Politicalpedia
चुनाव

दिल्ली मतदाता सूची संशोधन: बेघर हुए लोगों को भी शामिल करेगा चुनाव आयोग

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, जिन लोगों के घर गिराए गए, उन्हें भी दिल्ली SIR प्रक्रिया में जोड़ा जाएगा

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 30 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण में बेघर हुए मतदाताओं को शामिल किया जाएगा
दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण में बेघर हुए मतदाताओं को शामिल किया जाएगा

चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि राजधानी में हाल ही में हुई तोड़फोड़ की कार्रवाई से विस्थापित हुए नागरिक चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान अपने मताधिकार से वंचित न रहें।

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जोर पकड़ने के साथ ही, चुनाव आयोग (EC) एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती का सामना कर रहा है: उन मतदाताओं को कैसे ट्रैक किया जाए जिनके पंजीकृत घर अब जमींदोज हो चुके हैं। इस सप्ताह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार ने पुष्टि की कि उनका कार्यालय उन लोगों के मताधिकार की रक्षा के लिए एक विशेष तंत्र तैयार कर रहा है जिनके पते अब नक्शे से मिट चुके हैं।

30 जून से शुरू हुआ घर-घर जाकर सत्यापन का महीने भर चलने वाला अभियान शहर के मतदाता डेटा की सटीकता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यह देखते हुए कि कुछ निवासी विस्थापन के तुरंत बाद निवास का वैकल्पिक प्रमाण देने में संघर्ष कर सकते हैं, चुनाव आयोग ने लचीलापन बरतने के संकेत दिए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पंजीकृत पतों को—भले ही वे फ्लाईओवर के नीचे के खंभे जैसे अस्थाई स्थान ही क्यों न हों—बूथ-स्तरीय अधिकारी (BLO) के दौरों के दौरान संपर्क के वैध बिंदु के रूप में मानें।

दिल्ली SIR में समावेशन सुनिश्चित करना

दिल्ली की SIR प्रक्रिया 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे पुनरीक्षण के व्यापक तीसरे चरण का हिस्सा है। राष्ट्रीय राजधानी में 13,033 मतदान केंद्रों पर फैले 1.4 करोड़ मतदाताओं के साथ, इस अभियान का दायरा बहुत बड़ा है। विस्थापित लोगों के लिए, आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रारंभिक गणना के दौरान कोई मतदाता अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिलता है, तो पंजीकरण का रास्ता खुला रहेगा। 5 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद, नागरिकों के पास 4 सितंबर तक अपने नाम शामिल कराने के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने का समय होगा।

हालांकि मौजूदा कवायद तत्काल सत्यापन पर केंद्रित है, लेकिन चुनाव आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि जो लोग इस दौरान फॉर्म जमा करने में वास्तविक कठिनाई का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस साल के अंत में चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के और अवसर मिल सकते हैं। मौजूदा प्रक्रिया के लिए अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को प्रकाशित की जानी है, जो अक्टूबर की शुरुआत में समाप्त होने वाली सत्यापन अवधि के बाद आएगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

चुनाव आयोग का यह सक्रिय रुख इस बढ़ती समझ को दर्शाता है कि शहरी विस्थापन—जो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, अतिक्रमण विरोधी अभियानों और प्रशासनिक सफाई के कारण होता है—दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले केंद्रों में मतदाता सूची की पवित्रता को खतरे में डालता है। BLO को सबसे असामान्य पतों का भी भौतिक सत्यापन करने का आदेश देकर, चुनाव आयोग प्रशासनिक नीति और शहरी गरीबों की जमीनी हकीकत के बीच की खाई को पाटने का प्रयास कर रहा है। यह बदलाव महत्वपूर्ण है; यह चुनावी तंत्र को स्थिर दस्तावेजों पर कठोर निर्भरता से हटाकर अधिक समावेशी, जमीनी स्तर की सत्यापन प्रक्रिया की ओर ले जाता है। यदि यह सफल होता है, तो यह दृष्टिकोण भविष्य के राष्ट्रीय चुनाव चक्रों में अस्थायी या विस्थापित आबादी के अधिकारों के प्रबंधन के लिए एक मॉडल बन सकता है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।