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कर्नाटक कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व: डीके शिवकुमार ने रिक्तियों को लेकर जताई प्रतिक्रिया

"अभी कई पद खाली हैं": कर्नाटक कैबिनेट में महिलाओं को जगह न मिलने पर बोले डीके शिवकुमार

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 5 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी नई कैबिनेट में महिलाओं को शामिल न किए जाने पर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि भविष्य में कैबिनेट विस्तार के अवसर मौजूद हैं।

कर्नाटक में नई सरकार के गठन के साथ ही लैंगिक समावेशिता (gender inclusivity) को लेकर बहस छिड़ गई है, विशेष रूप से कैबिनेट के शुरुआती चयन में महिला मंत्रियों की अनुपस्थिति पर। बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए, डीके शिवकुमार को इस चूक को लेकर बीजेपी के आरोपों का सामना करना पड़ा।

कैबिनेट में खाली जगहों पर सफाई

बढ़ती चर्चाओं के बीच, कर्नाटक कैबिनेट में किसी भी महिला को शामिल न किए जाने के विवाद पर डीके शिवकुमार ने कहा कि मौजूदा संरचना अंतिम नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभी कई पद खाली हैं जिन्हें भरा जाना बाकी है, और उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवकुमार ने कहा, "थोड़ा इंतजार कीजिए।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान कैबिनेट का गठन अभी एक प्रक्रिया है और इस शुरुआती दौर में महिलाओं को जगह न मिलना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं का स्थायी प्रतिबिंब नहीं है।

विवाद का संदर्भ

मंत्रिपरिषद की सूची से महिलाओं का नाम नदारद रहने पर विभिन्न हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। आलोचकों ने निराशा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि कांग्रेस पार्टी की ओर से कम से कम एक महिला को इस उच्च-स्तरीय टीम में जगह मिलेगी।

पिछले राजनीतिक दौर का हवाला देते हुए, उपमुख्यमंत्री ने इस फैसले का बचाव किया और कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले कार्यकाल में भी कैबिनेट नियुक्तियों के पहले दौर में किसी महिला को शामिल नहीं किया गया था।

आगे की राह

जैसे-जैसे नई सरकार अपना काम संभाल रही है, अब ध्यान कैबिनेट विस्तार पर केंद्रित हो गया है। हालांकि शुरुआती शपथ ग्रहण समारोह में मंत्रियों का एक विशिष्ट समूह शामिल था, लेकिन उपमुख्यमंत्री की बातों से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में अधिक समावेशी प्रतिनिधित्व के दरवाजे खुले हैं। फिलहाल, सरकार तात्कालिक प्रशासनिक जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है और यह वादा किया है कि राज्य के नेतृत्व का पूर्ण स्वरूप अभी सामने आना बाकी है।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
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