Aldi में अचार के डिब्बे जमाने से वर्ल्ड कप के मंच तक: तिजानी रेजेंडर्स की अनोखी कामयाबी
वर्ल्ड कप का यह सितारा 19 साल की उम्र में Aldi में काम करता था और एक बार तो बफ़ेलो (BUFFALO) की वजह से उसका ड्रीम ट्रांसफर लगभग रद्द हो गया था
वर्ल्ड कप की चकाचौंध से पहले, मैनचेस्टर सिटी का यह भविष्य का सितारा अपनी किशोरावस्था के दिन दुकान के फर्श पर बिताता था।
एलीट फुटबॉल की इस हाई-प्रोफाइल दुनिया में, जहां अकादमी के खिलाड़ियों को अक्सर सुख-सुविधाओं के बीच तैयार किया जाता है, तिजानी रेजेंडर्स की कहानी किसी पुराने दौर की याद दिलाती है। मैनचेस्टर सिटी और नीदरलैंड्स के लिए मिडफील्ड का इंजन बनने से बहुत पहले, 27 वर्षीय यह खिलाड़ी अपने गृहनगर ज्वोले के एक स्थानीय Aldi स्टोर में अनिच्छुक कर्मचारी था। जब उनके साथी खिलाड़ी केवल टैक्टिकल ड्रिल्स पर ध्यान दे रहे थे, रेजेंडर्स PEC ज्वोले में ट्रेनिंग और सुपरमार्केट की उबाऊ शिफ्ट के बीच संतुलन बना रहे थे।
यह रास्ता उन्होंने खुद नहीं चुना था। द प्लेयर्स ट्रिब्यून में अपने अनुभव को याद करते हुए, रेजेंडर्स स्वीकार करते हैं कि उनकी मां ही उनके इस काम के पीछे की असली वजह थीं। उन्होंने स्टोर से एक आवेदन पत्र निकाला, उसे भरा और उन्हें मैनेजर के पास ले गईं। उस समय भी, रेजेंडर्स को उम्मीद थी कि इंटरव्यू के दौरान उनकी बेरुखी उन्हें इस नौकरी से दूर रखेगी। लेकिन स्टोर को कर्मचारियों की इतनी सख्त जरूरत थी कि उन्हें अगले ही दिन पहली शिफ्ट के लिए बुला लिया गया।
विनम्रता का सबक
स्कूल के बाद हर दोपहर चार घंटे तक, यह भविष्य का वर्ल्ड कप स्टार अपने फुटबॉल बूट्स की जगह कैशियर का एप्रन पहनता था। उनकी ड्यूटी बिल्कुल भी ग्लैमरस नहीं थी; वे अपनी शामें अचार के भारी जार को स्टोर रूम से शेल्फ तक ले जाने में बिताते थे, जो खेल के शीर्ष स्तर पर जरूरी टैक्टिकल सटीकता से बिल्कुल अलग था। पेशेवर फुटबॉल का सपना देखने वाले एक किशोर के लिए, डच सुपरमार्केट की ट्यूबलाइट्स उन फ्लडलाइट वाले मैदानों से मीलों दूर महसूस होती होंगी, जहां वे आज खेलते हैं।
भले ही बाकी सुर्खियां पेशेवर खेलों के उतार-चढ़ाव पर केंद्रित हों—जैसे बफ़ेलो (BUFFALO) से जुड़े अजीबोगरीब ट्रांसफर किस्से या मैनेजरों के बार-बार बदलने की खबरें—रेजेंडर्स की कहानी पेशेवर स्तर तक पहुंचने के लिए जरूरी दृढ़ संकल्प की याद दिलाती है। यह उस 'सामान्य' जीवन की एक दुर्लभ झलक है, जो करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट और वैश्विक लोकप्रियता से पहले मौजूद होता है।
बड़ी तस्वीर
यह मायने क्यों रखता है? 'संघर्षरत एथलीट' की कहानी स्पोर्ट्स जर्नलिज्म का एक अहम हिस्सा है, लेकिन रेजेंडर्स की कहानी फुटबॉल के विकास में बदलती हकीकत को उजागर करती है। जैसे-जैसे अकादमी के टैलेंट और आम जनता के बीच की खाई बढ़ रही है, उन खिलाड़ियों की कहानियां ज्यादा असरदार लगती हैं जिन्होंने वर्कफोर्स में समय बिताया है। यह उस धारणा को चुनौती देता है कि हर टॉप-टियर खिलाड़ी केवल एक फैक्ट्री-लाइन सिस्टम की उपज है।
इसके अलावा, जैसे-जैसे खेल जगत की नजरें 2026 वर्ल्ड कप पर टिकी हैं, व्यक्तिगत यात्राओं पर ध्यान और भी गहरा हो गया है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी जैसे दिग्गजों के आखिरी वर्ल्ड कप की संभावनाओं के बीच, रेजेंडर्स जैसे खिलाड़ियों का उभरना एक नई उम्मीद जगाता है। यह साबित करता है कि शीर्ष तक पहुंचने का रास्ता सीधा नहीं होता, बल्कि अक्सर सबसे साधारण जगहों से होकर गुजरता है।
प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।