कोई भी उनकी शिकायतों की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
बुनियादी ढांचा भी छात्राओं की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विफल है। हॉल का रीडिंग रूम, जिसे पढ़ाई के लिए एक शांत जगह होना चाहिए था, वहां केवल तीन बेंच हैं, जिससे कैंपस में रहने वाली सैकड़ों महिलाओं के लिए इसका उपयोग करना लगभग असंभव है। छात्राओं का आरोप है कि प्रोवोस्ट की प्रतिक्रिया केवल दिखावटी नोटिस तक सीमित है, जबकि परिसर में उनके लिए आवास होने के बावजूद वे हॉल से नदारद रहती हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
आधी रात को हुए इस धरने पर यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर और रजिस्ट्रार, प्रोफेसर डॉ. फिरदौस रहमान ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। प्रदर्शनकारी छात्राओं के सामने उन्होंने स्वीकार किया कि डाइनिंग सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को लेकर उनकी शिकायतें पूरी तरह से जायज हैं।
परिसर का औपचारिक निरीक्षण करने का वादा करते हुए, प्रशासन ने सबसे जरूरी रखरखाव के मुद्दों को तुरंत हल करने का संकल्प लिया है। नेतृत्व परिवर्तन की मुख्य मांग पर डॉ. रहमान ने संकेत दिया कि यूनिवर्सिटी अब एक नए प्रोवोस्ट की नियुक्ति पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है—जो चौबीसों घंटे छात्राओं की सहायता के लिए शारीरिक रूप से मौजूद रह सकें।
यह महत्वपूर्ण क्यों है
बेगम रुकैया यूनिवर्सिटी में यह अशांति दक्षिण एशिया के सार्वजनिक आवासीय विश्वविद्यालयों के सामने आने वाली एक बड़ी चुनौती का उदाहरण है। जब फैकल्टी और छात्रों के बीच प्रशासनिक सेतु टूट जाता है, तो वहां विरोध प्रदर्शन होना तय है। एक ऐसे प्रोवोस्ट की मांग, जो केवल नाम का पद न हो बल्कि एक सक्रिय संरक्षक हो, उम्मीदों में आए बड़े बदलाव को दर्शाती है। छात्राएं अब बुनियादी जीवन स्तर के लिए 'प्रशासनिक बहाने' स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। यदि यूनिवर्सिटी प्रशासन अपनी शासन प्रणाली को अधिक जवाबदेह नहीं बनाता है, तो इस तरह के आधी रात के प्रदर्शन कैंपस जीवन का एक स्थायी हिस्सा बन सकते हैं।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।