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वीगन से एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट तक: मिरांडा केर ने कैसे सुधारी अपनी गट हेल्थ

विक्टोरिया सीक्रेट मॉडल मिरांडा केर ने कैसे एक गंभीर इंफ्लेमेटरी बाउल कंडीशन को मात दी

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्कप्रकाशित 7 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
वीगन से एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट तक: मिरांडा केर ने कैसे सुधारी अपनी गट हेल्थ
वीगन से एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट तक: मिरांडा केर ने कैसे सुधारी अपनी गट हेल्थ

विक्टोरिया सीक्रेट की आइकन मिरांडा केर ने साझा किया कि कैसे व्यक्तिगत आहार में बदलाव और प्राकृतिक उपचारों ने उन्हें इंफ्लेमेटरी बाउल कंडीशन से उबरने में मदद की।

वेलनेस की राह हर किसी के लिए एक जैसी नहीं होती, और मॉडल मिरांडा केर ने हाल ही में इस सच्चाई को उजागर किया है। अमेरिकी चिकित्सक डॉ. मार्क हिमन के साथ एक बातचीत में, केर ने बताया कि कैसे उन्होंने अपनी लगातार बनी रहने वाली इंफ्लेमेटरी बाउल कंडीशन को ठीक करने के लिए पूरी तरह से वीगन लाइफस्टाइल को छोड़ दिया। ब्लड टेस्ट के जरिए ट्रिगर्स की पहचान करने पर उन्हें पता चला कि उनका शरीर ग्लूटेन, डेयरी और अंडों के प्रति नकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा था—जो चीजें वह पहले नियमित रूप से लेती थीं।

शरीर की बात सुनना

केर का हीलिंग के प्रति नजरिया इस बात पर जोर देता है कि जब शरीर तनाव में होता है, तो वह अक्सर संकेत देता है। भारी-भरकम दवाओं पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, उन्होंने अपने वातावरण और खान-पान में बदलाव करने का विकल्प चुना। उनका वर्तमान रूटीन एंटी-इंफ्लेमेटरी फ्रेमवर्क पर केंद्रित है, जिसमें ट्रिगर फूड्स को पूरी तरह से हटाना और सीड ऑयल्स (बीजों के तेल) से परहेज करना शामिल है। यह बदलाव वेलनेस के क्षेत्र में बढ़ते चलन को दर्शाता है: 'वीगन' जैसे लेबल्स के बजाय व्यक्तिगत पोषण संबंधी जरूरतों पर ध्यान देना।

केर ने चर्चा के दौरान कहा, "मैं पूरी तरह से वीगन थी, लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि यह मेरे लिए सही नहीं है।" उनकी रिकवरी में मेडिटेशन, हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी और प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स के सेवन ने मदद की है। नारियल, केफिर, सॉकरक्राट और हल्दी (विशेष रूप से इसका सक्रिय तत्व, करक्यूमिन) अब उनके दैनिक रूटीन का मुख्य हिस्सा बन गए हैं।

डाइटरी लेबल्स पर विशेषज्ञों की राय

हालांकि मॉडल का अनुभव इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी चर्चा में है, लेकिन पोषण विशेषज्ञ किसी भी एक डाइट को 'रामबाण' मानने के खिलाफ चेतावनी देते हैं। नोएडा के मदरहुड हॉस्पिटल्स की कंसल्टेंट डायटीशियन मनीषा चौधरी बताती हैं कि वीगन डाइट का मांसाहारी डाइट से बेहतर होना अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। चौधरी के अनुसार, एक अच्छी तरह से नियोजित और संतुलित आहार—चाहे उसमें एनिमल प्रोडक्ट्स हों या वह पूरी तरह से प्लांट-बेस्ड हो—तभी प्रभावी होता है जब उसमें लीन प्रोटीन, साबुत अनाज और विविध फल-सब्जियां शामिल हों।

विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लेना बहुत जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं या जिनमें पोषक तत्वों की कमी है। श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट सी वी ऐश्वर्या का कहना है कि हालांकि केर का एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स पर ध्यान देना क्लिनिकल रणनीतियों के अनुरूप है, लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरतें अलग होती हैं। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और बच्चों को किसी भी बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए ताकि पोषण की कमी न हो।

अंततः, केर की कहानी हमें याद दिलाती है कि स्वास्थ्य एक गतिशील प्रक्रिया है। डायग्नोस्टिक टेस्टिंग और जीवनशैली में बदलाव के जरिए उन्होंने अपनी स्थिति को बेहतर बनाया। जो लोग ऐसा करना चाहते हैं, उनके लिए सलाह स्पष्ट है: किसी प्रोफेशनल से परामर्श लें, अपने शरीर के संकेतों को सुनें और लेबल्स के पीछे भागने के बजाय पोषक तत्वों से भरपूर संपूर्ण आहार को प्राथमिकता दें।

द्वारा पॉलिटिकलपीडिया संपादकीय डेस्क
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