हैदराबाद मेट्रो फेज 2: फंड जुटाने के लिए दिल्ली मिशन पर सीएम रेवंत रेड्डी
हैदराबाद मेट्रो: दिल्ली में सीएम रेवंत.. मेट्रो के दूसरे चरण के लिए फंड की कवायद
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी मेट्रो विस्तार के लिए लंबित फंड और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा मंजूरियों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाले हुए हैं।
दिल्ली की सत्ता के गलियारों में इस समय तेलंगाना के मुख्यमंत्री का एक अहम दौरा चर्चा में है। रेवंत रेड्डी अपना सप्ताह एक खास और जरूरी एजेंडे के साथ राजधानी में बिता रहे हैं: हैदराबाद मेट्रो विस्तार से जुड़ी प्रशासनिक बाधाओं को दूर करना। जैसे-जैसे शहर की आबादी और विस्तार बढ़ रहा है, राज्य सरकार फेज 2 परियोजना पर निर्णायक प्रगति के लिए जोर दे रही है। 122.9 किलोमीटर के इस विशाल नेटवर्क में सात कॉरिडोर शामिल हैं और इसकी अनुमानित लागत 38,595 करोड़ रुपये है।
बातचीत का मुख्य केंद्र केंद्र सरकार के साथ 50:50 की फंडिंग साझेदारी है। हालांकि, राज्य सरकार हर स्थिति के लिए तैयार है। रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र हिचकिचाता है, तो उनका प्रशासन 100% इक्विटी मॉडल के साथ आगे बढ़ने को तैयार है, बशर्ते उन्हें आवश्यक 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' मिल जाए। 23 जून तक चलने वाला यह दौरा केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी को भेजे गए पत्रों का एक औपचारिक अनुवर्ती है, जिसमें विशेष रूप से रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ आमने-सामने की बैठक का अनुरोध किया गया है ताकि वर्तमान गतिरोध को खत्म किया जा सके।
वित्तीय बाधा
भविष्य के विस्तार से परे, वर्तमान परिचालन नेटवर्क भी कुछ समस्याओं का सामना कर रहा है। L&T से मौजूदा फेज 1 बुनियादी ढांचे को अपने कब्जे में लेने की योजना वित्तीय कारणों से अटकी हुई है। हालांकि इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) ने 15,000 करोड़ रुपये के पैकेज के तहत 13,500 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण मंजूर किया है, लेकिन फंड जारी करने की प्रक्रिया धीमी है। राज्य ने अपना हिस्सा एस्क्रो में जमा कर दिया है और अग्रिम शुल्क का भुगतान भी कर दिया है, फिर भी हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
मूल लेख और रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ये देरी केवल प्रशासनिक बाधाएं नहीं हैं; ये राजनीतिक खींचतान का मुद्दा भी बनती जा रही हैं। दिल्ली में पैरवी करने का निर्णय लेकर, राज्य सरकार गेंद केंद्र के पाले में डाल रही है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या परियोजना की गति नीतिगत मतभेदों या केवल प्रक्रियात्मक सुस्ती के कारण बाधित हो रही है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
मेट्रो का विस्तार केवल एक परिवहन परियोजना नहीं है; यह हैदराबाद के भविष्य की आर्थिक वृद्धि की रीढ़ है। जहां पहला चरण पिछली BRS सरकार के दौरान शुरू हुआ था, वहीं वर्तमान प्रशासन पर अब इसे तेजी से शहरीकरण वाली आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए विस्तार देने की जिम्मेदारी है। यहां 'बड़ी तस्वीर' सहकारी संघवाद की है। जब सार्वजनिक सेवा के लिए बनी बड़ी शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं राज्य की महत्वाकांक्षा और केंद्रीय फंडिंग की मंजूरी के बीच फंस जाती हैं, तो अंततः आम यात्री को ही ट्रैफिक जाम और उत्पादकता में कमी के रूप में इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।
चाहे केंद्र 50:50 के बंटवारे पर सहमत हो या राज्य अंततः स्वतंत्र वित्तीय मार्ग अपनाए, इसका परिणाम यह तय करेगा कि तेलंगाना में भविष्य में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को कैसे संभाला जाएगा। फिलहाल, सबकी निगाहें दिल्ली में पेश किए जा रहे दस्तावेजों पर टिकी हैं कि क्या वे आखिरकार एक तेज और बेहतर जुड़े हुए हैदराबाद के लिए रास्ता साफ कर पाएंगे।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।