वॉर्म-अप मैच में दिल टूटने वाली हार: ऋचा घोष की जादुई पारी के बावजूद इंग्लैंड से हारी भारतीय महिला टीम
IND vs ENG: 12 गेंद में चाहिए थे 38 रन, भारत ने इंग्लैंड के जबड़े से जीत छीनने की कोशिश की, लेकिन अंत में मिली हार
ऋचा घोष की तूफानी 68 रनों की पारी ने एक असंभव से दिखने वाले लक्ष्य को लगभग हासिल कर लिया था, लेकिन अंत में नाटकीय पतन के कारण भारतीय टीम टी20 वर्ल्ड कप के इस वॉर्म-अप मैच में इंग्लैंड से पांच रन पीछे रह गई।
एक रोमांचक जीत की पटकथा लिखी जा चुकी थी, लेकिन आखिरी तीन पन्ने जैसे फट गए। इंग्लैंड के 172 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय महिला टीम एक नाजुक स्थिति में थी: आखिरी 12 गेंदों पर 38 रनों की जरूरत थी। यह ऐसी स्थिति थी जहां अक्सर टीमें दबाव में बिखर जाती हैं, लेकिन ऋचा घोष के इरादे कुछ और थे। उनकी 36 गेंदों में 68 रनों की विस्फोटक पारी, जिसमें नौ चौके और दो छक्के शामिल थे, ने स्टेडियम में उम्मीद की एक नई लहर दौड़ा दी और सोशल मीडिया पर इंग्लैंड महिला बनाम भारतीय महिला का विषय ट्रेंड करने लगा।
वह लक्ष्य जो लगभग हासिल हो गया था
मैच में वापसी 19वें ओवर से शुरू हुई, जिसे इज़ी वोंग ने फेंका था। भारत ने उन छह गेंदों में 21 रन बटोरे, जिसमें घोष ने दो चौके और एक छक्का जड़ा, जबकि एस. चरानी ने भी एक महत्वपूर्ण चौका लगाया। अचानक, असंभव सा दिखने वाला लक्ष्य आसान लगने लगा: आखिरी ओवर में 17 रनों की जरूरत थी। जब चरानी ने पहली गेंद पर स्ट्राइक रोटेट की, तो मंच पूरी तरह से घोष के लिए तैयार था। उन्होंने एक चौका और एक लंबा छक्का जड़कर समीकरण को तीन गेंदों में छह रन तक ला खड़ा किया।
फिर, पतन शुरू हुआ। चौथी गेंद पर, घोष ने आगे बढ़कर कवर के ऊपर से शॉट खेलने की कोशिश की। लिन्सी स्मिथ ने उनके इरादे को भांप लिया और ऑफ-स्टंप के बाहर एक वाइड गेंद फेंकी। घोष चूक गईं और इंग्लिश विकेटकीपर ने पलक झपकते ही गिल्लियां बिखेर दीं। पांचवीं गेंद पर रेणुका सिंह ने भी आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन चार्ली डीन ने शानदार कैच लपक लिया। भारत 166 रनों पर ऑलआउट हो गया और पांच रन से मैच हार गया।
बड़ी तस्वीर
हालांकि इस ind बनाम eng वॉर्म-अप मैच का परिणाम टूर्नामेंट की अंक तालिका पर असर नहीं डालेगा, लेकिन यह भारतीय टीम के लिए एक पुरानी समस्या को उजागर करता है: शीर्ष क्रम की विफलता के बाद मध्य क्रम पर अत्यधिक निर्भरता। सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा क्रमशः केवल एक और 13 रन ही बना सकीं, और यास्तिका भाटिया व कप्तान हरमनप्रीत कौर जैसी अनुभवी खिलाड़ी भी लय हासिल करने में नाकाम रहीं, जिससे घोष पर दबाव बहुत बढ़ गया।
भारतीय प्रबंधन के लिए, यह मैच पाकिस्तान के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप के शुरुआती मुकाबले से पहले एक कड़ा सबक है। सकारात्मक पक्ष निस्संदेह ऋचा घोष का फॉर्म है; अत्यधिक दबाव में शांत रहने की उनकी क्षमता एक बड़ी ताकत है। हालांकि, शीर्ष क्रम की अस्थिरता एक ऐसी चिंता है जिसे times और अन्य navbharat आउटलेट्स ने अक्सर उठाया है। यदि भारत को इस टूर्नामेंट में आगे जाना है, तो केवल एक बल्लेबाज पर निर्भर रहना स्थायी रणनीति नहीं हो सकती। प्रतिभा मौजूद है, लेकिन पारी की शुरुआत में निरंतरता अभी भी एक बड़ी कमी बनी हुई है।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।