राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने पर जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दिया
जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दिया
अल्पसंख्यक मामलों, मत्स्य पालन और पशुपालन राज्य मंत्री के पद से हटना उनके राजनीतिक सफर में एक बदलाव का संकेत है, क्योंकि वे अब संगठन की जिम्मेदारियों को संभालने की तैयारी कर रहे हैं।
साउथ ब्लॉक के गलियारों में इस सप्ताह एक शांत बदलाव देखने को मिला, जब जॉर्ज कुरियन ने आधिकारिक तौर पर अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया उनका यह इस्तीफा राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के तुरंत बाद आया है। कैबिनेट की गतिविधियों पर नजर रखने वालों के लिए यह प्रस्थान पूरी तरह से अप्रत्याशित नहीं था, क्योंकि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें उच्च सदन के लिए फिर से नामांकित नहीं किया था।
9 जून, 2024 को तीसरी मोदी सरकार के हिस्से के रूप में कार्यभार संभालने के बाद से, कुरियन अल्पसंख्यक मामलों, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे विविध विभागों को संभाल रहे थे। कैबिनेट में उनका प्रवेश केरल में पार्टी की पहुंच को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा गया था, एक ऐसा राज्य जहां भाजपा आक्रामक रूप से अपने चुनावी आधार को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
मंत्रालय में अपने कार्यकाल से पहले, कुरियन भाजपा की केरल संगठनात्मक मशीनरी का एक जाना-माना चेहरा थे। राज्य उपाध्यक्ष, कोर कमेटी के सदस्य और राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य के रूप में कार्य कर चुके कुरियन का करियर पार्टी के जमीनी प्रयासों से गहराई से जुड़ा रहा है। उनके सफर से परिचित लोग पूर्व केंद्रीय मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में उनके शुरुआती दिनों को याद करते हैं, एक ऐसी भूमिका जिसने उन्हें केंद्र सरकार के कामकाज की बुनियादी समझ प्रदान की थी।
आगे की राह
हालांकि आधिकारिक तौर पर यह कहा गया है कि कुरियन संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लौटेंगे, लेकिन उनके अगले असाइनमेंट की प्रकृति अभी भी अटकलों का विषय है। सूत्रों का संकेत है कि उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के सामने केरल पर अपना ध्यान केंद्रित करने की स्पष्ट इच्छा व्यक्त की थी। क्या यह राज्य इकाई के भीतर किसी भूमिका में तब्दील होगा या दक्षिणी क्षेत्र पर केंद्रित कोई व्यापक राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी होगी, यह अभी पार्टी आलाकमान द्वारा स्पष्ट किया जाना बाकी है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है
यह इस्तीफा कैबिनेट फेरबदल और नेतृत्व प्रबंधन के प्रति भाजपा के दृष्टिकोण में एक विशिष्ट पैटर्न को उजागर करता है। पार्टी अक्सर विधायी भूमिकाओं और सक्रिय फील्ड संगठन के बीच एक सेतु के रूप में मंत्री पद के कार्यकाल का उपयोग करती है। कुरियन के लिए, जिन्होंने अतीत में कांजीरपल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, यह बदलाव बताता है कि पार्टी केरल में अपनी नेतृत्व रणनीति को फिर से तैयार कर रही है।
एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता को कैबिनेट से वापस बुलाकर, भाजपा संभवतः राज्य के जटिल राजनीतिक परिदृश्य को संभालने के लिए जमीन पर मजबूत और अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता का संकेत दे रही है। जैसे ही वे मंत्रालय के हाई-प्रोफाइल माहौल से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में वापस आते हैं, यह कदम याद दिलाता है कि पार्टी में कई लोगों के लिए असली काम अक्सर मंत्री पद की सुर्खियों से दूर होता है।
इस घटनाक्रम को विभिन्न समाचार पोर्टलों और सोशल मीडिया सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से रिपोर्ट किया गया है, जो उनके अगले राजनीतिक कदम में लोगों की रुचि को दर्शाता है। जैसे-जैसे स्थिति स्पष्ट होगी, अब ध्यान इस बात पर केंद्रित होगा कि उनके द्वारा छोड़े गए विभागों को कौन संभालता है और उनका यह बदलाव उनके गृह राज्य में पार्टी के मनोबल को कैसे प्रभावित करता है।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।