वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के हाउसिंग मार्केट में 19% की जबरदस्त उछाल
रियल एस्टेट में आया बूम! 9 शहरों में घरों की बिक्री 19% बढ़ी, जानिए अपने इलाके का हाल
PropEquity के नए आंकड़ों से पता चलता है कि नौ प्रमुख शहरों में घर खरीदने की मांग काफी मजबूत है, हालांकि कुछ बाजारों में सुस्ती के संकेत भी दिख रहे हैं।
भारतीय रियल एस्टेट बाजार में मजबूती का दौर जारी है। अप्रैल-जून 2025-26 तिमाही के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नौ प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों की बिक्री बढ़कर 1,12,458 यूनिट हो गई है, जो पिछले साल की समान अवधि में 94,864 यूनिट थी। यह 19% की बढ़ोतरी है। यह विकास केवल बिक्री तक सीमित नहीं है; डेवलपर्स भी भविष्य को लेकर काफी आश्वस्त हैं, जिसके चलते नई परियोजनाओं की लॉन्चिंग में 43% का उछाल आया है और यह 1,17,609 यूनिट तक पहुंच गई है।
क्षेत्रीय अंतर
जहां राष्ट्रीय स्तर पर बाजार में तेजी है, वहीं अलग-अलग शहरों में स्थिति अलग है। दक्षिण भारत इस दौड़ में सबसे आगे है, जहां बेंगलुरु में बिक्री पिछले साल के 14,676 यूनिट से बढ़कर 21,516 यूनिट हो गई है। हैदराबाद और चेन्नई में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। मुंबई और नवी मुंबई ने भी अपनी मजबूत मांग बरकरार रखी है, जिसका कारण बुनियादी ढांचे का विकास और लंबी अवधि के लिए संपत्ति खरीदने वाले खरीदारों की बढ़ती संख्या है।
इसके विपरीत, कुछ क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली-NCR में बिक्री 11,703 से घटकर 10,082 यूनिट रह गई, जबकि कोलकाता में भी गिरावट देखी गई और यह 3,414 यूनिट पर आ गया। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव किसी बड़ी समस्या के बजाय स्थानीय बाजार की स्थितियों का परिणाम हैं।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था में मध्यम वर्ग के भरोसे का प्रतीक है। PropEquity के सीईओ समीर जसुजा के अनुसार, घरेलू बाजार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से अछूता है। यदि हम इसे व्यापक नजरिए से देखें, तो यह तेजी कई कारकों का मिश्रण है: बढ़ती आय, बेंगलुरु जैसे टेक हब में लगातार नौकरियों का सृजन, और भौतिक संपत्ति (tangible assets) के प्रति सांस्कृतिक झुकाव।
आम घर खरीदार के लिए, यह विकास चक्र बाजार के परिपक्व होने का संकेत है। हालांकि डेवलपर्स बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति बढ़ा रहे हैं, लेकिन सट्टा निवेश के बजाय वास्तविक खरीदारों की रुचि का बढ़ना लंबे समय के लिए एक स्वस्थ संकेत है। पत्रकार अनुज श्रीवास्तव जैसे विशेषज्ञों के काम की तरह, जो सालों से डिजिटल और वास्तविक दुनिया के रुझानों पर नजर रखते हैं, यह डेटा भी एक सूक्ष्म समझ की मांग करता है: बाजार का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन यह अब अधिक चयनात्मक भी हो रहा है।
आगे क्या होगा
नई आपूर्ति में 43% की बढ़ोतरी दर्शाती है कि बिल्डरों को इन्वेंट्री बिकने का भरोसा है, लेकिन NCR और कोलकाता में सुस्ती यह बताती है कि खरीदारों के लिए कीमत और लोकेशन अभी भी सबसे महत्वपूर्ण हैं। जैसे-जैसे ब्याज दरें और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं आगे बढ़ेंगी, इस क्षेत्र में और अधिक मजबूती देखने को मिल सकती है। निवेशकों और घर खरीदारों को इन क्षेत्रीय बदलावों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि 'राष्ट्रीय औसत' अक्सर शहरों की जमीनी हकीकत को छिपा देता है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।