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डैनियल मुनोज़ के आखिरी पलों के गोल से कोलंबिया ने नॉकआउट में बनाई जगह

कोलंबिया 1 - 0 कांगो डीआर: मुनोज़ के गोल ने कोलंबिया को नॉकआउट में पहुंचाया

द्वारा अनन्या अय्यरप्रकाशित 24 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
डैनियल मुनोज़ के गोल से कोलंबिया ने ग्वाडलहारा में नॉकआउट में जगह पक्की की
डैनियल मुनोज़ के गोल से कोलंबिया ने ग्वाडलहारा में नॉकआउट में जगह पक्की की

बेहद दृढ़ कांगो की टीम आखिरकार 76वें मिनट में टूट गई, जिससे कोलंबिया ने वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में प्रवेश कर लिया।

ग्वाडलहारा की भीषण गर्मी में, पीले रंग की जर्सी पहने कोलंबियाई प्रशंसकों को काफी तनावपूर्ण रात का सामना करना पड़ा। 75 मिनट तक ऐसा लग रहा था कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के गोलकीपर, लियोनेल मपासी, अकेले दम पर कोलंबिया के आक्रमण की लय को बिगाड़ने पर आमादा हैं। ले हावरे के इस गोलकीपर ने बार-बार जेम्स रोड्रिगेज, लुइस डियाज़ और जॉन एरियास के हमलों को नाकाम किया। यह गतिरोध आखिरकार 76वें मिनट में टूटा, जब क्रिस्टल पैलेस के फुलबैक डैनियल मुनोज़ का शॉट स्टीव कपुआडी से टकराकर दिशा बदल गया और मपासी को छकाते हुए गोल में चला गया, जिससे कोलंबिया को 1-0 की जीत और नॉकआउट का टिकट मिल गया।

यह मैच 'लॉस कैफेटेरोस' (कोलंबियाई टीम) के लिए दृढ़ता की परीक्षा जैसा था। कोलंबिया, जिसने गेंद पर अपना दबदबा बनाए रखा और हाफ-टाइम तक 15 शॉट लगाए, कांगो की मजबूत रक्षा पंक्ति से परेशान दिखा। यहां तक कि उनके 'लिविंग स्टैच्यू' प्रशंसक मिशेल नकुका मबोलाडिंगा की मौजूदगी भी अफ्रीकी टीम के लिए कोई बड़ा बदलाव नहीं ला सकी, हालांकि वे योएन विसा और सेड्रिक बाकम्बु के जरिए जवाबी हमलों में खतरा बने रहे। लुइस डियाज़ के दो गोल देर से खारिज किए गए—एक फाउल के लिए और दूसरा ऑफसाइड के लिए—लेकिन मुनोज़ का एकमात्र गोल कोलंबिया को ग्रुप K में छह अंकों तक पहुंचाने के लिए काफी था।

बड़ी तस्वीर

यह जीत केवल जीत के आंकड़ों में एक और नाम नहीं है; यह 11वीं रैंकिंग वाली उस टीम की ओर से एक बड़ा संदेश है जो पिछले टूर्नामेंट में जगह नहीं बना पाई थी। अगले चरण में अपना रास्ता पक्का करके, कोलंबिया ने अब शनिवार को मियामी गार्डन्स में पुर्तगाल के साथ एक हाई-प्रोफाइल मुकाबले की तैयारी कर ली है। दोनों टीमें ग्रुप में शीर्ष स्थान पर नजर गड़ाए हुए हैं, इसलिए यह मैच काफी महत्वपूर्ण है: विजेता टीम अगले दौर में इंग्लैंड या क्रोएशिया जैसी दिग्गज टीमों से भिड़ने से बच सकती है। कोलंबिया के लिए, चुनौती अब केवल क्वालीफाई करने की नहीं, बल्कि टूर्नामेंट में आगे तक जाने की है।

डीआर कांगो के लिए यह हार एक कड़वी गोली की तरह है, लेकिन उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। हार के बावजूद, राउंड ऑफ 32 में पहुंचने की उनकी उम्मीदें अभी भी जीवित हैं। पुर्तगाल के खिलाफ उनके शुरुआती ड्रॉ ने साबित कर दिया कि वे फुटबॉल की दिग्गज टीमों को टक्कर दे सकते हैं, और उज्बेकिस्तान के खिलाफ उनका अंतिम ग्रुप मैच निर्णायक साबित होगा। टूर्नामेंट का प्रारूप, जो टीमों को अंकों और गोल अंतर के आधार पर आगे बढ़ने का मौका देता है, यह सुनिश्चित करता है कि कांगो की टीम अटलांटा में अपनी पूरी ताकत झोंक देगी।

स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का उत्साह पिच पर चल रही रणनीतिक लड़ाई को एक मानवीय स्पर्श दे रहा था। स्टेडियम का 90% से अधिक हिस्सा कोलंबियाई समर्थकों से भरा था, और मबोलाडिंगा की उपस्थिति—जिन्होंने स्टेडियम तक पहुंचने के लिए तमाम प्रशासनिक बाधाओं को पार किया—इस बात की याद दिलाती है कि इस वर्ल्ड कप ने किस तरह का अनूठा जुनून पैदा किया है। जैसे ही कोलंबिया क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल के खिलाफ अपने मुकाबले की तैयारी कर रहा है, वे उस आत्मविश्वास के साथ उतरेंगे जिसने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में भी जीतना सिखाया है।

द्वारा अनन्या अय्यर
वैश्विक मामले संवाददाता

अनन्या अय्यर पॉलिटिकलपीडिया के लिए भारतीय दृष्टिकोण से वैश्विक मामलों को कवर करती हैं।