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क्या खत्म हो रहा है तुलसी का दौर? 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' का भविष्य अधर में

क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 ऑफ एयर: 10 साल का लीप आते ही ठंडे बस्ते में जाएगा तुलसी का शो?

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 25 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
क्या तुलसी का दौर खत्म हो रहा है? 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' का अनिश्चित भविष्य
क्या तुलसी का दौर खत्म हो रहा है? 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' का अनिश्चित भविष्य

10 साल के लीप और गिरती टीआरपी की खबरों ने प्राइम-टाइम टेलीविजन से शो के संभावित बाहर होने की अटकलों को हवा दे दी है।

स्मृति ईरानी और अमर उपाध्याय की तुलसी और मिहिर के रूप में वापसी लाखों भारतीय घरों के लिए घर वापसी जैसा अहसास थी। कुछ समय के लिए, 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के नॉस्टेल्जिया से भरे इस रिवाइवल ने टीवी की दुनिया पर राज किया और एक सांस्कृतिक मील का पत्थर बनकर उभरा। लेकिन भारतीय टेलीविजन की अस्थिर दुनिया में, सबसे प्रतिष्ठित रीयूनियन भी आंकड़ों की ठंडी सच्चाई के सामने टिक नहीं पाते।

प्रोडक्शन कैंप से आ रही हालिया खबरें बताती हैं कि शो एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। जहां दर्शक 10 साल के लीप की तैयारी कर रहे थे—जो 'क्योंकि' की दुनिया का एक क्लासिक तरीका है—वहीं इस कहानी के बदलाव पर इन अफवाहों का साया पड़ गया है कि शो बंद होने वाला है। सूत्रों का कहना है कि क्रिएटिव टीम बड़े बदलाव की योजना बना रही है, जिसमें इस ट्रांजिशन के हिस्से के रूप में रियो और पार्थ जैसे मुख्य किरदारों का शो से बाहर होना भी शामिल हो सकता है।

टीआरपी का रस्साकशी

यह बदलाव पूरी तरह से अप्रत्याशित नहीं है। हालांकि शो को शुरुआत में जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था, लेकिन हाल के हफ्तों में इसकी टीआरपी रेटिंग में गिरावट देखी गई है। प्राइम-टाइम स्लॉट के कड़े मुकाबले में, दर्शकों की संख्या में कमी अक्सर बड़े ढांचागत बदलावों को जन्म देती है। ये बदलाव कहानी को बचाने की एक हताश कोशिश है या फिर शो के सम्मानजनक अंत से पहले का आखिरी अध्याय, यह इंडस्ट्री के जानकारों के बीच बहस का विषय बना हुआ है।

यह एक जाना-पहचाना पैटर्न है: जब किसी शो की लोकप्रियता कम होती है, तो निर्माता अक्सर कहानी को रीसेट करने और नए डायनामिक्स लाने के लिए 'लीप' का सहारा लेते हैं। हालांकि, संभावित कैंसिलेशन की चर्चा यह संकेत देती है कि इस बार यह लीप एक नई शुरुआत के बजाय शो का अंतिम पड़ाव साबित हो सकता है। फिलहाल, न तो एकता कपूर और न ही प्रोडक्शन टीम ने कोई औपचारिक पुष्टि की है, जिससे 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' फ्रैंचाइज़ी का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

इस शो को लेकर अनिश्चितता इंडस्ट्री के एक बड़े ट्रेंड को दर्शाती है: विरासत और प्रासंगिकता के बीच संतुलन बनाने का संघर्ष। 'क्योंकि' कभी भारतीय टेलीविजन की नींव हुआ करता था, जिसने एक पूरी पीढ़ी के लिए डेली सोप ओपेरा के फॉर्मेट को परिभाषित किया। हालांकि, आज के दर्शक काफी बदल गए हैं और 'सास-बहू' वाले टेम्पलेट को डिजिटल कंटेंट से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

जब इतना बड़ा शो बंद होने की कगार पर होता है, तो यह संकेत देता है कि मनोरंजन जगत के सबसे शक्तिशाली ब्रांड भी आधुनिक रेटिंग के दबाव से अछूते नहीं हैं। यह लंबी चलने वाली पारंपरिक गाथाओं से हटकर अधिक कॉम्पैक्ट और हाई-स्टेक स्टोरीटेलिंग की ओर बढ़ते बदलाव को उजागर करता है। यदि यह शो आखिरकार बंद होता है, तो यह उस युग का अंत होगा जिसने भारतीय प्राइम-टाइम टेलीविजन की पहचान को आकार दिया था।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।