दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन
भारतीय शूटर जसपाल राणा का निधन कैसे हुआ, मैक्स अस्पताल में ली आखिरी सांस
प्रसिद्ध निशानेबाज और हाई-परफॉर्मेंस कोच ने ISSF वर्ल्ड कप से लौटते समय अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।
मशहूर शूटर और कोच जसपाल राणा के अचानक निधन से भारतीय खेल जगत शोक में है। महज 49 साल की उम्र में राणा का जाना राष्ट्रीय शूटिंग सर्किट के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने एक शानदार निशानेबाज के रूप में अपना करियर शुरू किया था और बाद में भारतीय प्रतिभाओं की अगली पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।
उनके निधन की परिस्थितियां म्यूनिख में ISSF वर्ल्ड कप से वापसी के दौरान अचानक हुई मेडिकल इमरजेंसी की ओर इशारा करती हैं। खबरों के अनुसार, उड़ान के दौरान ही राणा को काफी बेचैनी महसूस होने लगी थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, दिल्ली में उतरते ही उनके सहयोगियों और एयरलाइन स्टाफ ने उन्हें तुरंत साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने आधिकारिक तौर पर इस दुखद घटना की पुष्टि की है, जिससे शूटिंग समुदाय में शोक की लहर है। हालांकि अभी आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार यह कार्डियक अरेस्ट का मामला हो सकता है। News18Hindi ने सबसे पहले इस दुखद खबर को साझा किया था और अस्पताल से विस्तृत जानकारी मिलने का इंतजार है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: एक मेंटर का जाना
जसपाल राणा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि वह भारत के हाई-परफॉर्मेंस शूटिंग प्रोग्राम की रीढ़ थे। एक कोच के तौर पर उन्होंने देश के पिस्टल शूटर्स की तकनीकी और मानसिक मजबूती को निखारने में अहम भूमिका निभाई। म्यूनिख में ISSF वर्ल्ड कप में उनकी मौजूदगी इस बात का प्रमाण थी कि अपने करियर के चरम के वर्षों बाद भी वे खेल के प्रति कितने समर्पित थे।
उनके निधन की अचानक हुई घटना पेशेवर एथलीटों और कोचों द्वारा झेले जाने वाले शारीरिक और मानसिक तनाव पर एक गंभीर चर्चा को जन्म देती है। अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए यात्रा करना हो या शूटिंग रेंज के अत्यधिक दबाव वाले माहौल को संभालना, इन लोगों पर काम का दबाव लगातार बना रहता है। उनका निधन स्वास्थ्य की अनिश्चितता की एक कड़वी याद दिलाता है, जो उन लोगों के लिए भी उतनी ही सच है जिन्होंने अपना पूरा जीवन अनुशासन और सटीकता के लिए समर्पित कर दिया।
इतने अनुभवी रणनीतिकार का जाना भारत की ओलंपिक तैयारियों के लिए एक बड़ा झटका है। राणा जैसे मेंटर न केवल कोचिंग देते हैं, बल्कि वे संस्थागत अनुभव और स्थिरता भी प्रदान करते हैं। जैसे-जैसे NRAI और खेल मंत्रालय इस क्षति से उबरने की कोशिश करेंगे, पूरा ध्यान उनकी विरासत को सम्मानित करने पर होगा, ताकि जिन एथलीटों को उन्होंने प्रशिक्षित किया है, वे उनके द्वारा स्थापित विश्व स्तरीय प्रदर्शन को जारी रख सकें।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।