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धर्मशाला प्रयोग: अफगानिस्तान सीरीज से पहले राहुल और ईशान ने बदली अपनी भूमिकाएं

विराट कोहली की जगह बैटिंग कर सकते हैं केएल राहुल, ईशान किशन ने की विकेटकीपिंग की प्रैक्टिस

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 13 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
धर्मशाला प्रयोग: अफगानिस्तान सीरीज से पहले राहुल और ईशान ने बदली अपनी भूमिकाएं
धर्मशाला प्रयोग: अफगानिस्तान सीरीज से पहले राहुल और ईशान ने बदली अपनी भूमिकाएं

विराट कोहली के आगामी सीरीज से बाहर होने के बाद, भारतीय टीम प्रबंधन अब रणनीतिक लचीलेपन पर जोर दे रहा है, जिसके तहत केएल राहुल और ईशान किशन ट्रेनिंग के दौरान अपनी पारंपरिक भूमिकाओं को बदलते नजर आए।

धर्मशाला की खूबसूरत वादियों में भारत और अफगानिस्तान के बीच होने वाली ind vs afg odi सीरीज के लिए टीम इंडिया नए रणनीतिक प्रयोग कर रही है। विराट कोहली के चोटिल होने के कारण बाहर होने से, टीम प्रबंधन सिर्फ उनका सीधा विकल्प नहीं तलाश रहा, बल्कि मध्यक्रम की गतिशीलता को भी नए सिरे से तैयार कर रहा है। हालिया अभ्यास सत्रों में ईशान किशन को विकेटकीपिंग करते और केएल राहुल को आउटफील्ड में कैचिंग ड्रिल्स पर ध्यान केंद्रित करते देखना, टीम के लंबे समय से चले आ रहे संयोजन में संभावित बदलाव का संकेत है।

रणनीति में बदलाव

सालों से राहुल भारतीय मध्यक्रम की धुरी रहे हैं, जो अक्सर विकेटकीपिंग और नंबर पांच पर बल्लेबाजी की दोहरी जिम्मेदारी संभालते आए हैं। हालांकि, मौजूदा ट्रेनिंग संकेत इस कठोरता से बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने पुष्टि की है कि टीम नंबर तीन के महत्वपूर्ण स्थान के लिए कई विकल्पों को आजमाना चाहती है—यह वह स्थान है जिसे आमतौर पर कोहली संभालते हैं। राहुल के अलावा, ईशान किशन और यशस्वी जायसवाल जैसे नामों पर भी इस स्थान के लिए विचार किया जा रहा है, जो आईसीसी के बड़े टूर्नामेंटों से पहले टीम की गहराई को परखने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

मोर्कल ने कहा, "हम अपनी टीम के संयोजन को बेहतर ढंग से समझना चाहते हैं और भविष्य के लिए अधिक विकल्प तैयार करना चाहते हैं।" उन्होंने सीरीज के लिए बल्लेबाजी क्रम को फिक्स न रखने के संकेत दिए। खिलाड़ियों को अलग-अलग क्रम पर खिलाकर, प्रबंधन एक ऐसी बहुमुखी टीम बनाना चाहता है जो किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर न रहे।

नए चेहरे और नई ऊर्जा

बल्लेबाजी के प्रयोगों के अलावा, धर्मशाला कैंप में युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव और गुरनूर बराड़ को भी शामिल किया गया है। मोर्कल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन दोनों के तालमेल से काफी संतुष्टि जताई और कहा कि उनमें घबराहट नहीं है और उनकी तकनीक काफी परिपक्व है। नेट गेंदबाज के रूप में काम कर चुके ये दोनों खिलाड़ी टीम की तीव्रता से वाकिफ हैं, और उनका संभावित डेब्यू भारत को डेथ ओवर्स में जरूरी विविधता प्रदान कर सकता है।

यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर

यह सीरीज अफगानिस्तान के खिलाफ तात्कालिक नतीजों से ज्यादा उस 'प्रक्रिया' के बारे में है, जो भारतीय क्रिकेट की चर्चाओं का मुख्य विषय बन गई है, जिस पर अक्सर sportsyaari और yaari जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बहस होती है। चाहे वह Gambhir का टीम पर प्रभाव हो या Surya, Patidar या Pant जैसे खिलाड़ियों का रोटेशन, यह स्पष्ट है कि प्रबंधन एक स्थिर एकादश के बजाय प्रतिभाओं के बड़े पूल को प्राथमिकता दे रहा है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव वाले माहौल में, एक ऐसा बेंच तैयार करना जरूरी है जो जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की भूमिका निभा सके। यदि भारत ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों को विकेटकीपिंग के लिए तैयार कर सकता है और दूसरों को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर प्रमोट कर सकता है, तो वे खिलाड़ियों पर निर्भरता की पुरानी समस्या को हल कर लेंगे। जैसे-जैसे क्रिकेट जगत Hindustan से लेकर Mshale जैसे वैश्विक आउटलेट्स और pbks जैसी चर्चाओं पर नजर बनाए हुए है, मुख्य सवाल यही है कि क्या धर्मशाला की इन प्रयोगशालाओं में किए गए प्रयोग मैदान पर सफलता में बदल पाएंगे।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।