खिलौनों के बक्से से डिजिटल जाल तक: 'Toy Story 5' में जेसी क्यों बनी है मुख्य किरदार
'Toy Story 5' रिव्यू: जोन क्यूसैक की काउगर्ल जेसी ने संभाली कमान
पहली फिल्म के 31 साल बाद, पिक्सर का यह नया प्रयास आधुनिक बचपन की डिजिटल चमक के सामने क्लासिक खिलौनों को खड़ा करता है।
आजकल भारतीय घरों में एक बच्चा टैबलेट की स्क्रीन में खोया हुआ है और उसके कमरे में खिलौने धूल फांक रहे हैं, यह दृश्य बहुत आम हो गया है। यही वह तनाव है जिस पर Toy Story 5 टिकी है। यह फिल्म तब आई है जब कई लोगों को लगा था कि यह फ्रेंचाइजी अपनी रचनात्मकता खो चुकी है, लेकिन इसने अपनी प्रासंगिकता साबित कर दी है। सीरीज के अनुभवी निर्देशक एंड्रयू स्टैंटन द्वारा निर्देशित यह सीक्वल वुडी और बज़ की परिचित जोड़ी से ध्यान हटाकर, कहानी का पूरा भार जोन क्यूसैक की काउगर्ल जेसी के कंधों पर डाल देता है।
डिजिटल युग की एक नई नायिका
लंबे समय से प्रशंसकों के लिए, Toy Story फ्रेंचाइजी हमेशा हमारे खिलौनों के गुप्त और भावनात्मक जीवन के बारे में रही है। इस नई कड़ी में, दांव काफी आधुनिक हैं। बोनी नाम की एक आठ साल की बच्ची की भरोसेमंद साथी जेसी अब एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है: बिग टेक द्वारा बच्चों का पूरा ध्यान खींच लेना। जब जेसी बोनी को बाहर खेलने के लिए प्रेरित करने की कोशिश करती है, तो उसे एक कठोर वास्तविकता का पता चलता है। स्थानीय बच्चों को कल्पना की दुनिया में कोई दिलचस्पी नहीं है; वे अपने डिवाइस से इतने चिपके हुए हैं कि उन्हें यह भी नहीं पता चलता कि एक सजीव काउगर्ल उनके बीच की सामाजिक दूरी को पाटने की कोशिश कर रही है।
यह अहसास खिलौनों को एक अस्तित्वगत संकट में डाल देता है। फिल्म में एक परेशान करने वाला सबप्लॉट है, जिसमें उन छोड़े गए खिलौनों को दिखाया गया है जिन्होंने खुद को कचरे के ढेर में रहने के लिए मजबूर मान लिया है। वे जेसी को चेतावनी देते हैं कि "खिलौनों का युग खत्म हो गया है।" एक पारिवारिक फिल्म के लिए यह एक आश्चर्यजनक रूप से गहरा मोड़ है, जिसने आलोचकों को फिल्म के भावनात्मक बोझ के बारे में चेतावनी देने के लिए प्रेरित किया है। फिर भी, फिल्म इस उदासी को उस ट्रेडमार्क बुद्धिमत्ता और रचनात्मकता के साथ संतुलित करती है जिसने पिक्सर को घर-घर में मशहूर बना दिया है।
नॉस्टेल्जिया का कारोबार
इस प्रोजेक्ट के लिए जोन क्यूसैक को वापस लाना एक सोची-समझी रणनीति है। उनका अभिनय, जिसे साहसी भावना और कोमल संवेदनशीलता का मिश्रण बताया गया है, उस कहानी को दिल की धड़कन देता है जो आसानी से सिर्फ पैसे कमाने का जरिया लग सकती थी। व्यावसायिक दृष्टिकोण से, स्टूडियो बहु-पीढ़ीगत अपील पर दांव लगा रहा है। उन उपकरणों को संबोधित करके जो उनके अपने Toy Story 5 toys के लिए बाजार में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, पिक्सर मनोरंजन के इस संतृप्त बाजार में अपनी प्रासंगिकता पर एक मेटा-कमेंट्री कर रहा है।
बड़ी तस्वीर
यह मायने क्यों रखता है? बॉक्स ऑफिस के अनुमानों से परे, Toy Story 5 यह दर्शाता है कि पुरानी बौद्धिक संपदा (IP) को कैसे संभाला जाता है। अधिकांश फ्रेंचाइजी अपने इतिहास के बोझ तले दब जाती हैं, लेकिन पिक्सर इस फिल्म का उपयोग एक नई दिशा देने के लिए कर रहा है। शारीरिक खेल और डिजिटल व्याकुलता के बीच के संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करके, स्टूडियो सिर्फ एक फिल्म नहीं बेच रहा है; यह बचपन की कल्पना के क्षरण के बारे में एक सांस्कृतिक बहस में शामिल हो रहा है। यह याद दिलाता है कि हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के युग में भी, एक अच्छी तरह से सुनाई गई कहानी का आकर्षण—और उसे दर्शाने वाले खिलौने—अभी भी अपनी अहमियत रखते हैं। क्या दर्शक अपने टैबलेट छोड़कर सिनेमाघर जाने के लिए तैयार हैं, यह स्टूडियो के लिए अंतिम परीक्षा होगी।
रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।