निशांत सिंधु की घातक गेंदबाजी से अफगानिस्तान पस्त, इंडिया-A ने फाइनल में बनाई जगह
ट्राई सीरीज: इंडिया-A फाइनल में पहुंचा: AFG-A को 101 रनों से हराया; भारत के तीन बल्लेबाजों की फिफ्टी, वैभव का संघर्ष जारी
दाम्बुला में एक शानदार प्रदर्शन करते हुए इंडिया-A ने अफगानिस्तान-A को 101 रनों से हराकर खिताबी मुकाबले में अपनी जगह पक्की कर ली है।
करो या मरो के मुकाबले का दबाव दाम्बुला की धूप में गायब सा नजर आया, जहां इंडिया-A ने व्यवस्थित तरीके से अफगानिस्तान-A को ध्वस्त कर दिया। 320 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी अफगान टीम स्कोरबोर्ड के दबाव में बिखर गई और महज 36.5 ओवर में 218 रनों पर सिमट गई। इस एकतरफा जीत के साथ ही भारतीय टीम ने 21 जून को होने वाले फाइनल में प्रवेश कर लिया है, जहां उनका सामना श्रीलंका-A और अफगानिस्तान-A के बीच होने वाले अगले मैच के विजेता से होगा।
जीत की नींव अनुशासित बल्लेबाजी ने रखी। भारत के तीन बल्लेबाजों—प्रियांशु आर्या (58), कुमार कुशाग्र (58) और कप्तान तिलक वर्मा (59)—ने महत्वपूर्ण अर्धशतक जड़े, जिससे टीम का स्कोर लगातार आगे बढ़ता रहा। उनके योगदान ने टीम को 300 रनों के पार पहुंचाया, जो विपक्षी टीम के लिए हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला था। जहां मध्यक्रम ने शानदार खेल दिखाया, वहीं ओपनिंग जोड़ी पर भी सबकी नजरें थीं, जिसमें प्रियांशु आर्या विशेष रूप से लय में दिखे और उन्होंने अपना चौथा लिस्ट-ए अर्धशतक पूरा किया।
हालांकि, यह टूर्नामेंट 15 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के लिए संघर्षपूर्ण रहा है। काफी उम्मीदों के साथ आए इस युवा ओपनर ने 28 गेंदों में 38 रन बनाए, जो लगातार चौथा मौका था जब वह अच्छी शुरुआत को अर्धशतक में नहीं बदल सके। इस सीरीज के चार मैचों में केवल 117 रन बनाने के बाद, उनकी निरंतरता चयनकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। फिर भी, आर्या के साथ उनकी 75 रनों की ओपनिंग साझेदारी ने टीम को वह जरूरी गति प्रदान की, जिससे मध्यक्रम खुलकर खेल सका।
गेंदबाजी का जलवा
जब बचाव की बारी आई, तो निशांत सिंधु ने मैच को एकतरफा बना दिया। उनके चार विकेटों ने अफगान मध्य और निचले क्रम की कमर तोड़ दी, जिससे उनके पास वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा। यश ठाकुर ने उनका बखूबी साथ निभाया और दो विकेट लेकर दबाव बनाए रखा। 37वां ओवर निर्णायक साबित हुआ, जब सिंधु ने शम्स उर रहमान और जहीर खान को जल्दी-जल्दी आउट कर प्रतिरोध खत्म कर दिया और इंडिया-A की फाइनल की तैयारी का संकेत दे दिया।
यह क्यों मायने रखता है: भविष्य की दृष्टि
जो लोग भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की गहराई पर नजर रख रहे हैं, उनके लिए यह टूर्नामेंट सिर्फ एक ट्राई सीरीज नहीं है; यह बेंच स्ट्रेंथ के लिए एक अग्निपरीक्षा है। किसी एक स्टार खिलाड़ी पर निर्भर रहे बिना 300 से अधिक का स्कोर खड़ा करने की टीम की क्षमता व्हाइट-बॉल सेटअप में बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती है। हालांकि वैभव सूर्यवंशी का संघर्ष पेशेवर क्रिकेट में सीखने की कठिन प्रक्रिया की याद दिलाता है, लेकिन जीत का यह अंदाज दिखाता है कि टीम दबाव में एकजुट होकर खेल रही है। 21 जून को दाम्बुला में होने वाला फाइनल यह देखने के लिए अंतिम लिटमस टेस्ट होगा कि क्या यह टीम टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ टीम के खिलाफ अपनी लय बरकरार रख सकती है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।