Politicalpedia
बिज़नेस

जबरन बिक्री का अंत: RBI ने 2027 से बैंकों द्वारा प्रोडक्ट बंडलिंग पर लगाई रोक

जनवरी 2027 से बैंकों की मनमानी और जबरन बंडलिंग पर RBI के नए नियम: 4 बड़ी बातें

द्वारा रोहन गुप्ताप्रकाशित 16 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
जबरन बिक्री का अंत: RBI ने 2027 से बैंकों द्वारा प्रोडक्ट बंडलिंग पर लगाई रोक
जबरन बिक्री का अंत: RBI ने 2027 से बैंकों द्वारा प्रोडक्ट बंडलिंग पर लगाई रोक

जनवरी 2027 से, बैंक आपके लोन के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस या अन्य सेवाओं को एक छिपी हुई शर्त नहीं बना पाएंगे। यह उपभोक्ता की स्वायत्तता के लिए एक बड़ी जीत है।

सालों से, कई भारतीय कर्जदार बैंक शाखाओं में होम लोन लेने जाते थे, लेकिन उन्हें लोन के साथ एक महंगी और अनचाही टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी थमा दी जाती थी। यह "अनिवार्य बंडलिंग"—जहाँ बैंक एक सेवा को दूसरी सेवा खरीदने की शर्त बना देता है—लंबे समय से खुदरा ग्राहकों के लिए परेशानी का सबब रही है। 15 जून, 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक ने आखिरकार इस पर लगाम लगाते हुए 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक - रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट) सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026' जारी किए हैं।

ये नए RBI दिशानिर्देश RBI के वित्तीय उत्पाद मिस-सेलिंग नियमों के लगातार उल्लंघन का सीधा जवाब हैं। जनवरी 1, 2027 से प्रभावी होने वाले इस आदेश में केंद्रीय बैंक का रुख स्पष्ट है: बैंकों को अपनी मुख्य सेवाओं का लाभ देने के लिए ग्राहकों को थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स (TPPS) खरीदने के लिए मजबूर करना बंद करना होगा। नियामक ने इसे एक सेवा को दूसरी सेवा पर निर्भर बनाने की प्रथा के रूप में परिभाषित किया है, जिसने कई लोगों को अनावश्यक कर्ज के जाल में फंसाया है।

नए आदेश का मतलब

इन दिशानिर्देशों का मूल आधार 'विकल्प' है। उन मामलों में जहाँ बैंक को जोखिम कम करने के लिए किसी सुरक्षा की आवश्यकता होती है—जैसे कि बड़े होम लोन के लिए जीवन बीमा पॉलिसी—वहाँ ग्राहकों को अब उस बैंक की अपनी सिस्टर कंपनी या पसंदीदा पार्टनर से ही पॉलिसी खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। नियमों में अब स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि जोखिम कम करने के लिए किसी उत्पाद की आवश्यकता है, तो उधारकर्ता को यह आजादी होनी चाहिए कि वह किसी भी प्रदाता से वह पॉलिसी ले सके।

यह कदम उस "लो या छोड़ो" वाली संस्कृति को खत्म करता है जिसने रिटेल बैंकिंग को प्रभावित किया है। लोन को क्रॉस-सेलिंग इंश्योरेंस और निवेश उत्पादों से अलग करके, नियामक उस हितों के टकराव को कम करना चाहता है, जो अक्सर बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर को वित्तीय सलाह देने के बजाय सेल्स टारगेट पूरा करने की ओर धकेलता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: ग्राहकों की शक्ति में बदलाव

खुदरा निवेशकों के लिए, यह एक लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार है। ऐतिहासिक रूप से, कई ग्राहक उन इंश्योरेंस प्रीमियमों के लिए उच्च-ब्याज वाले लोन लेने के लिए मजबूर हुए, जिनकी उन्हें कभी जरूरत ही नहीं थी। इन प्रथाओं पर रोक लगाकर, RBI अनिवार्य रूप से उधार लेने की "छिपी हुई" लागत को कम कर रहा है। हालांकि बैंक तर्क दे सकते हैं कि बंडलिंग से सुविधा मिलती है, लेकिन वास्तविकता यह रही है कि इसमें पारदर्शिता की कमी थी और उपभोक्ता का भरोसा टूटता था।

इसका व्यापक असर बैंकिंग क्षेत्र में अधिक अनुशासन के रूप में दिखेगा। जैसे-जैसे हम 2027 की समय सीमा के करीब पहुंच रहे हैं, बैंकों को अपने सेल्स मॉड्यूल और अनुपालन प्रशिक्षण (compliance training) में बदलाव करना होगा। Upstox जैसे प्लेटफॉर्म या आधिकारिक RBI सर्कुलर के माध्यम से इन घटनाक्रमों पर नजर रखने वाले निवेशकों और ग्राहकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह खुदरा वित्तीय आचरण को बेहतर बनाने के लिए एक बड़े प्रणालीगत अभियान का हिस्सा है। यदि इसे सख्ती से लागू किया जाता है, तो ये उपाय बैंकों को आक्रामक तरीके से उत्पाद बेचने के बजाय अपनी मुख्य सेवाओं की गुणवत्ता के दम पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर करेंगे।

द्वारा रोहन गुप्ता
बिज़नेस संवाददाता

रोहन गुप्ता पॉलिटिकलपीडिया के लिए अर्थव्यवस्था, बाज़ार और कंपनियों को कवर करते हैं।