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दिल्ली का इंतज़ार: मानसून आखिर क्यों कर रहा है देरी?

दिल्ली में मानसून कब दस्तक देगा? उमस और रुक-रुक कर हो रही बारिश ने लोगों को उलझन में डाला

द्वारा कबीर शर्माप्रकाशित 23 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
दिल्ली का इंतज़ार: मानसून आखिर क्यों कर रहा है देरी?
दिल्ली का इंतज़ार: मानसून आखिर क्यों कर रहा है देरी?

हालांकि आसमान में छाए बादल और अचानक हुई बारिश ने गर्मी से थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन राजधानी में मानसून के आधिकारिक आगमन को लेकर सवाल अब भी बरकरार है।

दिल्ली में पिछले कुछ दिन मौसम के लिहाज से काफी भ्रम पैदा करने वाले रहे हैं। एक पल के लिए आसमान का रंग गहरा स्लेटी हो जाता है और झमाझम बारिश होने लगती है, तो अगले ही पल धूप निकल आती है, जिससे सड़कें किसी 'स्टीम रूम' जैसी महसूस होने लगती हैं। बीच रास्ते में फंसे लोगों को यही लगता है कि मानसून आ गया है। फिर भी, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजधानी अभी भी प्री-मानसून के दौर में ही है। इसी वजह से लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि मानसून का असली आगमन कब होगा।

शहर की वर्तमान स्थिति मानसून की 'नकल' जैसा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून भले ही महाराष्ट्र, तेलंगाना से लेकर बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में सक्रिय हो, लेकिन इसने अभी तक दिल्ली की सीमा में आधिकारिक प्रवेश नहीं किया है। ये छिटपुट गरज-चमक और बादल केवल एक बड़ी मौसमी प्रणाली का हिस्सा हैं, जो भीषण गर्मी से थोड़ी राहत तो दे रहे हैं, लेकिन इन्हें मानसून की आधिकारिक शुरुआत नहीं माना जा सकता।

उमस क्यों बरकरार है?

शहर में बारिश और आंधी का दौर जारी रहने के बावजूद 'चिपचिपाहट' कम नहीं हो रही है। प्री-मानसून हलचल के कारण हवा में नमी का स्तर काफी अधिक है, जिससे मौसम असहज बना हुआ है। यह एक निराशाजनक चक्र है: बारिश तापमान तो कम कर देती है, लेकिन उसके बाद की उमस शहर को उमस भरा बनाए रखती है। जब मौसम प्रणाली शुष्क गर्मी से नमी वाली हवाओं की ओर बदल रही होती है, तो ऐसा पैटर्न अक्सर देखने को मिलता है।

देश के बाकी हिस्सों में मौसम की स्थिति कहीं अधिक स्पष्ट है। पूर्वोत्तर में असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश भारी बारिश के लिए तैयार हैं, जहां प्रशासन जलभराव और भूस्खलन के खतरों को लेकर हाई अलर्ट पर है। वहीं, पश्चिमी तट पर कोंकण और गोवा में मानसून जोर पकड़ रहा है। हालांकि इस दौरान सोशल मीडिया पर मुंबई के मौसम की चर्चा अक्सर हावी रहती है, लेकिन दिल्ली के लिए मानसून का इंतजार इस बात पर निर्भर करता है कि कब मौसमी परिस्थितियां मानसून की हवाओं को उत्तर की ओर खींचेंगी।

बड़ी तस्वीर

यह महत्वपूर्ण क्यों है? दिल्ली जैसे शहर के लिए 'प्री-मानसून' और 'मानसून' के बीच का अंतर केवल मौसम विभाग के लिए तकनीकी शब्द नहीं है; यह एनसीआर क्षेत्र में कृषि योजना से लेकर शहर की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों तक सब कुछ तय करता है। हम देख रहे हैं कि संक्रमण काल (ट्रांजिशन फेज) अधिक अनिश्चित होता जा रहा है, जो अक्सर कई दिनों तक पूर्ण मानसून जैसा महसूस होता है। यह 'फॉल्स स्टार्ट' यानी गलत शुरुआत हमारे बदलते जलवायु की एक पहचान बनती जा रही है, जिससे आम लोगों के लिए आने वाले मौसम की तैयारी करना मुश्किल हो गया है। जब तक IMD आधिकारिक घोषणा नहीं करता, राजधानी इस नम, चिपचिपे और अनिश्चित 'ग्रे ज़ोन' में ही रहेगी।

द्वारा कबीर शर्मा
फ़ीचर्स लेखक

कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।