Politicalpedia
शिक्षा और नौकरी

ChatGPT के उपभोक्ता से निर्माता तक: तमिलनाडु के 5,000 सरकारी स्कूलों के लिए नई पहल

तमिलनाडु के 5,000 स्कूलों में एआई कोडिंग सिखाने की तैयारी - मंत्री राजमोहन

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 12 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
चैटजीपीटी के उपभोक्ता से निर्माता तक: तमिलनाडु के 5,000 सरकारी स्कूलों के लिए विजन
चैटजीपीटी के उपभोक्ता से निर्माता तक: तमिलनाडु के 5,000 सरकारी स्कूलों के लिए विजन

मंत्री राजमोहन ने राज्य के सरकारी स्कूलों को टेक-इन्क्यूबेशन हब में बदलने का रोडमैप तैयार किया है, ताकि रटने की प्रणाली को छोड़कर तर्क और नवाचार पर आधारित भविष्य का निर्माण किया जा सके।

डिजिटल युग के लिए सरकारी संस्थानों को तैयार करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाते हुए, तमिलनाडु सरकार ने घोषणा की है कि जल्द ही 5,000 स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कोडिंग की शिक्षा दी जाएगी। इस बदलाव के लिए बाहरी संस्थाओं पर निर्भर रहने के बजाय, शिक्षा विभाग 'ट्रेन-द-ट्रेनर' मॉडल के जरिए अपने मौजूदा स्टाफ को प्रशिक्षित करेगा। इसका लक्ष्य स्पष्ट है: छात्रों को ChatGPT या Google Gemini जैसे टूल्स के निष्क्रिय उपयोगकर्ता बनने से ऊपर उठाना और स्कूल परिसरों को ऐसे जीवंत इन्क्यूबेशन केंद्रों में बदलना, जहां अगली पीढ़ी के टेक-क्रिएटर्स तैयार हो सकें।

कक्षा से परे: एंबेसडर और बुनियादी ढांचा

यह रणनीति केवल कोडिंग के बारे में नहीं है, बल्कि समुदाय के बारे में भी है। विभाग एक ऐसी पहल शुरू कर रहा है जिसके तहत सफल पूर्व छात्रों को स्कूल एंबेसडर के रूप में वापस लाया जाएगा। ये लोग, जो कभी उन्हीं गलियारों से गुजरे थे, अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा करेंगे ताकि वर्तमान छात्रों को प्रेरित किया जा सके। साथ ही, सरकार स्कूल के बुनियादी ढांचे के लिए 'निवारक रखरखाव' (preventative maintenance) मॉडल को प्राथमिकता दे रही है, जिसमें स्वच्छता सुविधाओं से लेकर कक्षाओं तक के रखरखाव पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि भौतिक वातावरण सीखने की प्रक्रिया में बाधा न बने।

तार्किकता पर जोर

कोट्टुरपुरम में मंत्री राजमोहन ने अपने हालिया संबोधन में स्पष्ट किया कि राज्य की शिक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण उसकी सामाजिक विचारधारा से अलग नहीं है। स्कूलों को पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक क्षेत्र बने रहना चाहिए। निर्देश स्पष्ट है: शैक्षणिक सीमाओं के भीतर धार्मिक या जाति-आधारित पहचान के लिए कोई जगह नहीं है। इसके बजाय, ध्यान पूरी तरह से सामाजिक न्याय, तर्कवाद और छात्रों के बौद्धिक विकास पर है। प्रशासन अंधविश्वास के किसी भी प्रभाव को खत्म करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, और ऐसे पाठ्यक्रम व संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है जो आत्मविश्वास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह नीतिगत बदलाव राज्य के प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र और तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य के बीच की खाई को पाटने का प्रयास है। नए विशेषज्ञों को नियुक्त करने के बजाय मौजूदा शिक्षकों पर ध्यान केंद्रित करके, सरकार अपने शिक्षकों के अनुभव और समर्पण पर दांव लगा रही है। हालांकि कई माता-पिता तकनीकी लाभ के लिए निजी स्कूलों की ओर रुख करते हैं, लेकिन यह कदम उच्च-स्तरीय डिजिटल कौशल तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने की राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यदि यह सफल होता है, तो यह पहल तमिलनाडु में सार्वजनिक शिक्षा के प्रति धारणा को मौलिक रूप से बदल सकती है, यह साबित करते हुए कि हाई-टेक दक्षता केवल अमीरों के लिए विलासिता नहीं, बल्कि आधुनिक नागरिकता का एक मुख्य हिस्सा है।

बड़ी तस्वीर

इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता निरंतरता पर निर्भर करती है। सरकारी स्कूल के छात्रों के दैनिक जीवन में उच्च-स्तरीय कोडिंग को एकीकृत करना एक लंबी दौड़ है। मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समावेश पर जोर यह दर्शाता है कि सरकार केवल परीक्षा के अंकों के बजाय 'संपूर्ण छात्र' के विकास पर ध्यान दे रही है। जैसे-जैसे ये 5,000 स्कूल अपना बदलाव शुरू करेंगे, असली परीक्षा यह होगी कि क्या वे नौकरशाही की सुस्ती के बिना इस गति को बनाए रख सकते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कक्षा एक ऐसी जगह बनी रहे जहां क्षमता को निखारा जाए, न कि केवल प्रबंधित किया जाए।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।