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डीक्लासिफाइड फाइलों का दावा: एंथनी फौची ने COVID-19 की उत्पत्ति पर कांग्रेस को गुमराह किया

अमेरिकी खुफिया प्रमुख ने COVID-19 से जुड़ी गोपनीय फाइलें सार्वजनिक कीं, फौची पर कांग्रेस को गुमराह करने का आरोप

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 20 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
डीक्लासिफाइड फाइलों का दावा: एंथनी फौची ने COVID-19 की उत्पत्ति पर कांग्रेस को गुमराह किया
डीक्लासिफाइड फाइलों का दावा: एंथनी फौची ने COVID-19 की उत्पत्ति पर कांग्रेस को गुमराह किया

खुफिया प्रमुख के रूप में अपने अंतिम घंटों में तुलसी गबार्ड द्वारा जारी किए गए नए डीक्लासिफाइड दस्तावेज अनुसंधान फंडिंग और वैश्विक महामारी की शुरुआत के बीच सीधे संबंध का संकेत देते हैं।

वाशिंगटन के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान में हलचल मचाने वाले एक कदम में, निवर्तमान खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने COVID-19 महामारी की उत्पत्ति से संबंधित संवेदनशील फाइलों का एक जखीरा सार्वजनिक किया है। अपने कार्यकाल के अंतिम घंटों में जारी किए गए इन दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि डॉ. एंथनी फौची ने वायरस की उत्पत्ति के आधिकारिक आकलन को तय करने में पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय भूमिका निभाई थी। इन आरोपों के केंद्र में यह दावा है कि अमेरिकी महामारी प्रतिक्रिया का चेहरा रहे फौची ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में अनुसंधान की फंडिंग के बारे में कांग्रेस को गुमराह किया था।

फाइलें बताती हैं कि फौची का उन अध्ययनों पर गहरा नियंत्रण था, जिन्हें आलोचक लंबे समय से 'गेन-ऑफ-फंक्शन' रिसर्च होने का संदेह जताते रहे हैं। खुलासों के अनुसार, खुफिया समुदाय के आंतरिक आकलन को कथित तौर पर फौची द्वारा प्रभावित किया गया था ताकि प्रयोगशाला से वायरस लीक होने की संभावना को कम करके दिखाया जा सके। 'द स्टेट्समैन' और विभिन्न वैश्विक समाचार एजेंसियों द्वारा उद्धृत ये दस्तावेज बताते हैं कि कैपिटल हिल में सांसदों को जो बताया जा रहा था और बंद दरवाजों के पीछे जो आंतरिक वैज्ञानिक बहस चल रही थी, उनके बीच एक बड़ा अंतर था।

जवाबदेही का सवाल

सालों से, वायरस की उत्पत्ति अमेरिकी राजनीति में विवाद का विषय बनी हुई है। फौची ने लगातार इस बात से इनकार किया है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) ने ऐसा कोई शोध फंड किया था जिससे महामारी फैल सकती थी। हालांकि, इन फाइलों का जारी होना उन लोगों को नया आधार देता है जो तर्क देते हैं कि वैज्ञानिक समुदाय और संघीय नियामकों ने जनता—और कांग्रेस—से वुहान से संबंधित प्रयोगों में शामिल जोखिमों की पूरी सच्चाई छिपाई थी।

हालांकि ये दस्तावेज गबार्ड की ओर से जाते-जाते किया गया एक प्रहार हैं, लेकिन ये ऐसे समय में सामने आए हैं जब राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में आने वाला प्रशासन संघीय एजेंसियों के व्यापक ऑडिट का संकेत दे रहा है। खुफिया खुलासे और डीप-स्टेट नौकरशाही की चल रही जांच का यह मेल बताता है कि पारदर्शिता पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है।

बड़ी तस्वीर

यह महत्वपूर्ण क्यों है? तत्काल राजनीतिक नतीजों से परे, यह घटना वैज्ञानिक संस्थानों और जनता के बीच भरोसे की बढ़ती नाजुकता को उजागर करती है। जब खुफिया जानकारी, सार्वजनिक स्वास्थ्य और विधायी निगरानी आपस में टकराते हैं, तो पारदर्शिता की कमी अनिवार्य रूप से साजिश के सिद्धांतों और संस्थागत अविश्वास को जन्म देती है।

यह सिर्फ एक व्यक्ति की गवाही के बारे में नहीं है; यह इस बारे में है कि अमेरिकी सरकार उच्च-जोखिम वाले वैज्ञानिक शोधों को कैसे संभालती है। यदि कांग्रेस को गुमराह करने के आरोप औपचारिक समीक्षा में सही साबित होते हैं, तो यह संघीय अनुसंधान अनुदानों की निगरानी के तरीके में बड़े बदलाव का कारण बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और वैज्ञानिक समुदाय के लिए, अब ध्यान इस बात पर है कि क्या इन डीक्लासिफाइड फाइलों में महामारी के शुरुआती दिनों की स्वतंत्र जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत हैं, या यह बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में केवल एक अंतिम, पक्षपातपूर्ण कदम है।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।