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टोंक से डबलिन तक: जय मूंदड़ा की रफ्तार ने कैसे दिलाई आयरलैंड की टीम में जगह, अब भारत के खिलाफ करेंगे डेब्यू

टोंक से डबलिन तक का सफर, आयरलैंड T20 टीम में चुने गए जय मूंदड़ा अब भारत के खिलाफ करेंगे डेब्यू

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 26 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
टोंक से डबलिन तक: जय मूंदड़ा की रफ्तार ने कैसे दिलाई आयरलैंड की टीम में जगह
टोंक से डबलिन तक: जय मूंदड़ा की रफ्तार ने कैसे दिलाई आयरलैंड की टीम में जगह

राजस्थान का एक एम.टेक छात्र दो देशों के सपनों को एक साथ जी रहा है, क्योंकि वह आगामी अंतरराष्ट्रीय T20 सीरीज में अपने ही देश भारत का सामना करने की तैयारी कर रहा है।

राजस्थान के टोंक के धूल भरे क्रिकेट मैदान डबलिन की शानदार पिचों से बहुत दूर लगते हैं, लेकिन 28 वर्षीय जय मूंदड़ा के लिए ये दोनों जगहें एक अनोखे तरीके से जुड़ गई हैं। मूंदड़ा, जो 2021 में एम.टेक की डिग्री हासिल करने के लिए आयरलैंड गए थे, उन्हें आयरिश T20 टीम में शामिल किया गया है। यदि वह 26 और 28 जून को होने वाले मैचों के लिए अंतिम एकादश में जगह बनाते हैं, तो वह उसी भारत के खिलाफ मैदान पर खड़े होंगे, जहां उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखी थीं।

संघर्ष की एक यात्रा

मूंदड़ा का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक का सफर आसान नहीं था। राजस्थान की अंडर-14 टीम के पूर्व खिलाड़ी रहे जय में बचपन से ही खेल के प्रति प्रतिभा थी, हालांकि बेंगलुरु में उच्च शिक्षा के दबाव के कारण उनकी खेल की आकांक्षाएं पीछे छूट गई थीं। आयरलैंड जाने के बाद ही उनकी खेल के प्रति दीवानगी फिर से जागी। प्रतिष्ठित लेइनस्टर क्रिकेट क्लब से जुड़ने के बाद, वह तेजी से एक छात्र से एक महत्वपूर्ण ऑलराउंडर के रूप में उभरे। 2023 का सीजन उनके लिए शानदार रहा, जहां उन्होंने अपनी टीम को आयरिश सीनियर कप जिताने में अहम भूमिका निभाई।

उनके चयन की खबर जब टोंक में उनके परिवार को मिली, तो वे हैरान और भावुक हो गए। उनकी मां विद्या देवी और बहन मानसी का कहना है कि जय के करियर को एक दर्शक की तरह देखने से लेकर अंतरराष्ट्रीय टीम की सूची में उनका नाम देखना किसी सपने जैसा है। परिवार के लिए यह उपलब्धि मिली-जुली भावनाओं वाली है; यह जय के पिता गिर्राज मूंदड़ा के निधन के दो साल बाद आई है, जो निश्चित रूप से उनके सबसे बड़े समर्थक होते।

ऑलराउंडर की खूबी

आयरिश चयनकर्ताओं को न केवल उनका जज्बा, बल्कि मैदान पर उनकी उपयोगिता ने प्रभावित किया। मूंदड़ा एक बाएं हाथ के तेज गेंदबाज हैं जो 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर सकते हैं—यह गति घरेलू स्तर पर काफी प्रभावशाली है—साथ ही वह निचले क्रम में बल्लेबाजी में भी योगदान देने में सक्षम हैं। राजस्थान के टेनिस-बॉल क्रिकेट सर्किट से आयरलैंड के हाई-इंटेंसिटी लेदर-बॉल क्रिकेट तक का उनका सफर एक दुर्लभ अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है, जिसे बहुत कम खिलाड़ी अपनी पढ़ाई के साथ संतुलित कर पाते हैं।

यह क्यों मायने रखता है

मूंदड़ा जैसे खिलाड़ियों का उदय, जिस पर हाल ही में ind vs irl चर्चाओं में काफी बात हो रही है, वैश्विक क्रिकेट में बदलते रुझान को दर्शाता है। हम प्रतिभा का एक "वैश्वीकरण" देख रहे हैं, जहां भारतीय खिलाड़ी, जिन्हें अक्सर BCCI के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू ढांचे में पर्याप्त मौके नहीं मिलते, वे उभरते हुए क्रिकेट देशों में सफलता पा रहे हैं। यह राजस्थान के एक छोटे से शहर के लड़के की व्यक्तिगत जीत ही नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि आधुनिक प्रवास और खेल का विस्तार कैसे व्यक्तियों को शीर्ष तक पहुंचने के पारंपरिक और कठोर रास्तों को दरकिनार करने की अनुमति दे रहा है। हालांकि यह व्यक्तिगत दृढ़ता की एक original कहानी है, लेकिन यह इस बात का भी उदाहरण है कि भारतीय क्रिकेट की प्रतिभा का पूल अब इतना गहरा है कि यह सक्रिय रूप से अन्य देशों की टीमों को भी मजबूत कर रहा है।

अपनी प्रेरणा के primary source के रूप में, मूंदड़ा एम.टेक की पढ़ाई के दौरान बनाए गए अनुशासन को श्रेय देते हैं। जैसे-जैसे वह आयरलैंड का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हो रहे हैं, वह दो क्रिकेट संस्कृतियों के बीच एक सेतु बन गए हैं, जो यह साबित करता है कि आधुनिक खिलाड़ी के लिए "घरेलू" टीम वही है जहां उसे प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलता है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।