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कोर्ट पर ईमानदारी: किदांबी श्रीकांत के शानदार जेस्चर ने US ओपन सेमीफाइनल को यादगार बनाया

US ओपन: ओकिमोतो के खिलाफ कड़े मुकाबले में श्रीकांत की खेल भावना रही चर्चा का विषय

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 29 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
कोर्ट पर ईमानदारी: किदांबी श्रीकांत के शानदार जेस्चर ने US ओपन सेमीफाइनल को यादगार बनाया
कोर्ट पर ईमानदारी: किदांबी श्रीकांत के शानदार जेस्चर ने US ओपन सेमीफाइनल को यादगार बनाया

पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 खिलाड़ी ने कड़े मुकाबले में जीत हासिल कर महीनों बाद अपने पहले फाइनल में प्रवेश किया, लेकिन टाइटन जिम में मौजूद दर्शकों का दिल उनकी खेल भावना ने जीता।

कैलिफोर्निया के टाइटन जिम का माहौल बेहद रोमांचक था, लेकिन US ओपन का सबसे यादगार पल किसी स्मैश या रणनीतिक दांव से नहीं आया। यह पल भारत के श्रीकांत और जापान के ओकिमोतो के बीच निर्णायक गेम के दौरान आया। मुकाबला बेहद तनावपूर्ण था, तभी नेट पर हुई एक रैली के दौरान लाइन कॉल भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में गया। जब चेयर अंपायर ने जापानी खिलाड़ी की अपील को खारिज कर दिया, तो ऐसा लगा कि सेमीफाइनल मुकाबले के बजाय विवाद की ओर बढ़ जाएगा।

तभी श्रीकांत ने हस्तक्षेप किया। इतने दबाव वाले हालात में ऐसा देखने को कम ही मिलता है, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अंपायर को खुद बताया कि शटल बाहर गिरी थी। उनकी इस ईमानदारी के बाद अंपायर ने तुरंत अपना फैसला बदल दिया और दर्शकों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया। हालांकि मैच आगे भी जारी रहा और 72 मिनट तक चली थका देने वाली रैलियों के बाद ही नतीजा निकला, लेकिन श्रीकांत का यह व्यवहार उस खेल भावना की याद दिलाता है जो अक्सर जीत की होड़ में कहीं खो जाती है।

फाइनल तक का संघर्षपूर्ण सफर

यह मैच शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव भरा रहा। श्रीकांत ने पहला गेम 22-20 से जीता, लेकिन ओकिमोतो ने हार नहीं मानी और दूसरा गेम 21-15 से जीतकर वापसी की। निर्णायक गेम में भारतीय खिलाड़ी 10-5 की बढ़त के साथ नियंत्रण में दिख रहे थे, लेकिन जापानी चुनौती ने फिर जोर पकड़ा। अंतिम क्षणों में दोनों खिलाड़ियों ने गलतियां कीं और स्कोर 18-18 पर बराबर हो गया, जिसके बाद श्रीकांत ने संयम बरतते हुए 21-19 से जीत हासिल की।

पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 के लिए यह जीत एक बड़ी उपलब्धि है। यह पिछले साल नवंबर के बाद उनका पहला BWF वर्ल्ड टूर फाइनल है, जिसने उनके लंबे खिताबी सूखे को खत्म किया है। अब फाइनल में उनका मुकाबला सु ली यांग से होगा, जिन्होंने रौनक चौहान को हराकर जगह बनाई है। यह मुकाबला भारतीय खिलाड़ी के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा।

यह क्यों मायने रखता है

श्रीकांत जैसे अनुभवी खिलाड़ी के लिए US ओपन बैडमिंटन 2026 या इस स्तर के किसी भी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचना केवल रैंकिंग पॉइंट्स से कहीं ज्यादा है। यह साबित करना है कि उनका खेल आज भी युवाओं के दबदबे वाले दौर में प्रासंगिक है। बैडमिंटन की दुनिया बेहद प्रतिस्पर्धी है; यहां सफलता बनाए रखने के लिए तकनीकी सटीकता और मानसिक मजबूती दोनों की जरूरत होती है।

बड़ी बात यह है कि श्रीकांत ने निरंतरता दिखाई है। ओकिमोतो जैसे कड़े प्रतिद्वंद्वी को हराकर उन्होंने साबित कर दिया है कि उनमें अभी भी दबाव वाले मैचों को जीतने की परिपक्वता है। रविवार को वह खिताब जीतें या न जीतें, इस टूर्नामेंट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय सर्किट में अभी भी एक गंभीर दावेदार हैं।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।