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परीक्षा की शुचिता के लिए तकनीकी अपग्रेड: महाराष्ट्र TET 2024 की नई रणनीति

TET परीक्षा: कदाचार रोकने के लिए AI का इस्तेमाल; परीक्षा पर सीधी नजर

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 27 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
परीक्षा की शुचिता के लिए तकनीकी अपग्रेड: महाराष्ट्र TET 2024 की रणनीति
परीक्षा की शुचिता के लिए तकनीकी अपग्रेड: महाराष्ट्र TET 2024 की रणनीति

अकोला में आगामी TET परीक्षा के लिए 12,000 से अधिक उम्मीदवार तैयारी कर रहे हैं, जिसे देखते हुए राज्य शिक्षा विभाग ने कदाचार को पूरी तरह खत्म करने के लिए AI-निगरानी वाला बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है।

28 जून को होने वाली आगामी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) यह साबित करने के लिए एक लिटमस टेस्ट की तरह है कि कैसे तकनीक महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं को सुरक्षित बना सकती है। अकोला के 25 केंद्रों पर 12,596 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होने वाले हैं, ऐसे में प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। पारंपरिक परीक्षा ढांचे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-संचालित निगरानी को एकीकृत करके, अधिकारी उस भरोसे की कमी को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसने अक्सर राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित किया है।

बहुस्तरीय सुरक्षा कवच

इस TET परीक्षा के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल सामान्य तलाशी से कहीं आगे है। परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार को अनिवार्य बायोमेट्रिक सत्यापन और फेस स्कैनिंग से गुजरना होगा। मेटल डिटेक्टर लगाए जाएंगे और पहली बार, गलियारों से लेकर व्यक्तिगत कक्षाओं तक पूरा परीक्षा वातावरण लाइव AI-आधारित CCTV निगरानी में होगा। यह 'कनेक्ट व्यू' सिस्टम सेंटर सुपरिंटेंडेंट, जिला कंट्रोल रूम और पुणे स्थित महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद के बीच वास्तविक समय में सीधा संपर्क प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

इस ऑपरेशन का लॉजिस्टिक पैमाना काफी बड़ा है। परीक्षा दो सत्रों में आयोजित की जाएगी, जिसमें पेपर I सुबह और पेपर II दोपहर में होगा। इसे प्रबंधित करने के लिए कलेक्टर के नेतृत्व में एक जिला-स्तरीय निगरानी समिति बनाई गई है, जिसे जोनल अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और क्लर्कों की टीम का समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, शिक्षा अधिकारियों (माध्यमिक और योजना) के नेतृत्व में मोबाइल फ्लाइंग स्क्वॉड केंद्रों पर गश्त करेंगे ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: व्यापक परिप्रेक्ष्य

TET परीक्षा में स्वचालित, तकनीक-प्रधान निगरानी की ओर बदलाव राज्य-स्तरीय भर्ती में बढ़ते रुझान को दर्शाता है। वर्षों से, शिक्षक पात्रता परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर पेपर लीक और प्रतिरूपण (impersonation) की खबरों के कारण सवाल उठते रहे हैं। मानव-निर्भर निगरानी से एकीकृत डिजिटल आर्किटेक्चर की ओर बढ़कर, सरकार 'जीरो-ट्रस्ट' प्रशासन की ओर बढ़ने का संकेत दे रही है। यदि अकोला में यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह राज्य भर की सभी भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक ब्लूप्रिंट बन सकता है, जिससे संगठित कदाचार के उन अवसरों को खत्म किया जा सकेगा जिन्होंने अतीत में कई करियर बर्बाद किए हैं।

उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने हॉल टिकट के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या वोटर आईडी जैसा कोई वैध फोटो पहचान पत्र साथ लाएं। अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि 313 दिव्यांग उम्मीदवारों को प्रोटोकॉल के अनुसार अतिरिक्त समय और लेखक (scribe) जैसी आवश्यक सहायता मिले। जैसे-जैसे 28 जून की तारीख नजदीक आ रही है, इस परीक्षा की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह डिजिटल निगरानी उन लोगों के बदलते तरीकों का मुकाबला कर पाएगी जो सिस्टम को धोखा देने की कोशिश करते हैं।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।