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अमृतसर से दिल्ली तक: NEET और CBSE पेपर लीक को लेकर बढ़ता आक्रोश

'छात्र या असफल मंत्री किसी एक को चुनें PM', धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर बोले अभिजीत दीपके

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 15 जून 2026· 3 मिनट पढ़ें
अमृतसर से दिल्ली तक: NEET और CBSE पेपर लीक को लेकर बढ़ता आक्रोश
अमृतसर से दिल्ली तक: NEET और CBSE पेपर लीक को लेकर बढ़ता आक्रोश

जैसे-जैसे 'कॉकरोच जनता पार्टी' पूरे भारत में युवाओं को लामबंद कर रही है, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज होती जा रही है।

बीते शनिवार को अमृतसर के गोल्डन गेट पर माहौल शहर की आम हलचल से कहीं ज्यादा तनावपूर्ण था। सैकड़ों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले जमा हुए। यह उस आंदोलन का एक स्पष्ट विस्तार है जो दिल्ली, पुणे और लखनऊ से होकर अब अमृतसर तक पहुंच चुका है। इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में एक ही मांग है: NEET और CBSE परीक्षाओं को लेकर मचे लगातार हंगामे के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भीड़ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया: अब समय आ गया है कि वे लाखों छात्रों के भविष्य और एक "असफल" मंत्री के राजनीतिक कार्यकाल में से किसी एक को चुनें। दीपके, जो हाल ही में इस अभियान का नेतृत्व करने के लिए अमेरिका से लौटे हैं, ने इस आंदोलन को व्यवस्थागत उदासीनता के खिलाफ लड़ाई के रूप में पेश किया है। उनका तर्क है कि सरकार ने छात्रों की शिकायतों को नजरअंदाज किया है, जिसके कारण बार-बार हो रहे पेपर लीक के बाद जवाबदेही तय करने के लिए राष्ट्रव्यापी दबाव बनाना जरूरी हो गया है।

राजधानी की ओर कूच

यह विरोध केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। दीपके ने घोषणा की है कि यह आंदोलन 20 जून को राष्ट्रीय राजधानी में स्थानांतरित होगा। योजना यह है कि जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक दिल्ली में "डेरा" डाला जाएगा। ऐतिहासिक किसान आंदोलन से तुलना करते हुए, जिसमें हजारों लोग सिंघु बॉर्डर पर जमा हुए थे, दीपके ने जोर देकर कहा कि भारत में किसी भी सफल राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन के लिए पंजाब की भागीदारी रीढ़ की हड्डी के समान है।

प्रदर्शनकारियों के लिए, यह अस्तित्व की लड़ाई है। मौके पर मौजूद एक प्रदर्शनकारी गुरविंदर सिंह ने कहा कि उनकी चिंताएं केवल छात्र समुदाय तक ही सीमित नहीं हैं। इस सभा में समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला, जिसमें किसान और युवा कार्यकर्ता शामिल थे, जिन्होंने शिक्षा संकट को शासन के व्यापक मुद्दों से जोड़ा, जैसे कि सिख कैदियों की दुर्दशा और स्थानीय कृषि नीति को लेकर चिंताएं।

बड़ी तस्वीर

यह महत्वपूर्ण क्यों है? इस्तीफे की तत्काल मांग से परे, CJP का अभियान प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को लेकर युवाओं और वर्तमान प्रशासनिक ढांचे के बीच बढ़ते अविश्वास को उजागर करता है। जब शैक्षणिक अखंडता से समझौता होता है, तो इसका असर परीक्षा हॉल से कहीं आगे तक जाता है, जिससे राज्य की भर्ती और उच्च शिक्षा में प्रवेश की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

इतिहास गवाह है कि जो आंदोलन शैक्षणिक निराशा और व्यापक सामाजिक मुद्दों के बीच की खाई को पाटते हैं—जैसा कि कृषि नीति बहसों में देखा गया है—वे अक्सर महत्वपूर्ण राजनीतिक गति पकड़ लेते हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक इस अल्टीमेटम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन क्षेत्रीय केंद्रों से राजधानी की ओर बढ़ते विरोध का पैटर्न बढ़ते दबाव के उस दौर का संकेत है जो आने वाले महीनों में शिक्षा नीति पर चर्चा को परिभाषित करेगा।

शोर के बीच एक टिप्पणी

डिजिटल स्पेस में, विमर्श बिखरा हुआ है। जहां समाचार प्लेटफॉर्म विविध सामग्री से भरे हुए हैं—फरवरी और मार्च के लिए पंचांग और टैरो राशिफल चार्ट से लेकर ऐतिहासिक चुनावी विश्लेषण तक—वहीं अमृतसर जैसी जगहों पर जमीनी हकीकत युवाओं के लिए एक अधिक केंद्रित और स्पष्ट प्राथमिकता का संकेत देती है। यह याद दिलाता है कि भले ही इंटरनेट प्रकाश राज जैसी सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े ट्रेंडिंग विषयों को प्राथमिकता देता हो, लेकिन छात्र लामबंदी की ऑफलाइन वास्तविकता शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता की ठोस मांगों से जुड़ी हुई है।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।