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डिजिटल बदनामी या राजनीतिक विमर्श? CPI(M) सांसद ए.ए. रहीम ने सोशल मीडिया पर वायरल अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ दर्ज कराया केस

केरल के CPI(M) सांसद रहीम को निशाना बनाने वाली 'आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट' के खिलाफ मामला दर्ज

द्वारा प्रिया नायरप्रकाशित 15 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
डिजिटल बदनामी या राजनीतिक विमर्श? CPI(M) सांसद ए.ए. रहीम ने सोशल मीडिया पर वायरल अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ दर्ज कराया केस
डिजिटल बदनामी या राजनीतिक विमर्श? CPI(M) सांसद ए.ए. रहीम ने सोशल मीडिया पर वायरल अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ दर्ज कराया केस

तिरुवनंतपुरम पुलिस ने राज्यसभा सदस्य ए.ए. रहीम की शिकायत पर औपचारिक जांच शुरू कर दी है। रहीम का आरोप है कि एक छेड़छाड़ की गई फेसबुक पोस्ट के जरिए उनकी पार्टी के युवा संगठनों को नशीली दवाओं के खिलाफ एक बड़े अभियान से जोड़कर बदनाम किया गया।

केरल का डिजिटल परिदृश्य एक बार फिर राजनीतिक साख की लड़ाई का अखाड़ा बन गया है। इस सप्ताह, तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने CPI(M) के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम की औपचारिक शिकायत के बाद मामला दर्ज किया। विवाद के केंद्र में एक कथित मानहानिकारक फेसबुक पोस्ट है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। सांसद का कहना है कि यह पूरी तरह से मनगढ़ंत है।

यह विवाद राज्य सरकार के हाई-प्रोफाइल नशा-विरोधी अभियान 'ऑपरेशन तूफान' से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, अज्ञात लोगों ने सोशल मीडिया पर रहीम की एक तस्वीर के साथ पोस्ट डाली, जिसमें दावा किया गया कि ड्रग्स छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किए गए लोग CPI(M) के छात्र और युवा संगठन, SFI और DYFI के सदस्य हैं।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने पुष्टि की है कि यह मामला दो फेसबुक अकाउंट्स—'श्रीकांत पलिकाथोडे' और 'रियास थाथोथ' के एडमिन के खिलाफ दर्ज किया गया है। हालांकि जांच अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अधिकारियों ने भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और केरल पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों ने बताया कि इन अकाउंट्स के पीछे के लोगों की पहचान करने के लिए तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, साइबर सेल के सामने मुख्य चुनौती यह पता लगाना होगी कि क्या ये अकाउंट्स किसी संगठित राजनीतिक समूह से जुड़े हैं या फिर ये शरारती तत्वों का काम है।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है

यह घटना सोशल मीडिया के हथियार के रूप में इस्तेमाल होने के बढ़ते चलन को दर्शाती है, जहां वास्तविक राजनीतिक आलोचना और लक्षित दुष्प्रचार के बीच की रेखा धुंधली हो गई है। रहीम जैसे सार्वजनिक हस्तियों के लिए, किसी स्क्रीनशॉट या छेड़छाड़ की गई तस्वीर के फैलने की गति कानूनी कार्रवाई की गति से कहीं अधिक तेज होती है।

यह घटना राजनीतिक गलियारों में सोशल प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही की कमी को लेकर बढ़ती चिंता का संकेत है। जब नशीली दवाओं के खिलाफ राज्य के अभियान को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो यह न केवल किसी राजनेता की छवि को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि शासन के महत्वपूर्ण कार्यों के प्रति जनता की धारणा को भी प्रभावित करता है। संभावना है कि आने वाले समय में ऐसी कानूनी लड़ाइयां और बढ़ेंगी, क्योंकि राजनीतिक दल डिजिटल नैरेटिव को नियंत्रित करने के लिए पुलिस का सहारा ले रहे हैं।

द्वारा प्रिया नायर
राजनीतिक संवाददाता

प्रिया नायर पॉलिटिकलपीडिया के लिए दलों, चुनावों और सत्ता की राजनीति को कवर करती हैं।