गठबंधन में खटास: राज्यसभा टिकट न मिलने पर भड़के एचडी रेवन्ना
मांड्या की 'मैडम' को भी नहीं मिला मौका: सुमालता को टिकट न मिलने पर एचडी रेवन्ना का फूटा गुस्सा!
जेडी(S) के वरिष्ठ नेता ने पार्टी के दिग्गज नेताओं और मांड्या की सुमालता अंबरीश को राज्यसभा नामांकन में दरकिनार किए जाने के बाद बीजेपी के प्रति अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर की है।
इस सप्ताह कर्नाटक का राजनीतिक माहौल तब और गरमा गया जब जेडी(S) नेता एच.डी. रेवन्ना ने अपने गठबंधन सहयोगी, बीजेपी के प्रति खुलकर असंतोष जताया। विधान परिषद चुनाव में मतदान करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, इस अनुभवी राजनेता ने तीखे शब्दों में कहा कि भगवा पार्टी ने उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा सहित कई प्रमुख हस्तियों और निर्दलीय से सहयोगी बनीं सुमालता अंबरीश को किनारे कर दिया है।
यह तनाव हाल ही में हुए राज्यसभा सीट आवंटन से उपजा है, जिससे जेडी(S) कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। सूत्रों और कन्नड़प्रभा ई-पेपर की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, यह नाराजगी केवल व्यक्तिगत नुकसान को लेकर नहीं है, बल्कि गठबंधन के भीतर परामर्श की कमी को लेकर है। रेवन्ना ने स्पष्ट रूप से कहा कि हालांकि बीजेपी नेताओं ने शुरुआत में देवेगौड़ा और सदानंद गौड़ा के नामों पर चर्चा की थी, लेकिन अंततः उन चर्चाओं को छोड़ दिया गया।
'मांड्या मैडम' वाला फैक्टर
राज्यसभा टिकट सूची से सुमालता अंबरीश का नाम बाहर होना जेडी(S) के लिए विशेष रूप से आक्रोश का कारण बना है। रेवन्ना ने गठबंधन की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें नामांकित करना जेडी(S) नेतृत्व के लिए एक स्वीकार्य समझौता होता। उन्होंने कहा, "हमें लगा था कि हमारे किसी अपने व्यक्ति पर विचार किया जा रहा है," और जोड़ा कि समन्वय की कमी ने गठबंधन सहयोगियों को हाशिए पर धकेल दिया है।
व्यापक भावना—जो अक्सर विभिन्न यूट्यूब चर्चाओं और स्थानीय राजनीतिक विमर्श में दिखाई देती है—यह है कि बीजेपी की निर्णय लेने की प्रक्रिया ऐसी हलचल पैदा कर रही है जो 2028 के विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल, रेवन्ना ने "देखो और इंतजार करो" की नीति अपनाई है, जो यह संकेत देती है कि यदि गठबंधन को आने वाले वर्षों में एकजुट रहना है, तो उन्हें इन बढ़ती समस्याओं को सुलझाना होगा।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: गठबंधन में दरार
रेवन्ना जैसे अनुभवी नेता का सार्वजनिक रूप से भड़कना जेडी(S) और बीजेपी के बीच गहरे प्रशासनिक और रणनीतिक मतभेदों का संकेत है। हालांकि गठबंधन की राजनीति में सीट साझा करना सामान्य है, लेकिन यह अहसास कि वफादारों के लिए "दरवाजे बंद किए जा रहे हैं," अस्थिरता की धारणा पैदा करता है।
बीजेपी के लिए चुनौती उस सहयोगी की उम्मीदों को प्रबंधित करने की है, जिसका वोक्कालिगा-बहुल क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रभाव है। यदि ये शिकायतें इसी तरह बनी रहीं, तो गठबंधन को भविष्य के चुनावी चक्रों में कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए आवश्यक जमीनी तालमेल खोने का जोखिम उठाना पड़ सकता है। क्या यह केवल एक अस्थायी राजनीतिक उबाल है या राज्य की सत्ता के समीकरणों में आने वाले बदलाव का संकेत, यह आने वाले घंटों और हफ्तों में देखने वाली बात होगी।
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अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।