मणिपुर ड्राफ्ट मतदाता सूची: स्पेशल इंटेंसिव रिविजन में 19.34 लाख मतदाता दर्ज
मणिपुर SIR: ड्राफ्ट मतदाता सूची में 19.34 लाख मतदाता, CEO ने दी जानकारी

जैसे-जैसे राज्य सितंबर में अंतिम प्रकाशन की तैयारी कर रहा है, चुनाव आयोग का नवीनतम डेटा आंतरिक विस्थापन से प्रभावित क्षेत्र में मतदाता सूची को अपडेट करने की जटिलताओं को उजागर करता है।
मणिपुर में प्रशासनिक तंत्र ने अपनी चुनावी तैयारियों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लिया है। मणिपुर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अरुण कुमार सिन्हा ने रविवार को घोषणा की कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में अब 19.34 लाख मतदाता हैं। यह आंकड़ा इस कवायद से पहले सिस्टम में मौजूद कुल 20.93 लाख मतदाताओं का 92.42% है, जो राज्य की मतदाता सूची की सटीकता को सुधारने के लिए किए गए एक बड़े प्रयास को दर्शाता है।
सफाई अभियान
यह पुनरीक्षण प्रक्रिया केवल गिनती तक सीमित नहीं थी। CEO के अनुसार, 16 जिलों में 2,956 बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की तैनाती ने मतदाता सूची की गहन जांच की। फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान 43,000 मृत मतदाताओं की पहचान की गई और 7,394 ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया जो एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे। इन विलोपन के अलावा, लगभग 1.08 लाख मतदाताओं को 'स्थानांतरित' या अनुपस्थित के रूप में वर्गीकृत किया गया, क्योंकि उन्होंने 28 जून की समय सीमा तक अपने फॉर्म जमा नहीं किए थे।
नई ड्राफ्ट सूची में लिंग संरचना उल्लेखनीय है, जिसमें 9,93,660 महिला मतदाता, 9,40,466 पुरुष मतदाताओं से अधिक हैं, साथ ही 294 थर्ड-जेंडर मतदाता भी शामिल हैं। जो लोग मानते हैं कि उन्हें गलती से सूची से बाहर कर दिया गया है, उनके लिए चुनाव आयोग ने 5 जुलाई से 4 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया है, ताकि 6 सितंबर को अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले वे अपनी स्थिति को सही कर सकें।
विस्थापन की चुनौती
इस चक्र के दौरान मणिपुर CEO के लिए एक अनूठी चुनौती आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (IDPs) को शामिल करना रही है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि इन नागरिकों का मताधिकार बना रहे, अधिकारियों ने उनके वर्तमान निवास वाले जिलों में नोडल अधिकारियों का उपयोग करके फॉर्म एकत्र किए और उन्हें डिजिटाइज़ किया। इसके बाद इन फॉर्म्स को मतदाताओं के संबंधित गृह विधानसभा क्षेत्रों के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) के पास भेजा गया। यह एक लॉजिस्टिक पुल है जिसे उन लोगों को मताधिकार से वंचित होने से बचाने के लिए बनाया गया है जो वर्तमान में अपने मूल मतदान केंद्रों से दूर रह रहे हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह कवायद केवल डेटा एंट्री से कहीं बढ़कर है; यह एक अस्थिर परिदृश्य में संस्थागत विश्वसनीयता के लिए एक महत्वपूर्ण 'स्ट्रेस टेस्ट' है। डुप्लिकेट प्रविष्टियों और मृत व्यक्तियों को व्यवस्थित रूप से हटाकर और साथ ही विस्थापित नागरिकों के लिए सूची में बने रहने का रास्ता तैयार करके, चुनाव आयोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में स्थिरता लाने का प्रयास कर रहा है।
हालाँकि, 1.5 लाख से अधिक फॉर्म जमा न होने की संख्या यह बताती है कि राज्य के प्रशासनिक इरादों और जमीनी स्तर पर भागीदारी के बीच का अंतर अभी भी एक बाधा बना हुआ है। जैसे-जैसे देश कर्नाटक और दिल्ली जैसे राज्यों में इसी तरह के चुनावी पुनरीक्षण देख रहा है, मणिपुर का गहन फील्ड-स्तरीय समन्वय मॉडल संभवतः एक बेंचमार्क के रूप में काम करेगा कि ECI चुनौतीपूर्ण वातावरण में जनसंख्या की गतिशीलता और प्रशासनिक सटीकता को कैसे संभालता है।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।