आयातक से निर्यातक तक: भारत के 1.78 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उछाल का विश्लेषण
तेजस, ब्रह्मोस, अरिहंत, अग्नि-V: भारत के 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड रक्षा उछाल के भीतर की कहानी
स्वदेशी हार्डवेयर पर एक नज़र—तेजस जेट से लेकर अरिहंत पनडुब्बी तक—जो भारत की रणनीतिक स्वायत्तता में एक ऐतिहासिक बदलाव ला रहे हैं।
वर्ष 1962 भारत के सैन्य इतिहास का एक सबक भरा अध्याय है, जब अग्रिम पंक्ति के सैनिकों को गोला-बारूद की कमी का सामना करना पड़ा था, जिसने बाहरी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर रहने के खतरों को उजागर किया था। 2026 तक आते-आते यह कहानी पूरी तरह बदल चुकी है। भारत ने रक्षा उत्पादन में 1.78 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बनाया है, जो महज पांच वर्षों में दोगुना और 2013-14 के मुकाबले चार गुना हो गया है।
यह केवल घरेलू असेंबली के बारे में नहीं है; यह देश के रणनीतिक रुख में एक बुनियादी बदलाव है। निर्यात का आंकड़ा, जो अब 38,424 करोड़ रुपये के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है, एक ऐसे देश की कहानी कहता है जो अब उन देशों को उच्च तकनीक वाले हथियार बेच रहा है जो कभी उसके मुख्य आपूर्तिकर्ता हुआ करते थे। इस परिदृश्य में, निजी क्षेत्र की भागीदारी में भारी उछाल आया है, जिसने रिकॉर्ड 42,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, क्योंकि रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र अब पारंपरिक सरकारी सुविधाओं से कहीं आगे निकल गया है।
इस उछाल को परिभाषित करने वाला हार्डवेयर
इस घरेलू उछाल की ताकत प्लेटफार्मों के विविध पोर्टफोलियो में निहित है। स्वदेशी तेजस फाइटर जेट आधुनिक हवाई युद्ध क्षमताओं का चेहरा बन गया है, जबकि ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम देश की मारक और सुरक्षात्मक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहे हैं।
शायद सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि INS अरिहंत के साथ परमाणु त्रय (nuclear triad) का पूरा होना है, जिसने भारत को विश्वसनीय 'सेकंड-स्ट्राइक' क्षमता दी है। जब इसे अग्नि-V की MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक और भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत के साथ जोड़ा जाता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि ध्यान अब केवल हार्डवेयर खरीदने से हटकर जटिल, मल्टी-डोमेन सैन्य इंजीनियरिंग में महारत हासिल करने पर केंद्रित हो गया है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह बदलाव केवल बैलेंस शीट के आंकड़ों से कहीं अधिक है। दशकों तक, विदेशी प्लेटफार्मों पर भारत की निर्भरता का मतलब था कि उसकी रणनीतिक गतिशीलता अक्सर आपूर्तिकर्ता देशों की भू-राजनीतिक इच्छाओं से बंधी होती थी। हाइपरसोनिक तकनीक में महारत हासिल करके और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाकर, नई दिल्ली प्रभावी रूप से अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को बाहरी आपूर्ति झटकों से सुरक्षित कर रही है।
शुद्ध आयातक से निर्यातक बनने का यह संक्रमण भारत को अधिक राजनयिक लाभ भी देता है। जैसे-जैसे वैश्विक व्यवस्था बदल रही है—जिसका प्रमाण मध्य पूर्व में चल रहे बदलाव और प्रमुख शक्तियों के बीच विकसित होती गतिशीलता है—एक मजबूत, आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करने के लिए आवश्यक आत्मविश्वास प्रदान करता है। चाहे वह LRLACM क्रूज मिसाइल के माध्यम से क्षेत्रीय संतुलन बदलना हो या निजी खिलाड़ियों को रक्षा-औद्योगिक आधार के केंद्र में लाना हो, भारत व्यवस्थित रूप से एक "किले" जैसी अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा है।
आगे की चुनौती इस गति को बनाए रखने की है। हालांकि रिकॉर्ड आंकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन दीर्घकालिक चुनौती वैश्विक व्यापार की जटिलताओं, बजट में कसावट और आधुनिक युद्ध की निरंतर बदलती प्रकृति के बीच इस गति को बनाए रखने में निहित है।
अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।