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खगड़िया में दिव्यांगों का आक्रोश: तीन महीने से पेंशन बंद, आंदोलन की चेतावनी

गोगरी में दिव्यांग जनों की बैठक: तीन महीने से पेंशन नहीं मिलने पर जताई नाराजगी, दी आंदोलन की चेतावनी

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 29 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
खगड़िया में दिव्यांगों का प्रदर्शन: तीन महीने से पेंशन बंद, आंदोलन की चेतावनी
खगड़िया में दिव्यांगों का प्रदर्शन: तीन महीने से पेंशन बंद, आंदोलन की चेतावनी

गोगरी स्थित दिव्यांगजन कल्याण समिति के सदस्यों ने बिहार सरकार को बकाया पेंशन जारी करने के लिए अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मासिक सहायता राशि का भुगतान नहीं हुआ, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।

खगड़िया के गोगरी अनुमंडल में रजिस्ट्री मोड़ के पास दुर्गा स्थान परिसर में रविवार शाम को लोगों का गुस्सा साफ झलक रहा था। जिला अध्यक्ष पवन कुमार पासवान की अध्यक्षता में हुई यह बैठक सैकड़ों लोगों के लिए महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई थी। बैठक का मुख्य मुद्दा यह था कि राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली पेंशन पिछले तीन महीनों से दिव्यांग लाभार्थियों के बैंक खातों में नहीं पहुंची है।

बिहार के गोगरी स्थित स्थानीय संस्था, दिव्यांगजन कल्याण समिति ने अब प्रशासन को औपचारिक चेतावनी दी है। यदि बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया और हर महीने की 10 तारीख तक पेंशन मिलने की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो समिति राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। आयोजकों का स्पष्ट कहना है कि अधिकारियों की चुप्पी अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पेंशन के इस संकट के अलावा, बैठक में क्षेत्र में दिव्यांग कल्याण योजनाओं की बदहाली पर भी चर्चा हुई। विभिन्न प्रखंडों के प्रतिनिधियों ने व्यवस्था की खामियों को उजागर किया। इसमें राशन वितरण में गड़बड़ी, रेलवे पास की अनुपलब्धता और लाभार्थियों को दी जाने वाली बैटरी चालित ट्राइसाइकिल की खराब गुणवत्ता जैसे मुद्दे शामिल थे।

जवाबदेही की मांग नीतिगत कार्यान्वयन तक भी पहुंची। मानसी प्रखंड अध्यक्ष होने आलम ने दिव्यांगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की समीक्षा की मांग की और कहा कि जमीनी स्तर पर कानूनी प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है। रोशन कुमार और मुन्ना कुमार सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि तीन महीने से पेंशन न मिलने के कारण कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब गए हैं, जिससे यह जीवन रक्षक राशि अब चिंता का कारण बन गई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

खगड़िया की यह स्थिति प्रशासनिक विफलता का एक छोटा सा उदाहरण है। हालांकि राज्य स्तरीय नीतियां कागजों पर मजबूत दिखती हैं, लेकिन 'लास्ट-माइल डिलीवरी' यानी अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना आज भी सबसे कमजोर कड़ी है। जब सरकार मासिक भत्ते का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने में विफल रहती है, तो यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सबसे कमजोर नागरिकों की गरिमा पर चोट है। समिति द्वारा दी गई आंदोलन की चेतावनी नौकरशाही की सुस्ती के प्रति बढ़ते असंतोष को दर्शाती है। यदि राज्य सरकार अपनी भुगतान प्रणाली को दुरुस्त नहीं करती है, तो ये स्थानीय विरोध प्रदर्शन जल्द ही बड़े राजनीतिक संकट में बदल सकते हैं।

बैठक के समापन पर मंच से कड़ा संदेश दिया गया। पवन कुमार पासवान ने इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाने का संकल्प लिया और मांग की कि न केवल वर्तमान बकाया जारी हो, बल्कि भुगतान तंत्र में स्थायी सुधार भी किया जाए। फिलहाल, जिला प्रशासन को चेतावनी दे दी गई है; जिन लोगों को इस प्राथमिक सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता है, उनका धैर्य अब जवाब दे चुका है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।