ईरान समझौते पर अनिश्चितता से वैश्विक बाजारों में हलचल, सोने के वायदा भाव में बड़ी गिरावट
वैश्विक संकेतों की कमजोरी और अमेरिका-ईरान समझौते पर अनिश्चितता के चलते सोने के वायदा भाव ₹3,392 गिरकर ₹1.45 लाख पर पहुंचे
राजनयिक बातचीत रुकने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण निवेशकों ने सोने की बिकवाली की, जिससे कीमतों में 2.27 प्रतिशत की गिरावट आई है।
शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के वायदा भाव में भारी गिरावट देखी गई, जहां कीमतें ₹3,392 घटकर ₹1,45,917 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुईं। यह लगातार दूसरा दिन है जब कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव और वाशिंगटन की बदलती मौद्रिक नीति जैसे कारण जिम्मेदार हैं। घरेलू बाजार इन वैश्विक संकेतों पर प्रतिक्रिया दे रहा है, जिसका असर चेन्नई और अन्य महानगरों में सोने की कीमतों पर भी साफ दिख रहा है।
इस बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता को लेकर जो आशावाद सप्ताह की शुरुआत में था, वह स्विट्जरलैंड में उच्च-स्तरीय वार्ता के अचानक टल जाने के बाद खत्म हो गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द करने और ईरान की प्रतिबद्धता पर सवाल उठने के बाद बाजार से 'शांति का लाभ' गायब हो गया है।
कीमतों में गिरावट केवल सोने तक सीमित नहीं है। चांदी के वायदा भाव में और भी बड़ी गिरावट देखी गई है, जो ₹8,766 गिरकर ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं। लेमन मार्केट्स डेस्क के गौरव गर्ग का कहना है कि अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना कीमती धातुओं के लिए बड़ी बाधा है। जैसे-जैसे डॉलर मजबूत होता है, सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियां वैश्विक निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाती हैं, जिससे बिकवाली तेज हो जाती है।
फेडरल रिजर्व का असर
पश्चिम एशिया में राजनयिक गतिरोध के अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व भी कीमतों पर दबाव बना रहा है। बुधवार की नीतिगत बैठक में उन लोगों को कोई राहत नहीं मिली जो रणनीति में बदलाव की उम्मीद कर रहे थे; नीति निर्माताओं ने संकेत दिया है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। सख्त मौद्रिक नीति के इस रुख ने ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड को बढ़ावा दिया है, जिससे पूंजी सोने से निकलकर ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर जा रही है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह अस्थिरता मौजूदा बाजार मूल्यांकनों की अनिश्चितता को दर्शाती है। सोना लंबे समय से अस्थिरता के खिलाफ एक सुरक्षा कवच रहा है, लेकिन वर्तमान में यह भू-राजनीतिक जोखिम और व्यापक आर्थिक वास्तविकता के बीच फंसा हुआ है। लेबनान में नए हमलों के कारण तनाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है, लेकिन बाजार फिलहाल फेडरल रिजर्व की 'उच्च ब्याज दर' वाली नीति को अधिक महत्व दे रहा है। आम निवेशक के लिए इसका मतलब यह है कि बुलियन की कीमतें पश्चिम एशिया के संघर्ष और फेडरल रिजर्व के हर संकेत के प्रति संवेदनशील रहेंगी, जिससे आने वाले हफ्तों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।