रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर, शेयर बाजार में उछाल
रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन से बाजार गदगद, सेक्टर के शेयरों में तेजी। Paras Defence में 18 फीसदी का उछाल
स्वदेशी विनिर्माण में आई तेजी ने रक्षा सूचकांक को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है, जिसमें Paras Defence जैसी निजी कंपनियां बाजार में सबसे आगे हैं।
भारत की ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों और निजी विनिर्माण केंद्रों में हलचल पहले से कहीं अधिक तेज है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़े एक शानदार तस्वीर पेश करते हैं: 2025-26 के वित्तीय वर्ष में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष के ₹1.54 लाख करोड़ से यह 15.6 प्रतिशत की वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है; यह देश के रक्षा तंत्र में आए एक बुनियादी बदलाव को दर्शाता है। 2020-21 के वित्तीय वर्ष के बाद से, उत्पादन दोगुने से अधिक हो गया है, जो 110 प्रतिशत की वृद्धि के साथ एक परिपक्व सैन्य-औद्योगिक आधार का संकेत देता है।
निवेशकों ने इस संकेत को तुरंत भांप लिया। जैसे ही उत्पादन के इस मील के पत्थर की खबर आई, रक्षा सूचकांक में लगभग चार प्रतिशत की तेजी आई। paras defence share price सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला रहा, जो कारोबारी दिन के अंत तक 18 प्रतिशत से अधिक उछल गया। अन्य दिग्गज कंपनियों ने भी इसका अनुसरण किया, जिसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनेमिक्स और सोलर इंडस्ट्रीज ने चार प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की, जबकि GRSE जैसे जहाज निर्माताओं के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक का उछाल देखा गया।
निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी
हालांकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSUs) उद्योग की रीढ़ बने हुए हैं और कुल उत्पादन में 76 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं, लेकिन निजी क्षेत्र अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहा है। निजी निर्माताओं ने इस वर्ष ₹42,000 करोड़ का योगदान दिया—जो कि कुल उत्पादन का 24 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष के 22 प्रतिशत से अधिक है। यह विस्तार रक्षा विनिर्माण की बाधाओं को दूर करने और घरेलू नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किए गए निरंतर नीतिगत सुधारों का सीधा परिणाम है।
इस उत्पादन उछाल का असर निर्यात के आंकड़ों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जो ऐतिहासिक ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ये आंकड़े एक अधिक लचीली सुरक्षा वास्तुकला का प्रमाण हैं। दशकों तक आयात पर निर्भर रहने वाले इस क्षेत्र के लिए, स्वदेशी क्षमता के इस स्तर तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
यह केवल बाजार में सुर्खियां बटोरने वाले मुनाफे के बारे में नहीं है; यह एक दीर्घकालिक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। विदेशी प्लेटफार्मों के खरीदार से स्थानीय निर्माता बनने की दिशा में कदम बढ़ाकर, भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटकों से बचाने का प्रयास कर रहा है। उत्पादन में निरंतर वृद्धि यह बताती है कि "आत्मनिर्भर भारत" नीति अब केवल वैचारिक स्तर से आगे बढ़कर उच्च-मात्रा और उच्च-जटिलता वाले निष्पादन के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
हालांकि, उद्योग के लिए असली परीक्षा अभी बाकी है। इस गति को बनाए रखने के लिए, सरकार और निजी कंपनियों को केवल कलपुर्जों को असेंबल करने से आगे बढ़कर स्वदेशी R&D में अग्रणी बनना होगा। जैसे-जैसे यह क्षेत्र घरेलू खरीद बजट का अधिक हिस्सा हासिल करेगा, बाजार की उम्मीदें केवल उत्पादन की मात्रा से हटकर मार्जिन और तकनीकी सफलताओं पर केंद्रित हो जाएंगी। paras defence जैसे शेयरों में मौजूदा तेजी यह दिखाती है कि बाजार फिलहाल भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक लंबी अवधि की संरचनात्मक तेजी (bull run) की कहानी पर भरोसा कर रहा है।
कबीर शर्मा पॉलिटिकलपीडिया के लिए संस्कृति, तकनीक और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर लिखते हैं।