ग्लोबल दबाव के बीच दलाल स्ट्रीट की चाल सुस्त, घरेलू तेजी पर लगा ब्रेक
सुस्त कारोबार के बीच शेयर बाजार सपाट
एशियाई बाजारों की कमजोरी और विदेशी फंडों की लगातार निकासी के चलते निवेशकों ने फिलहाल सतर्क रुख अपना लिया है, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स सुस्त कारोबार कर रहे हैं।
दलाल स्ट्रीट पर पिछले हफ्ते दिखी चार दिनों की तेजी का उत्साह मंगलवार सुबह ठंडा पड़ता नजर आया। लगातार एक हफ्ते की बढ़त के बाद, सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत लाल निशान के साथ हुई। बाजार में छाई इस सावधानी ने कई खुदरा निवेशकों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आज निफ्टी क्यों गिर रहा है। हालांकि, सत्र के आगे बढ़ने के साथ इंडेक्स ने कुछ नुकसान की भरपाई की और मामूली बढ़त के साथ कारोबार किया, लेकिन कुल मिलाकर बाजार का मूड सुस्त ही बना हुआ है।
यह हिचकिचाहट कई बाहरी दबावों का मिश्रण है। पूरे एशिया में इक्विटी मार्केट भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं; विशेष रूप से दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 6% तक लुढ़क गया, जबकि निक्केई और हैंग सेंग भी संभलने के लिए संघर्ष करते दिखे। इस नकारात्मक क्षेत्रीय रुख और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा सोमवार को ₹635.91 करोड़ की बिकवाली ने स्थानीय धारणा को कमजोर कर दिया है।
सेक्टोरल बदलाव और अस्थिरता का कारक
30 शेयरों वाले बीएसई सेंसेक्स में आज का सत्र मिला-जुला रहा। इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज आईटी शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा, जिससे इंडेक्स पर असर पड़ा। इसके विपरीत, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बैंकिंग और डिफेंसिव शेयरों ने ट्रेडिंग सत्र को सहारा दिया।
इंट्राडे में सेंसेक्स का करीब 60 पॉइंट तक गिरकर फिर संभलना यह दर्शाता है कि लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली हावी होने पर स्टॉक मार्केट कितनी जल्दी करवट ले सकता है। निफ्टी, जो शुरुआती घंटों में 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया था, ट्रेडर्स की संवेदनशीलता को दर्शाता है। वे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों (जो $77.53 तक नरम हुई हैं) से लेकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित कदमों तक, हर ग्लोबल संकेत पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।
यह क्यों मायने रखता है: बड़ी तस्वीर
बाजार का यह दौर एक जरूरी ठहराव माना जा सकता है। पिछले हफ्ते और सोमवार के सत्र में बढ़त दर्ज करने के बाद, बाजार का सपाट रुख यह बताता है कि फिलहाल मार्केट 'प्राइस-डिस्कवरी' मोड में है। 'निफ्टी क्यों गिर रहा है' जैसी चिंताएं अक्सर मुनाफावसूली के दौरान पैदा होती हैं, लेकिन अनुभवी जानकारों के लिए यह संकेत है कि पिछले कुछ दिनों का उत्साह अब वैल्यूएशन संबंधी चिंताओं के कारण संतुलित हो रहा है।
आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू अर्थव्यवस्था शंघाई और टोक्यो में दिख रही अस्थिरता से खुद को कितना अलग रख पाती है। यदि विदेशी निवेशकों की निकासी इसी रफ्तार से जारी रही, तो बाजार के लिए अल्पावधि में अपने हालिया उच्च स्तर को फिर से हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल, अगले कुछ दिनों की चाल इस बात पर तय होगी कि क्या व्यापक बाजार इन बाहरी झटकों को झेल पाएगा या यह सावधानी एक बड़े बिकवाली के दौर में बदल जाएगी।
अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।