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सीमा पार तनाव: अफगानिस्तान सीमा पर पाकिस्तान की कार्रवाई में 29 आतंकवादी ढेर

पाकिस्तान का दावा: अफगानिस्तान सीमा के पास की गई स्ट्राइक में 29 आतंकवादी मारे गए

द्वारा अर्जुन मेहताप्रकाशित 29 जून 2026· 2 मिनट पढ़ें
सीमा पार तनाव: अफगानिस्तान सीमा पर पाकिस्तान की कार्रवाई में 29 आतंकवादी ढेर
सीमा पार तनाव: अफगानिस्तान सीमा पर पाकिस्तान की कार्रवाई में 29 आतंकवादी ढेर

कराची में अर्धसैनिक बलों के मुख्यालय पर हुए भीषण हमले के बाद इस्लामाबाद ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर जमीनी और हवाई अभियान शुरू किया है।

डूरंड लाइन पर बनी नाजुक शांति एक बार फिर भंग हो गई है। रविवार, 28 जून 2026 को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक समन्वित जमीनी अभियान चलाया और उसके बाद उन ठिकानों पर 'कैलिब्रेटेड स्ट्राइक' की, जिन्हें अधिकारी आतंकवादियों का सुरक्षित पनाहगाह बताते हैं। सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार, इस मिशन में 29 लड़ाके मारे गए हैं, जो इस्लामाबाद और काबुल के बीच चल रहे 'शैडो वॉर' में एक हिंसक मोड़ है।

यह सैन्य कार्रवाई एक दिन पहले कराची में हुए बर्बर हमले के बाद की गई, जहां सशस्त्र आतंकवादियों ने अर्धसैनिक बल 'रेंजर्स' के क्षेत्रीय मुख्यालय पर धावा बोल दिया था। इस मुठभेड़ में तीन सैनिक शहीद हो गए थे, और सुरक्षा बलों ने बाद में एक घायल हमलावर को पकड़ा, जिसकी पहचान सेना ने अफगान नागरिक के रूप में की है। इस हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के गुट जमात-उल-अहरार ने ली है।

हिंसा का चक्र

यह ताजा घटना कोई इकलौती घटना नहीं है। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से दोनों पड़ोसियों के बीच सैन्य कार्रवाई का एक सिलसिला चल रहा है। जहां पाकिस्तान का कहना है कि वह TTP के ठिकानों को निशाना बना रहा है—जो अफगान तालिबान का सहयोगी गुट है—वहीं काबुल इन घुसपैठों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है।

जमीनी हालात को लेकर रिपोर्टें अस्पष्ट और विरोधाभासी हैं। जहां इस्लामाबाद का दावा है कि उसकी स्ट्राइक आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल ऑपरेशन थी, वहीं सीमा के अफगान पक्ष से आ रही स्थानीय रिपोर्टें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं, जिसमें बड़े पैमाने पर नागरिकों के हताहत होने का आरोप लगाया गया है। केवल फरवरी से अब तक सीमा पार की लड़ाई में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, और दोनों राजधानियों के आधिकारिक बयानों में भारी अंतर यह दर्शाता है कि इस्लामाबाद द्वारा वर्णित 'खुला युद्ध' अभी खत्म नहीं हुआ है।

यह क्यों मायने रखता है: क्षेत्रीय प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता के कई प्रयासों की विफलता ने दोनों देशों को एक अनिश्चित स्थिति में डाल दिया है। पाकिस्तान के लिए, पुलिस और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाले आतंकवादी हमलों को रोकने का घरेलू दबाव बहुत अधिक है, जो उसे आक्रामक, हालांकि जोखिम भरे, सीमा पार कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहा है। हालांकि, ये हमले अफगान तालिबान के साथ राजनयिक दूरियों को और गहरा करते हैं, जिन्होंने लगातार पाकिस्तानी आतंकवादियों को पनाह देने से इनकार किया है।

बड़ी तस्वीर क्षेत्रीय अस्थिरता के गहराने की है। जब तक सीमा छद्म युद्ध के लिए एक छिद्रपूर्ण मोर्चा बनी रहेगी, तब तक व्यापक तनाव की संभावना बनी रहेगी। चीन के शांति प्रयासों के विफल रहने और किसी औपचारिक युद्धविराम तंत्र के अभाव में, सीमा की सुरक्षा अगले आतंकवादी हमले की बंधक बनी रहेगी। फिलहाल, सीमा एक बारूद के ढेर की तरह है, जहां स्थानीय झड़पें किसी भी समय एक बड़े और अनियंत्रित क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती हैं।

द्वारा अर्जुन मेहता
राष्ट्रीय मामले संवाददाता

अर्जुन मेहता पॉलिटिकलपीडिया के लिए सरकार, नीति और संसद पर रिपोर्ट करते हैं।