दिग्गजों के साये में: क्यों कैंसिलो वर्ल्ड कप के शोर से अपने स्टार खिलाड़ियों को बचा रहे हैं
कैंसिलो का कहना है कि रोनाल्डो और नेमार को कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है
जैसे-जैसे क्रिस्टियानो रोनाल्डो और नेमार अपने फॉर्म और फिटनेस को लेकर बढ़ती जांच के दायरे में आ रहे हैं, जोआओ कैंसिलो इन दिग्गजों की विरासत के बचाव में आगे आए हैं।
वर्ल्ड कप की चकाचौंध कभी-कभी बहुत कठोर हो सकती है, खासकर तब जब स्कोरबोर्ड किसी खिलाड़ी के ऐतिहासिक कद को नहीं दर्शाता। जहां लियोनेल मेसी, किलियन एम्बाप्पे और एर्लिंग हालैंड जैसे खिलाड़ी टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियों में छाए हुए हैं, वहीं फुटबॉल के दो सबसे बड़े आइकन—क्रिस्टियानो रोनाल्डो और नेमार—मुश्किलों के घेरे में हैं।
रोनाल्डो के लिए आंकड़े चिंताजनक हैं। पुर्तगाल के इस स्टार खिलाड़ी ने लगातार 10 बड़े टूर्नामेंट मैचों में गोल नहीं किया है। डीआर कांगो के साथ 1-1 से ड्रॉ हुए निराशाजनक मैच के बाद उन्हें कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, ब्राजील के नेमार पिंडली की चोट के कारण शुरुआती मैचों से बाहर हैं और उनकी टीम ग्रुप स्टेज में संघर्ष कर रही है।
ड्रेसिंग रूम का नज़रिया
विश्लेषकों और प्रशंसकों के बीच इस बात पर बहस छिड़ी है कि क्या ये अनुभवी खिलाड़ी अब भी खेल के शिखर पर बने रहने के हकदार हैं। ऐसे में पुर्तगाल के फुल-बैक जोआओ कैंसिलो उनके सबसे मुखर समर्थक बनकर उभरे हैं। उज्बेकिस्तान के खिलाफ पुर्तगाल के मुकाबले से पहले कैंसिलो ने स्पष्ट किया कि बाहर का शोर टीम के अंदर कोई मायने नहीं रखता।
"मुझे नहीं लगता कि नेमार या क्रिस्टियानो को किसी को कुछ साबित करने की जरूरत है," कैंसिलो ने पत्रकारों से कहा। "उनकी प्रतिभा और फुटबॉल में उन्होंने जो हासिल किया है, वह खुद बोलता है। बाकी सारी बातें सिर्फ दिखावा हैं।" कैंसिलो के लिए, यह कहना कि रोनाल्डो की मौजूदगी पुर्तगाल के लिए बाधा है, पूरी तरह गलत है। उनका कहना है कि टीम एकजुट है और कप्तान के रूप में रोनाल्डो का नेतृत्व आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है, भले ही वे गोल करने के लिए जूझ रहे हों।
यह क्यों मायने रखता है
इन दो सुपरस्टार्स के इर्द-गिर्द चल रही बहस आधुनिक फुटबॉल के एक पुराने तनाव को उजागर करती है: खिलाड़ी के शानदार अतीत और वर्तमान की शारीरिक मांगों के बीच संतुलन बनाना। जहां एम्बाप्पे और हालैंड जैसे युवा खिलाड़ी टूर्नामेंट की गति तय कर रहे हैं, वहीं रोनाल्डो और नेमार उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने इस खेल को नई परिभाषा दी।
कैंसिलो का हस्तक्षेप यह याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में खिलाड़ी की कीमत सिर्फ गोल के आंकड़ों से नहीं मापी जाती। चाहे वह नेमार की लंबी चोट के बाद वापसी हो या रोनाल्डो का अपनी लय पाने का प्रयास, खुद को 'साबित' करने का दबाव जनता द्वारा डाला गया है, न कि उनके साथ खेलने वाले साथियों द्वारा। जैसे-जैसे टूर्नामेंट नॉकआउट चरण की ओर बढ़ रहा है, इन दिग्गजों की आलोचनाओं को नजरअंदाज कर अपने सामूहिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता ही उनके करियर की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।