मेटा में बड़े पैमाने पर छंटनी: जुकरबर्ग का 'ईयर ऑफ एफिशिएंसी' अब असर दिखा रहा है
मेटा की 8,000 नौकरियों में कटौती का सबसे ज्यादा असर मैनेजर्स पर पड़ा; सीईओ जुकरबर्ग की 2023 की चेतावनी अब सच साबित हो रही है
सार्वजनिक दस्तावेजों से पता चलता है कि मेटा में छंटनी की ताजा लहर ने इंजीनियरिंग मैनेजर्स को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जो इस बात का संकेत है कि टेक दिग्गज अब अपनी टीमों के ढांचे को स्थायी रूप से बदल रहा है।
मेटा की हालिया पुनर्गठन प्रक्रिया की कड़वी सच्चाई अब सार्वजनिक दस्तावेजों में दर्ज हो गई है। जब कंपनी ने 20 मई को 8,000 नौकरियों में कटौती का नया दौर शुरू किया, तो यह केवल एक सामान्य कटौती नहीं थी; यह मिडिल-मैनेजमेंट (मध्य-प्रबंधन) के उस स्तर पर एक सर्जिकल स्ट्राइक थी, जिसने वर्षों से कंपनी की पहचान बनाई थी। कैलिफोर्निया और वाशिंगटन के आंकड़ों से पता चलता है कि मेटा के कुल कार्यबल में से 4,665 चिन्हित पदों में से 1,400 से अधिक पद मैनेजर्स के थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन मैनेजर्स में से लगभग आधे सीधे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग टीमों की देखरेख कर रहे थे।
'मैनेजर्स को मैनेज करने वाले मैनेजर्स' का अंत
जो लोग कंपनी की कार्यप्रणाली पर नजर रखते हैं, उनके लिए यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। जनवरी 2023 में, सीईओ जुकरबर्ग ने कंपनी के भारी-भरकम पदानुक्रम (hierarchy) के प्रति अपनी नाराजगी स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने शिकायत की थी कि कंपनी का ढांचा ऐसा हो गया है जहां 'मैनेजर्स, मैनेजर्स को मैनेज कर रहे हैं' और यह चार स्तरों तक गहरा है। वह अधिक चुस्त और जवाबदेह टीमें चाहते थे। उस समय यह केवल कॉर्पोरेट शब्दावली लग रही थी, लेकिन हालिया आंकड़े बताते हैं कि वह सिर्फ दिखावा नहीं कर रहे थे। एग्जीक्यूटिव सुइट और वास्तव में कोड लिखने वाले लोगों के बीच की परतों को हटाकर, कंपनी ने प्रभावी रूप से एक सपाट और अधिक आक्रामक संगठनात्मक चार्ट लागू कर दिया है।
छंटनी का वितरण यह पुष्टि करता है कि कंपनी की प्राथमिकताएं क्या हैं। 1,400 मैनेजर्स के पीछे लगभग 1,000 सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और 419 डेटा साइंटिस्ट्स की भी छंटनी हुई। इसके विपरीत, मार्केटिंग और सेल्स जैसे कॉर्पोरेट कार्यों पर बहुत कम असर पड़ा, जहां कुल मिलाकर 150 से भी कम लोगों को निकाला गया। यह स्पष्ट है कि मेटा अपनी पुरानी इंजीनियरिंग संस्कृति के ढांचे को हटाकर तकनीकी कोर पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
पुनर्नियुक्ति का दांव
बात सिर्फ यह नहीं है कि किसे निकाला गया; बल्कि यह भी है कि जो बच गए हैं, उन्हें कहां भेजा जा रहा है। जहां 8,000 कर्मचारियों को छंटनी का नोटिस मिला, वहीं उसी सप्ताह लगभग 7,000 अन्य कर्मचारियों को जबरन नई टीमों में स्थानांतरित कर दिया गया। कंपनी का आधिकारिक रुख तटस्थ है और वह इसे "व्यावसायिक प्राथमिकताओं" की ओर बदलाव बता रही है। हालांकि, इन पुनर्नियुक्तियों का आदेश अनिवार्य था। कर्मचारियों के लिए, इसका मतलब था अचानक नई परियोजनाओं पर काम करना, जिससे कई लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या उनकी विशेषज्ञता अभी भी कंपनी की वर्तमान दिशा के अनुरूप है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह बदलाव "तेजी से काम करो और चीजें तोड़ो" (move fast and break things) के युग से हटकर एक कठोर, ऊपर से नीचे की ओर (top-down) कार्यक्षमता की ओर बढ़ने का संकेत है। मिडिल मैनेजमेंट को हटाकर, मेटा इस भरोसे पर दांव लगा रहा है कि संचार की गति और कम खर्च, संस्थागत ज्ञान की कमी की भरपाई कर देंगे। भारतीय आईटी इकोसिस्टम और वैश्विक टेक प्रतिभाओं के लिए, यह एक सख्त चेतावनी है: बड़ी टेक कंपनियों में 'मैनेजर' के रूप में सुरक्षा का युग खत्म हो रहा है। आज, कंपनियां उन व्यक्तिगत योगदानकर्ताओं (individual contributors) को महत्व दे रही हैं जो कम से कम निगरानी में काम कर सकें, जो अनिवार्य रूप से कार्यबल को अधिक स्वायत्त बनने के लिए मजबूर कर रहा है, वरना वे अगली छंटनी की लहर में बाहर हो सकते हैं।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।